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जिला अस्पताल : 16 सीसी टीवी कैमरों में सिर्फ आठ कर रहे काम
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जिला अस्पताल परिसर में लगा सीसी कैमरा। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिला अस्पताल में इमरजेंसी समेत महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी को लगाए गए सीसी टीवी कैमरे सिर्फ नाम भर के साबित हो रहे हैं। कहने को तो अलग-अलग स्थानों पर 16 सीसी टीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन इनमें काम सिर्फ आठ ही काम कर रहे हैं।
सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम के कार्यालय में सीसी टीवी कैमरों का कंट्रोल रूम है, लेकिन उनका ध्यान भी खराब पड़े आठ कैमरों को दुरुस्त कराने के संबंध में नहीं आता। इससे इमरजेंसी समेत अन्य स्थानों पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
जिला अस्पताल परिसर में लगे 16 कैमरों में जो आठ कैमरे काम कर रहे हैं उनमें पांच कैमरे सीएमएस कार्यालय के बाहर परिसर में निगरानी को लगे हैं। एक कैमरा सीएमएस कार्यालय के भीतर और एक बाहर गैलरी की फुटेज कैद करता है। एक अन्य चालू हालत में कैमरा भी काम कर रहा है जो वार्ड के बाहर गैलरी में लगा है। इसके अलावा महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे आठ कैमरे काम ही नहीं कर रहे। इमरजेंसी स्टाफ पर अक्सर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगते हैं। गौर करने की बात यह है कि यहां कोई कैमरा काम ही नहीं करता। अगर कैमरा ठीक कराया भी जाता है तो कुछ ही दिनों में फिर से खराब हो जाता है।
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पिछलेे दिनों शहर विधायक महेश गुप्ता समेत भाजपा नेताओं के सामने एक महिला ने इमरजेंसी स्टाफ पर रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इसके बाद 18 जून को जब सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार अपनी चार वर्ष की बेटी को इलाज के लिए इमरजेंसी लेकर पहुंचे तो स्टाफ की एक और लापरवाही सामने आई। उनकी बेटी को इलाज नहीं मिला। यहां खराब पड़े सीसी कैमरे रिश्वतखोरों और लापरवाहों की गलियों पर पर्दा डाल देते हैं।
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जिम्मेदार बंदरों पर लगाते हैं दोष
जिला अस्पताल प्रशासन के मुखिया सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम कैमरे खराब होने के लिए दोष बंदरों पर मढ़ते हैं। वह कहते हैं कि बंदर कैमरे खराब कर देते हैं।
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फोटो- 18
इमरजेंसी समेत अस्पताल परिसर और महत्वपूर्ण 16 स्थानों पर सीसी टीवी कैमरे लगे हैं। कुछ कैमरे बंदरों ने खराब कर दिए हैं। कुछ स्थानों पर बंदरों ने केबल काट दी हैं इस वजह से कैमरे काम नहीं कर रहे। संबंधितों को कैमरे दुरुस्त कराने को लेकर निर्देशित किया गया है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस
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सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम के कार्यालय में सीसी टीवी कैमरों का कंट्रोल रूम है, लेकिन उनका ध्यान भी खराब पड़े आठ कैमरों को दुरुस्त कराने के संबंध में नहीं आता। इससे इमरजेंसी समेत अन्य स्थानों पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
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जिला अस्पताल परिसर में लगे 16 कैमरों में जो आठ कैमरे काम कर रहे हैं उनमें पांच कैमरे सीएमएस कार्यालय के बाहर परिसर में निगरानी को लगे हैं। एक कैमरा सीएमएस कार्यालय के भीतर और एक बाहर गैलरी की फुटेज कैद करता है। एक अन्य चालू हालत में कैमरा भी काम कर रहा है जो वार्ड के बाहर गैलरी में लगा है। इसके अलावा महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे आठ कैमरे काम ही नहीं कर रहे। इमरजेंसी स्टाफ पर अक्सर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगते हैं। गौर करने की बात यह है कि यहां कोई कैमरा काम ही नहीं करता। अगर कैमरा ठीक कराया भी जाता है तो कुछ ही दिनों में फिर से खराब हो जाता है।
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पिछलेे दिनों शहर विधायक महेश गुप्ता समेत भाजपा नेताओं के सामने एक महिला ने इमरजेंसी स्टाफ पर रिश्वत लेने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था। इसके बाद 18 जून को जब सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार अपनी चार वर्ष की बेटी को इलाज के लिए इमरजेंसी लेकर पहुंचे तो स्टाफ की एक और लापरवाही सामने आई। उनकी बेटी को इलाज नहीं मिला। यहां खराब पड़े सीसी कैमरे रिश्वतखोरों और लापरवाहों की गलियों पर पर्दा डाल देते हैं।
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जिम्मेदार बंदरों पर लगाते हैं दोष
जिला अस्पताल प्रशासन के मुखिया सीएमएस डॉ. विजय बहादुर राम कैमरे खराब होने के लिए दोष बंदरों पर मढ़ते हैं। वह कहते हैं कि बंदर कैमरे खराब कर देते हैं।
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फोटो- 18
इमरजेंसी समेत अस्पताल परिसर और महत्वपूर्ण 16 स्थानों पर सीसी टीवी कैमरे लगे हैं। कुछ कैमरे बंदरों ने खराब कर दिए हैं। कुछ स्थानों पर बंदरों ने केबल काट दी हैं इस वजह से कैमरे काम नहीं कर रहे। संबंधितों को कैमरे दुरुस्त कराने को लेकर निर्देशित किया गया है।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस