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जल्द ही एक यूनिट ब्लड चार जिंदगियां बचाने के आएगा काम
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जिला अस्पताल में शुरू हुआ ब्लड कंपोनेंट यूनिट के भवन का निर्माण। संवाद
- फोटो : BADAUN
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बदायूं। जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट की स्थापना का काम चालू हो गया है। उम्मीद है कि अगले साल तक यूनिट काम शुरू कर देगी। आधुनिक ब्लड कंपोनेंट यूनिट में खून से चार तत्वों को अलग-अलग करने के लिए जर्मनी की मशीनें और उपकरण लगाए जाएंगे। कंपोनेंट यूनिट के लिए ब्लड बैंक के पास भवन निर्माण का काम चालू हो गया है। यूनिट शुरू होने के बाद एक यूनिट ब्लड चार लोगों की जिंदगी बचाने का काम आएगा।
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 300 यूनिट खून का स्टॉक करने की क्षमता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से साल भर में 3000 से 3500 जरूरतमंद बीमारों, घायलों और प्रसूताओं को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। अब तक यहां ब्लड कंपोनेंट यूनिट न होने के कारण एक यूनिट ब्लड एक जरूरतमंद के ही काम आता है। कंपोनेंट यूनिट चालू होने के बाद एक यूनिट ब्लड चार जिंदगियां बचाने के काम आएगा। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में ब्लड की एक यूनिट को चार अलग-अलग तत्वों रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट में विभाजित करने का काम किया जाएगा। इसके बाद जरूरतमंदों को ब्लड के जरूरी तत्व ही दिए जाएंगे।
दरअसल, अब तक जिले में सभी प्रकार के जरूरतमंदों को रक्त चढ़ाया जाता है। इनमें वे जरूरतमंद भी शामिल होते हैं जिनको ब्लड के कुछ तत्वों की जरूरत होती है। कंपोनेंट यूनिट के काम चालू करने के बाद जरूरतमंदों को रक्त के वही तत्व दिए जाएंगे जिनकी उनको जरूरत है। ऐसे में एक यूनिट रक्त चार लोगों की जिंदगी बचाने के काम आएगा।
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डेंगू रोगियों को आसानी से मिल सकेंगे प्लेटलेट्स
मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं प्रदेश में हाईरिस्क है। हर वर्ष यहां डेंगू का व्यापक प्रकोप रहता है। डेंगू के रोगी के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम हो जाती है। अब तक जिले में ब्लड के प्लेटलेट्स तत्व की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रोगियों की जान बचाने के लिए परिवार के लोगों को बरेली, शाहजहांपुर तक की दौड़ लगानी होती है। जिले में ब्लड कंपोनेंट यूनिट चालू होने के बाद जिला अस्पताल में ही आसानी से डेंगू रोगियों को प्लेटलेट्स मिल सकेगा।
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इस तरह काम करती है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड की परत दर परत को अलग किया जाता है। इसके बाद आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल लिया जाता है। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट रक्त तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी कर सकता है।
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जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट यूनिट की स्थापना का काम चालू हो गया है। यूनिट के लिए अलग से नया भवन बनाया जा रहा है। भवन निर्माण पूरा होने के बाद मशीनें और अन्य उपकरण भी आ जाएंगे। उम्मीद है कि अगले साल तक ब्लड कंपोनेंट यूनिट काम चालू कर देगी।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 300 यूनिट खून का स्टॉक करने की क्षमता है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से साल भर में 3000 से 3500 जरूरतमंद बीमारों, घायलों और प्रसूताओं को रक्त उपलब्ध कराया जाता है। अब तक यहां ब्लड कंपोनेंट यूनिट न होने के कारण एक यूनिट ब्लड एक जरूरतमंद के ही काम आता है। कंपोनेंट यूनिट चालू होने के बाद एक यूनिट ब्लड चार जिंदगियां बचाने के काम आएगा। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में ब्लड की एक यूनिट को चार अलग-अलग तत्वों रेड ब्लड सेल (आरबीसी), प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट में विभाजित करने का काम किया जाएगा। इसके बाद जरूरतमंदों को ब्लड के जरूरी तत्व ही दिए जाएंगे।
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दरअसल, अब तक जिले में सभी प्रकार के जरूरतमंदों को रक्त चढ़ाया जाता है। इनमें वे जरूरतमंद भी शामिल होते हैं जिनको ब्लड के कुछ तत्वों की जरूरत होती है। कंपोनेंट यूनिट के काम चालू करने के बाद जरूरतमंदों को रक्त के वही तत्व दिए जाएंगे जिनकी उनको जरूरत है। ऐसे में एक यूनिट रक्त चार लोगों की जिंदगी बचाने के काम आएगा।
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डेंगू रोगियों को आसानी से मिल सकेंगे प्लेटलेट्स
मच्छरजनित बीमारियों के लिहाज से बदायूं प्रदेश में हाईरिस्क है। हर वर्ष यहां डेंगू का व्यापक प्रकोप रहता है। डेंगू के रोगी के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से कम हो जाती है। अब तक जिले में ब्लड के प्लेटलेट्स तत्व की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में रोगियों की जान बचाने के लिए परिवार के लोगों को बरेली, शाहजहांपुर तक की दौड़ लगानी होती है। जिले में ब्लड कंपोनेंट यूनिट चालू होने के बाद जिला अस्पताल में ही आसानी से डेंगू रोगियों को प्लेटलेट्स मिल सकेगा।
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इस तरह काम करती है कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट
ब्लड में चार कंपोनेंट होते हैं। सेपरेशन यूनिट में ब्लड की परत दर परत को अलग किया जाता है। इसके बाद आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स और क्रायोप्रेसीपिटेट अलग-अलग हो जाते हैं। जरूरत के मुताबिक इनको निकाल लिया जाता है। निकाले गए रक्त के प्रत्येक तत्व की अलग-अलग जीवन अवधि होती है। एक यूनिट रक्त तीन से चार लोगों की जरूरत पूरी कर सकता है।
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जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट यूनिट की स्थापना का काम चालू हो गया है। यूनिट के लिए अलग से नया भवन बनाया जा रहा है। भवन निर्माण पूरा होने के बाद मशीनें और अन्य उपकरण भी आ जाएंगे। उम्मीद है कि अगले साल तक ब्लड कंपोनेंट यूनिट काम चालू कर देगी।
-डॉ. विजय बहादुर राम, सीएमएस, जिला अस्पताल