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बदायूं: फांसी की सजा सुनकर भी नहीं डरा हत्यारा रूपकिशोर, गिरफ्तारी के दौरान दांतों से चबा लिया था सिपाही का हाथ
Wed, 06 Apr 2022 10:31 PM IST
Vikas Kumar
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं
Published by: Vikas Kumar
Updated Wed, 06 Apr 2022 10:31 PM IST
सार
नत्थूलाल के बेटे ओमपाल ने बताया कि जिस तरह हत्यारोपी ने उनके पिता की हत्या की। उसके अनुसार उसे फांसी की ही सजा सुनाई जानी चाहिए थी। न्यायालय ने बिल्कुल सही फैसला सुनाया है।
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हत्यारा रूपकिशोर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
बुधवार को स्पेशल जज एससी एसटी महेंद्र सिंह तृतीय की अदालत में फांसी की सजा सुनाने के दौरान हत्यारोपी रूपकिशोर के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी और न ही उसे हत्या करने का पछतावा हो रहा था। वह चुपचाप खड़ा फांसी की सजा सुनता रहा। जब कोर्ट मोहरिर्र सरवीर सिंह ने आदेश पर अंगूठा लगवाया। तब भी उसके चेहरे का भाव नहीं बदला।
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हत्यारोपी रूपकिशोर मूल रूप से बिल्सी थाना क्षेत्र के गांव बमेड़ का रहने वाला है। जबकि बुजुर्ग किसान नत्थूलाल दीननगर शेखपुर गांव के थे। उनके खेत बराबर में थे। इससे खेत पर आने-जाने के दौरान कभी कभी मुलाकात हो जाया करती थी लेकिन नत्थूलाल व उनके परिवार वालों को उसका स्वभाव पता नहीं था। वह कैसी प्रवृति का है, ये तो हत्या वाली रात पता चला। उस दौरान वह जैसे राक्षस बन गया था। उसके सामने जो भी आ रहा था वो उस पर हमला कर रहा था। उसने सबसे पहले नत्थूलाल की हत्या के प्रत्यक्षदर्शी नंदराम पर ही हमला बोल दिया था। वह उससे डरकर भाग खड़े हुए। इसकी सूचना पर नत्थूलाल के परिवार वाले पहुंचे तो उसने उन पर भी हमला कर दिया। हालांकि उन्होंने रूपकिशोर को पकड़ लिया था। उसे रस्सी से बांधकर डाल दिया था। सुबह के समय पुलिस पहुंची तो पुलिस के कब्जे में भी बमुश्किल आया। उसने थाने के एक सिपाही के हाथ का हिस्सा चबा लिया। पुलिस के चंगुल से भागने की कोशिश की थी। जैसे-तैसे उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था।
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एक पत्नी की हत्या की, दूसरी छोड़कर चली गई
रूपकिशोर ने तीन शादियां की थीं। उसकी पहली पत्नी दूसरे प्रांत की थी। उसकी उसने जलाकर हत्या कर दी। शिकायत न होने से कार्रवाई नहीं हुई थी। दूसरी पत्नी उसके गुस्सैल रवैये को देखकर छोड़कर मायके चली गई तो उसने तीसरी शादी कर ली।
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अपने परिवार से अलग रहते थे नत्थूलाल
नत्थूलाल के चार बेटे हैं। इसके बावजूद वह अपने बेटों से अलग रहते थे। उनके साथ केवल उनकी पत्नी कोकला देवी रहती थीं। वह अपनी खेतीबाड़ी भी स्वयं करते थे। हालांकि उनके बेटे इस दौरान हाथ बंटा देते थे।
बेटा बोला- हत्यारोपी को फांसी की सजा सुनकर मिली शांति
नत्थूलाल के बेटे ओमपाल ने बताया कि जिस तरह हत्यारोपी ने उनके पिता की हत्या की। उसके अनुसार उसे फांसी की ही सजा सुनाई जानी चाहिए थी। न्यायालय ने बिल्कुल सही फैसला सुनाया है। हालांकि उसके पिता वापस नहीं आ सकते लेकिन हत्यारोपी को सजा से उसे सुकून जरूर मिला है।
कोर्ट ने की टिप्पणी
पाइप देने से मना करने की मात्र छोटी सी बात पर बुजुर्ग को जातिसूचक गालियां देते हुए बलपूर्वक व निर्दयतापूर्वक फावड़े से चार बार वार कर क्रूरता पूर्वक सिर धड़ से अलग कर दिया गया। फावड़े से इतने वार किए गए कि उनका मस्तिष्क, आंख, कान और शरीर के कई भाग बाहर आ गए। सिर को काटकर जमीन में गाढ़ दिया गया। शेष शरीर को साक्ष्य छिपाने के आशय से छुपाया। एक वृद्घ व्यक्ति के साथ नवयुवक हत्यारे ने कोई दया नहीं दिखाई गई। ये अपराध क्रूरता, जघन्यता व अपराध की विरलतम की श्रेणी में आता है। - महेंद्र सिंह तृतीय, स्पेशल जज एससी एसटी कोर्ट