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सहसवानःसपा दुर्ग बचाने में जुटी, चतुष्कोणीय मुकाबले में दिग्गजों की प्रतिष्ठा फंसी

Sun, 13 Feb 2022 01:03 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 13 Feb 2022 01:03 AM IST
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सहसवान में बना सरसोता।संवाद - फोटो : BADAUN
बदायूं। जिले की सहसवान विधानसभा सीट पर इस बार सबसे रोमांचक मुकाबला दिखाई दे रहा है। सपा के सामने अपना दुर्ग बचाने की चुनौती है तो भाजपा प्रत्याशी यहां इतिहास बदलने को मशक्कत कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि बसपा का हाथी भी यहां मस्त चाल से चल रहा है। पूर्व मंत्री ओमकार सिंह व डीपी यादव भी यहां अपने बेटों को राजनीति में स्थापित करने की खातिर इलाके मथ रहे हैं।
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पूरे जिले में सर्वाधिक दिलचस्प चुनावी मुकाबला इस बार सहसवान सीट पर दिखाई दे रहा है। सहसवान में भाजपा ने ब्राह्मण चेहरे के रूप में डीके भारद्वाज को टिकट दिया है जो दमदारी से पार्टी को उस इलाके में जीत दिलाने में जुटे हैं। सपा से पूर्व पंचायती राज मंत्री ओमकार सिंह यहां मौजूदा विधायक हैं। पांच बार के विधायक ओमकार सिंह ने इस बार बेटे ब्रजेश यादव को विरासत सौंप दी है। ब्रजेश लंबे समय से इलाके में घूमकर प्रचार कर रहे हैं। पिता का साथ भी उन्हें मिल रहा है। सहसवान से विधायक रह चुके डीपी यादव ने भी ओमकार की तर्ज पर अपने बेटे कुणाल यादव को चुनावी मैदान में उतारा है। खुद डीपी भी बेटे को जिताने के लिए गांव-गांव सभाएं कर रहे हैं। बसपा ने बिल्सी क्षेत्र के अपने पूर्व विधायक हाजी मर्सरत अली बिट्टन पर दांव लगाया है। उनके भाई अरशद अली इस सीट पर पिछली बार बसपा से लड़कर खासे वोट हासिल कर चुके हैं। बिट्टन मुस्लिम वोटरों के साथ ही पार्टी कैडर के वोटों के सहारे जीत का आंकड़ा बना रहे हैं। कांग्रेस ने राजवीर सिंह यादव को टिकट देकर यादव वोटरों में सेंध के सहारे चुनावी गणित साधा है। इनके अलावा आम आदमी पार्टी के अनिल कुमार, जनसेवा सहायक पार्टी के नवाब यहां चुनावी मैदान में हैं। निर्दलीय के रूप में रवेंद्र शर्मा, राकेश कुमार शर्मा, प्रवेश कुमार चुनाव लड़ रहे हैं।
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सहसवान के सियासी रण में कभी नहीं खिला कमल, मुलायम रिकार्ड वोटों से जीते
सहसवान विधानसभा सीट पर भाजपा इस बार कांटे की टक्कर दे रही है पर यह भी सच है कि आज तक यहां भाजपा कभी चुनाव नहीं जीत सकी है। यहां के वोटरों की जाति बिरादरी का गणित ही कुछ ऐसा है जो कांग्रेस व सपा जैसे दल यहां मैदान मारते रहे हैं। सपा मुखिया रहे मुलायम सिंह यादव वर्ष 1996 में चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि प्रदेश में सरकार न बनने पर उन्होंने सहसवान सीट से इस्तीफा देकर केंद्र की राजनीति में कदम रखा और रक्षा मंत्री बने।
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डीपी यादव का भी यहां दखल रहा है। वर्ष 2007 में डीपी यादव अपनी पार्टी राष्ट्रीय परिवर्तन दल से जीतकर सहसवान के विधायक बने। हालांकि जीतने के बाद वह सत्तारुढ़ दल बसपा में शामिल हो गए। इस बार भी डीपी यादव भाजपा के संपर्क में थे पर उन्हें टिकट नहीं मिल सका तो उन्होंने बेटे को सियासी रण में उतार दिया। 14 वीं विधानसभा यानि 2002 के चुनाव में सपा के ओमकार सिंह यादव ने जनता दल यू की शमा अली को हराया था। बसपा के अशोक यादव तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं 16 वीं विधानसभा के चुनावों में सपा के ओमकार सिंह ने बसपा के मीर हादी अली उर्फ बाबर मियां को हराया था। बाबर फिलहाल सहसवान नगर पालिका के चेयरमैन हैं और बिल्सी से चुनाव लड़ रहे हैं।
कोठी खानदान ने लंबे समय सहसवान पर राज किया। खानदान के मीर मजहर अली उर्फ नन्हे मियां 1980 में कांग्रेस से पहली बार विधायक बने। फिर 1989 में उन्होंने निर्दलीय और 1993 में सपा से चुनाव जीते। ओमकार सिंह यादव पांच बार सहसवान से विधायक रह चुके हैं और अखिलेश सरकार में पंचायती राज विभाग के राज्यमंत्री रहे थे।
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सहसवान
कुल मतदाता- 425856
पुरुष मतदाता- 227675
महिला मतदाता-198159
थर्ड जेंडर- 22
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जातिगत मतदाता
मुस्लिम- 1.10 लाख
यादव- 1 लाख 5 हजार
मौर्य-शाक्य- 28000
ब्राह्मण- 34000
वैश्य- 16000
कश्यप- 24000
पासी- 7000
दलित- 48000
जाट- 15000
ठाकुर- 25000
साहू-5000
अन्य- 17800
(आंकढ़े अनुमानित हैं)
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सीट से संबंधित बड़े मुद्दे
- बिजली कटौती, लो वोल्टेज की समस्या
- सहसवान नगर में पेयजल आपूर्ति
- अच्छे अस्पताल व स्कूल का अभाव
- आईटीआई व जीटीआई कॉलेज निर्माण के बाद भी कक्षा संचालन न होना
- रोजगार के साधनों की कमी
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मशहूर संगीत घराने से जुड़ता है सहसवान का नाम, ऐतिहासिक सरसोता और किला भी यहां
सहसवान ऐतिहासिक महत्व का नगर है। यहां महाराज सहस्रबाहु के किले के अवशेष विशालकाय टीले के रूप में मौजूद हैं जिन्हें प्रशासन ने संरक्षित कर पर्यटन स्थल जैसा बना दिया है। यहां किले के नीचे सैकड़ों बीघा में ढंठ झील थी जिसमें कमल खिला करते थे। इसी से सटा सरसोता सरोवर भी है। किवदंती है कि महाराज सहस्रबाहु महर्षि जमदग्नि के आश्रम से कामधेनु गाय ले आए थे। किवदंती है कि जमदग्नि ने अपने पुत्र महर्षि परशुराम से कहा तो उन्होंने यहां सहस्रबाहु का वध करके उनके किले को फरसे से सात बार पलट दिया। प्यास लगने पर फरसा जमीन में मारा जिससे सप्त सरोवर सरसोता की उत्पत्ति हुई। पिछली सरकारों में इस सरोवर का भी जीर्णोद्धार कराया था। सरसोता सरोवर के सटे झील के इलाके में केवड़े की खेती होती थी। करीब पंद्रह साल पहले तक केवड़े के कुछ पेड़ यहां थे जो नष्ट हो गए। एक जमाने में केवड़े व फूलों से इत्र बनाने का काम सहसवान में बड़े पैमाने पर होता था। यहां मुश्कबार नाम से इत्र बनाने की फैक्टरी थी। सहसवान से इत्र बनाकर विदेश तक भेजा जाता था। वक्त के साथ इत्र का काम पूरी तरह बंद हो गया।
अगर संगीत की बात करें तो हाल ही में कोलकता निवासी उस्ताद राशिद खां को पद्म भूषण मिला है। वह सहसवान रामपुर संगीत घराने से ही हैं। इस घराने के नौ संगीतकारों को अब तक पद्म पुरस्कार मिल चुके हैं। सहसवान के संगीतकारों ने लंबे समय रामपुर नवाब के दरबार में गायकी की तो घराने का नाम सहसवान रामपुर घराना पड़ा।

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युवाओं को नौकरी की फिक्र, महिलाओं को महंगाई डायन लग रही
सहसवान विधानसभा क्षेत्र में नगर व देहात की मिलीजुली आबादी है। यहां के युवाओं को नौकरी की फिक्र है पर वोट देने के मामले में वे भ्रमित नजर आते हैं। जातीय व धर्म के समीकरण भी मतदान के मामले में खुलकर सामने आ रहे हैं। हालांकि उम्रदराज वोटर अभी खुलकर नहीं बोल रहे। बजरिया निवासी सूरजपाल से बात की तो उन्होंने कहा कि आदमी के पास काम की कमी है। कोरोना ने ज्यादा परेशान किया है। जो भी सरकार बने वह लोगों को रोजगार से जोड़ने का काम करे। नयागंज के मोहित मालपाणी का कहना था कि व्यापारियों को सहूलियतें बढ़ाई जानी चाहिए। कोरोना में वह लोग ज्यादा बरबाद हुए हैं। छात्र रंजीत यादव ने कहा कि जो भी नौकरी निकलती है वो निरस्त हो जाती है। युवाओं का भविष्य खराब हो रहा है। रफतपुर मौरूशुमाली निवासी मोहर सिंह यादव ने सपा सरकार में हुए विकास के कामों को याद दिलाया। कहा कि दूसरी सरकारों ने नया काम कोई नहीं किया। नाधा के जगतपाल का कहना था कि भाजपा सरकार में उन्हें ज्यादा सुकून लगा। कुछ भी सही पर गुंडागर्दी जैसा कुछ नहीं बचा है। दोबारा सरकार आई तो गुंडों की रही सही उम्मीद टूट जाएगी। महिलाओं ने बढ़ती महंगाई पर गुस्सा दिखाया। जावित्री ने कहा कि कोई ऐसी सरकार आए जो महंगाई पर लगाम लगा दे। संवाद
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