{"_id":"622cf3e5cb83fa07db205973","slug":"badaun-145-vidhan-sabha-2022-bisauli-142-vidhan-sabha-2022-sahaswan-143-vidhan-sabha-2022-bilsi-144-vidhan-sabha-2022-shekhupur-146-vidhan-sabha-2022-dataganj-147-vidhan-sabha-2022-badaun-news-bly4781280175","type":"story","status":"publish","title_hn":"भाजपा हमसे समझौता करती तो फायदे में रहती : डीपी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भाजपा हमसे समझौता करती तो फायदे में रहती : डीपी
विज्ञापन
डीपी यादव। संवाद
- फोटो : BADAUN
बदायूं। राष्ट्रीय परिवर्तन दल के मुखिया डीपी यादव ने कहा कि भाजपा ने ऐन वक्त पर उनसे समझौता न करके अपना ही नुकसान किया। समझौता कर लेती तो चार सीटों पर फायदे में रहती।
मोबाइल पर हुई बातचीत में राष्ट्रीय परिवर्तन दल के मुखिया डीपी यादव ने कहा कि लखनऊ में भाजपा से उनकी चार सीटों सहसवान, संभल के गुन्नौर व मुरादाबाद के बिलारी और असमोली सीट को लेकर बात चल रही थी। बाद में भाजपा उनकी सीटों को कम करती गई। आखिर में भाजपा की ओर से कहा गया कि आप सहसवान सीट ले लें और अपनी पार्टी रापद का विलय भाजपा में कर दें।
डीपी का कहना था कि वह इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कई साल मेहनत करके इस पार्टी को खड़ा किया है। केवल एक सीट पर विधायक बनने की खातिर पार्टी खत्म करने को उनके जमीर ने गवाही नहीं थी और वार्ता टूट गई।
विज्ञापन
इसके बाद उन्होंने सहसवान, बिल्सी और दातागंज में अपने दल से प्रत्याशी उतारे। जो चुनाव हार गए। उन्हें हार का गम है और भविष्य में खामियों को सुधारने में लगेंगे पर उन्हें छोड़कर भाजपा भी फायदे में नहीं रही। उन्होंने चुनाव से पहले ही सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी थी कि भाजपा उन चारों सीटों पर चुनाव हार जाएगी। ठीक वैसा ही हुआ, भाजपा ने भी यह चारों सीटें गवां दीं। उनके प्रत्याशी लड़े होते तो चारों सीटें भाजपा की झोली में जानी तय थीं। संवाद
विज्ञापन
मोबाइल पर हुई बातचीत में राष्ट्रीय परिवर्तन दल के मुखिया डीपी यादव ने कहा कि लखनऊ में भाजपा से उनकी चार सीटों सहसवान, संभल के गुन्नौर व मुरादाबाद के बिलारी और असमोली सीट को लेकर बात चल रही थी। बाद में भाजपा उनकी सीटों को कम करती गई। आखिर में भाजपा की ओर से कहा गया कि आप सहसवान सीट ले लें और अपनी पार्टी रापद का विलय भाजपा में कर दें।
विज्ञापन
डीपी का कहना था कि वह इसके लिए तैयार नहीं हुए। उन्होंने कई साल मेहनत करके इस पार्टी को खड़ा किया है। केवल एक सीट पर विधायक बनने की खातिर पार्टी खत्म करने को उनके जमीर ने गवाही नहीं थी और वार्ता टूट गई।
विज्ञापन
इसके बाद उन्होंने सहसवान, बिल्सी और दातागंज में अपने दल से प्रत्याशी उतारे। जो चुनाव हार गए। उन्हें हार का गम है और भविष्य में खामियों को सुधारने में लगेंगे पर उन्हें छोड़कर भाजपा भी फायदे में नहीं रही। उन्होंने चुनाव से पहले ही सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी थी कि भाजपा उन चारों सीटों पर चुनाव हार जाएगी। ठीक वैसा ही हुआ, भाजपा ने भी यह चारों सीटें गवां दीं। उनके प्रत्याशी लड़े होते तो चारों सीटें भाजपा की झोली में जानी तय थीं। संवाद