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बालिका को छुट्टा पशुओं ने कुचला, मौत
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गौरी फाइल फोटो
- फोटो : BADAUN
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बिसौली (बदायूं)। कोतवाली क्षेत्र के हतसा गांव में बृहस्पतिवार शाम एक चार वर्षीय बालिका को छुट्टा पशुओं ने कुचल दिया। बालिका एक गली से होकर निकल रही थी तभी छुट्टा पशु उसे कुचलते हुए निकल गए, बाद में उसकी मौत हो गई। परिवारवालों ने पुलिस को बिना सूचना दिए बालिका के शव को दफन कर दिया, इस कारण उसका पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
गांव हतसा निवासी मनोज की पत्नी मोहिनी चार वर्षीय बेटी गौरी के साथ पतली गली से होकर घर लौट रहीं थीं। वह गली में घुसी हीं थीं कि तभी कई छुट्टा पशु भी पीछे से गली में घुस गए। बालिका पीछे चल रही थी। मोहिनी ने उसे पशुओं से बचाने की कोशिश की लेकिन तब तक पशुओं ने उसे अपने पैरों तले कुचल दिया, इस दौरान मोहिनी ने किसी तरह जान बचाई।
मोहिनी की चीख-पुकार सुनकर गांव के तमाम लोग आ गए। उन्होंने लाठी-डंडे लेकर पशुओं को भगाया। परिवार वाले बालिका को कस्बे के एक अस्पताल ले गए जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। बाद में अस्पताल ले जाते उसने रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। गौरी मनोज की दो बेटियों में छोटी थी।
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कई लोगों की जान ले चुके हैं छुट्टा पशु
जिले में छुट्टा पशु लोगों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो दातागंज, कादरचौक, बिल्सी, सहसवान और जरीफनगर के अलावा कई क्षेत्रों में लोगों पर हमला कर उनको मौत के घाट उतार चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन सिर्फ आश्वासनों से काम चला रहा है, पशुशालाएं होने के बावजूद छुट्टा पशुओं को उनमें रखने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
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गांव हतसा निवासी मनोज की पत्नी मोहिनी चार वर्षीय बेटी गौरी के साथ पतली गली से होकर घर लौट रहीं थीं। वह गली में घुसी हीं थीं कि तभी कई छुट्टा पशु भी पीछे से गली में घुस गए। बालिका पीछे चल रही थी। मोहिनी ने उसे पशुओं से बचाने की कोशिश की लेकिन तब तक पशुओं ने उसे अपने पैरों तले कुचल दिया, इस दौरान मोहिनी ने किसी तरह जान बचाई।
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मोहिनी की चीख-पुकार सुनकर गांव के तमाम लोग आ गए। उन्होंने लाठी-डंडे लेकर पशुओं को भगाया। परिवार वाले बालिका को कस्बे के एक अस्पताल ले गए जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। बाद में अस्पताल ले जाते उसने रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। गौरी मनोज की दो बेटियों में छोटी थी।
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कई लोगों की जान ले चुके हैं छुट्टा पशु
जिले में छुट्टा पशु लोगों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं तो दातागंज, कादरचौक, बिल्सी, सहसवान और जरीफनगर के अलावा कई क्षेत्रों में लोगों पर हमला कर उनको मौत के घाट उतार चुके हैं। बावजूद इसके प्रशासन सिर्फ आश्वासनों से काम चला रहा है, पशुशालाएं होने के बावजूद छुट्टा पशुओं को उनमें रखने के लिए कोई अभियान नहीं चलाया जा रहा है।