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कैसी कार्रवाई...नामजद तक नहीं किए गए घोटालेबाज
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बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले की जांच कर रही एसआईटी की रफ्तार कछुआ चाल से भी कम लग रही है। इसकी रिपोर्ट दर्ज हुए कम से कम 20-25 दिन गुजर चुके हैं। एसआईटी पीसीएफ कार्यालय से खाद आने के संबंध में अभिलेख भी कब्जे में ले चुकी है, फिर भी अब तक घोटालेबाजों के नाम नहीं खोले गए हैं। अब तक यह भी पता नहीं चला है कि तीन के अलावा इस घोटाले में कौन-कौन शामिल है।
करीब 20-25 दिन पूर्व सिविल लाइंस थाने में पीसीएफ के जिला प्रबंधक अशोक कुमार शर्मा ने तीन करोड़ की खाद गबन के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें मुख्य आरोपी गोदाम प्रभारी जगतपाल है, जबकि परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी मुख्य आरोपी के सहयोगी हैं। इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है। घोटाले के संबंध में अभिलेख कब्जे में लेते समय एसआईटी ने खुलासा कर दिया था कि आंवला (बरेली) से खाद आने का रिकॉर्ड मिला है लेकिन गोदाम से खाद कहां, कैसे और कब गायब हो गई, इस संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जिन गोदामों से खाद गायब हुई थी, उनका चार्ज जगतपाल पर था और खाद ढोने का काम परिवहन ठेकेदार ने किया था। तत्कालीन अधिकारी को खाद गबन के बारे में अच्छी तरह पता था, जिससे तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी परंतु पुलिस की जांच में सिर्फ इनके पदनाम खोले गए हैं। परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी के नाम नहीं खोले गए हैं। इससे यह भी पता नहीं चला है कि आखिर परिवहन ठेकेदार कौन है और कौन से तत्कालीन अधिकारी की मदद से इतना बड़ा घोटाला हुआ। इससे एसआईटी की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस अधिकारियों का मकसद था कि इसकी गंभीरता से जांच हो और घोटालेबाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, परंतु नाम स्पष्ट नहीं करने से एसआईटी खुद सवालों के घेरे में आ गई है।
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करीब 20-25 दिन पूर्व सिविल लाइंस थाने में पीसीएफ के जिला प्रबंधक अशोक कुमार शर्मा ने तीन करोड़ की खाद गबन के संबंध में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें मुख्य आरोपी गोदाम प्रभारी जगतपाल है, जबकि परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी मुख्य आरोपी के सहयोगी हैं। इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है। घोटाले के संबंध में अभिलेख कब्जे में लेते समय एसआईटी ने खुलासा कर दिया था कि आंवला (बरेली) से खाद आने का रिकॉर्ड मिला है लेकिन गोदाम से खाद कहां, कैसे और कब गायब हो गई, इस संबंध में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। जिन गोदामों से खाद गायब हुई थी, उनका चार्ज जगतपाल पर था और खाद ढोने का काम परिवहन ठेकेदार ने किया था। तत्कालीन अधिकारी को खाद गबन के बारे में अच्छी तरह पता था, जिससे तीनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी परंतु पुलिस की जांच में सिर्फ इनके पदनाम खोले गए हैं। परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी के नाम नहीं खोले गए हैं। इससे यह भी पता नहीं चला है कि आखिर परिवहन ठेकेदार कौन है और कौन से तत्कालीन अधिकारी की मदद से इतना बड़ा घोटाला हुआ। इससे एसआईटी की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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पुलिस अधिकारियों का मकसद था कि इसकी गंभीरता से जांच हो और घोटालेबाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, परंतु नाम स्पष्ट नहीं करने से एसआईटी खुद सवालों के घेरे में आ गई है।
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