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एसआईटी ने जांच के लिए पीसीएफ से मांगे दस्तावेज
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एसआईटी ने जांच के लिए पीसीएफ से मांगे दस्तावेज
बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने पीसीएफ से रिकॉर्ड मांगा है। तीन दिन पहले इसके बारे में कहा गया था लेकिन उस समय पीसीएफ के पास रिकॉर्ड तैयार नहीं था। अब पीसीएफ ने रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। बुधवार को घोटाले से संबंधित सारे दस्तावेज जांच टीम को सौंपे जा सकते हैं।
घोटाले में नामजद गोदाम प्रभारी जगतपाल, परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी का अब तक कुछ पता नहीं चला है। तीनों आरोपी पुलिस से छिपते-छिपते घूम रहे हैं। जगतपाल ने तो अपना मोबाइल ही बंद कर लिया है। विभागीय स्तर पर हुई जांच में उसी समय जगतपाल का नाम खोल दिया गया था लेकिन परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारियों के पदनाम से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हालांकि विभागीय अधिकारी उनके नाम और पता अच्छी तरह जानते हैं। विभाग ने घोटाले के संबंध में पूरी कार्रवाई एसआईटी पर छोड़ दी है। इधर, विशेष जांच टीम ने अपनी पड़ताल शुरू करने से पहले पीसीएफ से घोटाले से संबंधित सारा रिकार्ड मांगा था, परंतु पीसीएफ पुलिस टीम को कोई कागजात उपलब्ध नहीं करा सकी। पीसीएफ ने कुछ दिन का समय मांगा था। मंगलवार को पीसीएफ ने अपने अभिलेख पूरे कर लिए।
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लेबर ठेकेदार पर थी गोदामों की चाबी
सूत्रों की माने तो जिन चाबियों को बदलकर भगवतीपुर पीसीएफ गोदाम से 968 कट्टे एनपीके खाद चोरी हुई थीं, वो चाबियां उस दिन लेबर ठेकेदार के पास थीं। गोदाम प्रभारी ने ताले खुलवाकर 968 कट्टे एनपीके एक वाहन में लोड कराए थे।
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भुगतान कराने की जुगत भिड़ा रहा परिवहन ठेकेदार
तीन करोड़ के घोटाले की पोल खुलने के बाद भुगतान पर रोक लगने से परिवहन ठेकेदार तिलमिला गया है। बताया जाता है कि मंगलवार को वह पीसीएफ कार्यालय पहुंचा था। उसने पीसीएफ जिला प्रबंधक से भुगतान कराने को भी कहा था। उसके बाद ज्यादा देर न लगाते हुए कार्यालय से चला गया।
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बदायूं। तीन करोड़ के खाद घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने पीसीएफ से रिकॉर्ड मांगा है। तीन दिन पहले इसके बारे में कहा गया था लेकिन उस समय पीसीएफ के पास रिकॉर्ड तैयार नहीं था। अब पीसीएफ ने रिकॉर्ड तैयार कर लिया है। बुधवार को घोटाले से संबंधित सारे दस्तावेज जांच टीम को सौंपे जा सकते हैं।
घोटाले में नामजद गोदाम प्रभारी जगतपाल, परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारी का अब तक कुछ पता नहीं चला है। तीनों आरोपी पुलिस से छिपते-छिपते घूम रहे हैं। जगतपाल ने तो अपना मोबाइल ही बंद कर लिया है। विभागीय स्तर पर हुई जांच में उसी समय जगतपाल का नाम खोल दिया गया था लेकिन परिवहन ठेकेदार और तत्कालीन अधिकारियों के पदनाम से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। हालांकि विभागीय अधिकारी उनके नाम और पता अच्छी तरह जानते हैं। विभाग ने घोटाले के संबंध में पूरी कार्रवाई एसआईटी पर छोड़ दी है। इधर, विशेष जांच टीम ने अपनी पड़ताल शुरू करने से पहले पीसीएफ से घोटाले से संबंधित सारा रिकार्ड मांगा था, परंतु पीसीएफ पुलिस टीम को कोई कागजात उपलब्ध नहीं करा सकी। पीसीएफ ने कुछ दिन का समय मांगा था। मंगलवार को पीसीएफ ने अपने अभिलेख पूरे कर लिए।
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लेबर ठेकेदार पर थी गोदामों की चाबी
सूत्रों की माने तो जिन चाबियों को बदलकर भगवतीपुर पीसीएफ गोदाम से 968 कट्टे एनपीके खाद चोरी हुई थीं, वो चाबियां उस दिन लेबर ठेकेदार के पास थीं। गोदाम प्रभारी ने ताले खुलवाकर 968 कट्टे एनपीके एक वाहन में लोड कराए थे।
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भुगतान कराने की जुगत भिड़ा रहा परिवहन ठेकेदार
तीन करोड़ के घोटाले की पोल खुलने के बाद भुगतान पर रोक लगने से परिवहन ठेकेदार तिलमिला गया है। बताया जाता है कि मंगलवार को वह पीसीएफ कार्यालय पहुंचा था। उसने पीसीएफ जिला प्रबंधक से भुगतान कराने को भी कहा था। उसके बाद ज्यादा देर न लगाते हुए कार्यालय से चला गया।