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गुप्ता फैमिली पर तीसरे दशक में भी कायम रखा वोटरों का विश्वास
Updated Sat, 02 Dec 2017 11:21 PM IST
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निकाय चुनाव
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उझानी पालिका बोर्ड में लगातार पांचवी बार दी दस्तक
लगातार दूसरी बार सदन में पहुंचे हैं रामप्रवेश समेत चार सदस्य
उझानी (बदायूं)।
पालिका बोर्ड में इस बार कई ऐसे सदस्य देखने को मिलेंगे जो पहली बार जीत कर आए हैं तो चार सदस्य फिर से सदन में पहुंचने में सफल रहे हैं। इस सबके बीच एक फैमिली ऐसी भी है जिस पर मतदाताओं का लगातार विश्वास है। इसी के चलते सत्येंद्र गुप्ता फैमिली पांचवी बार जीतने में सफल रही है।
पालिका की राजनीति में असरदार साबित हो रही सत्येंद्र गुप्ता फैमिली पर गौर करें तो वर्ष-1995 में सत्येंद्र की मां ईश्वरदेवी बोर्ड का हिस्सा बनीं। चूंकि अगली बार वर्ष- 2002 के निकाय चुनाव में सीट फिर महिला रही तो उन्होंने पत्नी अनीता को जिता कर बोर्ड में पकड़ कायम रखी। वर्ष- 2007 के चुनाव में सीट सामान्य हुई तो खुद सत्येंद्र गुप्ता जीत गए। उन्होंने अगला चुनाव भी जीतता। इस बार के चुनाव में सीट महिला के खाते में गई तो उनकी पत्नी अनीता गुप्ता को ही विजय मिली। इधर, रामप्रवेश यादव, अरुण अग्रवाल, नफीस अहमद और ओमप्रकाश अदलक्खा एक बार फिर जीतने में सफल रहे हैं।। नये चेहरों में हरीओम, राखी देवी, शाहिस्ता बी, अजय यादव, सचिन अग्रवाल उर्फ बंटी, धर्मवीर यादव, सुनीता देवी, विक्रम राठौर, आदित्य कुमार उर्फ आकाश शर्मा, कृष्ण भगवान, शफीक और शहाना हैं। इसी क्रम में रामादेवी और शौकत सैफी एक बार फिर बोर्ड में पहुंचने में सफल रहे हैं।
पति नहीं तो पत्नियां....
उझानी। पालिका की राजनीति में अब्दुल हसन नेता का नाम अहम रहा है। पिछली बार उनकी पत्नी मीरजहां चुनी गई थी लेकिन अब वह खुद जीत गए हैं। इसी तरह नईम बेगम के स्थान पर उनके पति छोटे कुरैशी, मुन्ने अली के स्थान पर उनकी बेगम मुख्तरी, मुख्तार के स्थान पर उनकी पत्नी शब्बीरन, चंदगीराम के स्थान पर उनकी पत्नी मिथलेश तो सत्येंद्र के स्थान पर अनीता गुप्ता जीतकर बोर्ड का हिस्सा बनी हैं।
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लगातार दूसरी बार सदन में पहुंचे हैं रामप्रवेश समेत चार सदस्य
उझानी (बदायूं)।
पालिका बोर्ड में इस बार कई ऐसे सदस्य देखने को मिलेंगे जो पहली बार जीत कर आए हैं तो चार सदस्य फिर से सदन में पहुंचने में सफल रहे हैं। इस सबके बीच एक फैमिली ऐसी भी है जिस पर मतदाताओं का लगातार विश्वास है। इसी के चलते सत्येंद्र गुप्ता फैमिली पांचवी बार जीतने में सफल रही है।
पालिका की राजनीति में असरदार साबित हो रही सत्येंद्र गुप्ता फैमिली पर गौर करें तो वर्ष-1995 में सत्येंद्र की मां ईश्वरदेवी बोर्ड का हिस्सा बनीं। चूंकि अगली बार वर्ष- 2002 के निकाय चुनाव में सीट फिर महिला रही तो उन्होंने पत्नी अनीता को जिता कर बोर्ड में पकड़ कायम रखी। वर्ष- 2007 के चुनाव में सीट सामान्य हुई तो खुद सत्येंद्र गुप्ता जीत गए। उन्होंने अगला चुनाव भी जीतता। इस बार के चुनाव में सीट महिला के खाते में गई तो उनकी पत्नी अनीता गुप्ता को ही विजय मिली। इधर, रामप्रवेश यादव, अरुण अग्रवाल, नफीस अहमद और ओमप्रकाश अदलक्खा एक बार फिर जीतने में सफल रहे हैं।। नये चेहरों में हरीओम, राखी देवी, शाहिस्ता बी, अजय यादव, सचिन अग्रवाल उर्फ बंटी, धर्मवीर यादव, सुनीता देवी, विक्रम राठौर, आदित्य कुमार उर्फ आकाश शर्मा, कृष्ण भगवान, शफीक और शहाना हैं। इसी क्रम में रामादेवी और शौकत सैफी एक बार फिर बोर्ड में पहुंचने में सफल रहे हैं।
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पति नहीं तो पत्नियां....
उझानी। पालिका की राजनीति में अब्दुल हसन नेता का नाम अहम रहा है। पिछली बार उनकी पत्नी मीरजहां चुनी गई थी लेकिन अब वह खुद जीत गए हैं। इसी तरह नईम बेगम के स्थान पर उनके पति छोटे कुरैशी, मुन्ने अली के स्थान पर उनकी बेगम मुख्तरी, मुख्तार के स्थान पर उनकी पत्नी शब्बीरन, चंदगीराम के स्थान पर उनकी पत्नी मिथलेश तो सत्येंद्र के स्थान पर अनीता गुप्ता जीतकर बोर्ड का हिस्सा बनी हैं।
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