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जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारो
Updated Sat, 30 Dec 2017 12:34 AM IST
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- फोटो : amar ujala
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बदायूं।...जिसका कोई नहीं उसका तो खुदा है यारों...कौन कहता है किताबों में लिखा है यारों...‘लावारिस’ फिल्म के गीत की ये पंक्तियां काफी हद तक इस लावारिस बालक पर सटीक बैठती हैं। इस नवजात को उसकी बेरहम मां घूरे के ढेर पर फेंक गई थी। उसे पता नहीं था कि इस नवजात पर ऊपर वाले की नजर है। सो उसके रोने की आवाज सुनकर लोगों ने उठाकर सहसवान सरकारी अस्पताल पहुंचा दिया। वहां से जिला महिला अस्पताल लाया गया। यहां उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ तो सीएमओ ने नवजात को लखनऊ किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएम) भेज दिया। वहां हालत ठीक होने पर नवजात को गोद लेने वालों का तांता लगा है, लेकिन जटिल कानूनी प्रक्रिया होने के कारण नवजात किसी को नहीं मिल पा रहा है।
18 दिसंबर को सहसवान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास सड़क किनारे कोई नवजात को घूरे पर फेंक गया था। रास्ते में गुजर रहे लोगों ने जब इस नवजात के रोने की आवाज को सुना तो उन्होंने अस्पताल कर्मियों को सूचना दे दी। नवजात को 18-19 की रात में यहां जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। नवजात सामान्य बच्चे की तरह ही सांसें ले रहा था। उस रात अस्पताल में कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं था। जब इसकी जानकारी सीएमओ डॉ.नेमी चंद्रा को मिली तो वह खुद ही जिला महिला अस्पताल पहुंच गए और उन्होंने नवजात को देखा। उनके निर्देश पर ही नवजात को नवजात शिशु सघन कक्ष (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। जहां करीब एक सप्ताह सीएमओ खुद नवजात का इलाज करते रहे। उन्होंने इसकी जानकारी बाल स्वास्थ्य समिति को दे दी थी। नवजात को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के उद्देश्य से सीएमओ ने 26 दिसंबर को एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबूलेंस (एएलएस) में उसे किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ भिजवा दिया। उसे महिला अस्पताल की सीएमएम डॉ.रेखा रानी खुद लेकर लखनऊ गईं थीं।
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दीक्षा माहेश्वरी की थी इच्छा नवजात को लेने की
बदायूं। सीएमओ डॉ.नेमी चंद्रा ने बताया कि दीक्षा माहेश्वरी नाम की महिला ने इस नवजात की शुरू से देखरेखा की। नवजात अभी अस्पताल में भर्ती है। अस्पताल में दीक्षा नवजात की देखरेख करती रहीं। लखनऊ भी गईं। उनकी इच्छा इस नवजात को लेने की है। मगर कानून की जटिल प्रक्रिया की वजह से शायद उन्हें यह नवजात नहीं मिल पा रहा है।
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तत्कालीन डीएम ने गठित की थी कमेटी
दीक्षा ने इस नवजात को लेने के लिए तत्कालीन डीएम अनीता श्रीवास्तव से गुजारिश की थी। उन्होंने इसके लिए एक कमेटी गठित की थी। इसमें डीएम के अलावा एसएसपी, सीएमओ, दो समाजसेवी व एक शासकीय अधिवक्ता हैं। चूंकि नवजात लखनऊ में भर्ती है इसलिए कमेटी कुछ नहीं कर सकी।
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डीएम ने तलब की फाइल
अब इस मामले में मौजूदा डीएम दिनेश कुमार सिंह ने सीएमओ से फाइल तलब की है। सीएमओ ने पूरे मामले से डीएम को अवगत करा दिया है।
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चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री भी ले चुकी हैं संज्ञान
बदायूं। लावारिस मिले नवजात के बारे में सूबे की चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने भी सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा से बात की थी। सीएमओ ने उन्हें भी पूरे मामले से अवगत करा दिया था। सीएमओ ने बताया कि किसी ने मंत्री से बच्चा अपना होने की बात कही थी।
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आए दिन बच्चे के हकदारों के आते हैं पत्र
सीएमओ ने बताया कि इस नवजात को अपना बताने वालों के पत्र आ रहे हैं। उन्हीं में किसी ने डीएम से भी गुहार लगाई थी। तभी डीएम ने फाइल तलब की थी।
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18 दिसंबर को सहसवान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास सड़क किनारे कोई नवजात को घूरे पर फेंक गया था। रास्ते में गुजर रहे लोगों ने जब इस नवजात के रोने की आवाज को सुना तो उन्होंने अस्पताल कर्मियों को सूचना दे दी। नवजात को 18-19 की रात में यहां जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। नवजात सामान्य बच्चे की तरह ही सांसें ले रहा था। उस रात अस्पताल में कोई बाल रोग विशेषज्ञ नहीं था। जब इसकी जानकारी सीएमओ डॉ.नेमी चंद्रा को मिली तो वह खुद ही जिला महिला अस्पताल पहुंच गए और उन्होंने नवजात को देखा। उनके निर्देश पर ही नवजात को नवजात शिशु सघन कक्ष (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। जहां करीब एक सप्ताह सीएमओ खुद नवजात का इलाज करते रहे। उन्होंने इसकी जानकारी बाल स्वास्थ्य समिति को दे दी थी। नवजात को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के उद्देश्य से सीएमओ ने 26 दिसंबर को एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबूलेंस (एएलएस) में उसे किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ भिजवा दिया। उसे महिला अस्पताल की सीएमएम डॉ.रेखा रानी खुद लेकर लखनऊ गईं थीं।
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दीक्षा माहेश्वरी की थी इच्छा नवजात को लेने की
बदायूं। सीएमओ डॉ.नेमी चंद्रा ने बताया कि दीक्षा माहेश्वरी नाम की महिला ने इस नवजात की शुरू से देखरेखा की। नवजात अभी अस्पताल में भर्ती है। अस्पताल में दीक्षा नवजात की देखरेख करती रहीं। लखनऊ भी गईं। उनकी इच्छा इस नवजात को लेने की है। मगर कानून की जटिल प्रक्रिया की वजह से शायद उन्हें यह नवजात नहीं मिल पा रहा है।
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तत्कालीन डीएम ने गठित की थी कमेटी
दीक्षा ने इस नवजात को लेने के लिए तत्कालीन डीएम अनीता श्रीवास्तव से गुजारिश की थी। उन्होंने इसके लिए एक कमेटी गठित की थी। इसमें डीएम के अलावा एसएसपी, सीएमओ, दो समाजसेवी व एक शासकीय अधिवक्ता हैं। चूंकि नवजात लखनऊ में भर्ती है इसलिए कमेटी कुछ नहीं कर सकी।
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डीएम ने तलब की फाइल
अब इस मामले में मौजूदा डीएम दिनेश कुमार सिंह ने सीएमओ से फाइल तलब की है। सीएमओ ने पूरे मामले से डीएम को अवगत करा दिया है।
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चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री भी ले चुकी हैं संज्ञान
बदायूं। लावारिस मिले नवजात के बारे में सूबे की चिकित्सा स्वास्थ्य मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने भी सीएमओ डॉ. नेमी चंद्रा से बात की थी। सीएमओ ने उन्हें भी पूरे मामले से अवगत करा दिया था। सीएमओ ने बताया कि किसी ने मंत्री से बच्चा अपना होने की बात कही थी।
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आए दिन बच्चे के हकदारों के आते हैं पत्र
सीएमओ ने बताया कि इस नवजात को अपना बताने वालों के पत्र आ रहे हैं। उन्हीं में किसी ने डीएम से भी गुहार लगाई थी। तभी डीएम ने फाइल तलब की थी।