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मंत्री जी हमें नरक से मुक्ति दिलाइए

Tue, 24 Oct 2017 11:24 PM IST
Updated Tue, 24 Oct 2017 11:24 PM IST
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मंत्री जी हमें नरक से मुक्ति दिलाइए
फैली गंदगी - फोटो : अमर उजाला
बदायूं। पूरे प्रदेश में नगर विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे सूबे के काबीना मंत्री सुरेश खन्ना बुधवार को शहर में आ रहे हैं। जाहिर है कि मंत्री जी को शहर में नहीं घुमाया जाएगा। वजह साफ है कि कहीं मंत्री जी शहर की दुर्दशा को अपनी नजरों से नहीं देख लें। सबसे बड़ी समस्या शहर में है तो वह गंदगी की है। ऐसा कोई स्थान या फिर मोहल्ला नहीं है जहां पर गंदगी के ढेर न लगे हैं। दुर्भाग्य की बात तो यह है कि पूरे देश में स्वच्छ भारत मिशन अभियान चल रहा है। देश के प्रधानमंत्री और सूबे के मुख्यमंत्री का अधिकारियों को एक ही संदेश है कि देश को नीट एंड क्लीन बनाया जाए। मगर उनके मिशन को बदायूं नगर पालिका परिषद पूरी तरह से फेल करने में लगी है। गंदगी ही इस शहर की पहचान बन गई है। शहर का कोई चौराहा या सड़क नहीं बचीं है, जहां पर गंदगी को नहीं देखा जा सके। काबिले गौर है कि गंदगी की समस्या को लेकर शिकायत की जाती है, लेकिन पालिका प्रशासन कोई तवज्जो नहीं देता है।
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गौरतलब पहलू यह भी है कि जिले के नोडल अधिकारी प्रदेश के आवास आयुक्त धीरज साहू कई बार जिले का भ्रमण कर चुके हैं। गांवों को ओडीएफ और गंदगी को लेकर अधिकारियों को निर्देश करते रहेे हैं, मगर शहर में फैली गंदगी पर उन्होंने कोई ध्यान नहीं दिया। मौजूदा वक्त में नगर पालिका के रिकार्ड के मुताबिक कुल 326 सफाई कर्मचारी हैं। हालांकि पालिका प्रशासन बेहतर सफाई व्यवस्था करने का दावा तो करती है,लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। पालिका का रिकार्ड यह भी बताता है कि शहर से प्रतिदिन 10 से 20 टन कूड़ा उठाया जाता है। मगर शहर में लगे कूड़े के ढेरों से यह दावा सिर्फ कागजी लगता है। मंगलवार को शहर के घंटाघर, गौटिया, कबूलपुरा, सुपर मार्केट, मुस्तफागंज, मोहल्ला सोथा, नेकपुर, मधुवन कालोनी, कल्याण नगर, टिकटगंज, शहबाजपुर समेत लगभग समूचे शहर में गली-चौराहों पर जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे देखे गए।
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सफाई कर्मचारी तो लगभग हर दिन आता है और सड़क पर झाडू लगाकर कूड़े को एक जगह एकत्र कर देता है, लेकिन महीनों से कूड़ा उठाने वाली गाड़ी नहीं आ रही है। जो पूरे दिन सड़कों पर फैला रहता है और लोगों को दिक्कत उठानी पड़ती है। पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों पर सफाई के मामले में विश्वास करना बेहद मुश्किल है। जब भी सफाई की शिकायत लेकर पहुंचे, तो कभी मिलते हैं तो कभी नहीं मिलते हैं। जब कभी मिल भी जाएं तो एक ही बात होती है कि सफाई करा दी जाएगी। सफाई को लेकर किसी से कुछ कहना बेकार है। यहां तो कोई काम करने को तैयार नहीं। मजबूरी में प्राइवेट कर्मचारियों को लगना पड़ता है। संदीप शहर की कुछ चुनिंदा जगहों को छोड़ दो। फिर देखो तो पता चलेगा सफाई का आलम। पूरे शहर में कहीं भी सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। बस अधिकारी आराम फरमाते हैं और जनता परेशान रहती है।
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जहां-जहां मुझे शिकायत मिलती है। मैं स्वयं जाकर देखती हूं। साथ ही कर्मचारियों को समस्या दूर करने के कहती हूं। शहर में कहीं सफाई या पालिका से संबंधित कोई भी दिक्कत हो मुझे बताएं। समस्या को दूर कराया जाएगा। वहीं जिन्हें मोहल्लों में दिक्कत है। वहां पर तैनात कर्मचारियों से जवाब तलब कर कार्रवाई की जाएगी।
निशा मिश्रा, ईओ नगर पालिका बदायूं
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