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कबाड़ में तब्दील हो गईं मजदूरों की साइकिलें
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बिजनौर में इंदिरा बाल भवन में कबाड़ में तब्दील हुई मजदूरों की साइकिलें।
- फोटो : BIJNOR
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कबाड़ में तब्दील हो गईं मजदूरों की साइकिलें
बिजनौर/गजरौला शिव। यूक्रेन और रूस के बीच हुई जंग में छात्रों का भी वही हाल हुआ जो महामारी के दौर में मजदूरों का हुआ। जिले के छात्र पराए मुल्क को छोड़ने की जल्दबाजी में अपना सामान जहां-तहां रख आए तो वहीं लॉकडाउन के वक्त मजदूर भी अपनी साइकिल जिले में छोड़ गए थे। हजारों मजदूरों की साइकिल अब कबाड़ में तब्दील हो चुकी है। जिले में अलग-अलग जगह पर खड़ी साइकिल मजदूरों की बेबसी को याद दिला रही है।
कोरोना की पहली लहर में लगे लॉकडाउन के दौरान अपनी जान बचाने के लिए देश भर के हजारों मजदूर वाहनों के अभाव में पैदल ही घरों के लिए निकल पड़े। इसके अलावा हजारों ऐसे मजदूर भी थे जो साइकिल के सहारे ही सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा तय करके अपने घरों की तरफ चलने लगे।
पंजाब और हरियाणा की तरफ से बिहार और प्रदेश के पूर्वी जिलों के रहने वाले मजदूर बिजनौर से होकर गुजरे। इनमें तमाम मजदूर पैदल आए थे जबकि हजारों साइकिल से ही यात्रा कर बिजनौर तक पहुंचे थे। जिला मुख्यालय पर साइकिल पर सवार होकर पहुंचे हजारों मजदूरों को जिला प्रशासन व स्वयंसेवी संगठनों ने न केवल खाने-पीने व ठहरने की व्यवस्था कराई बल्कि उन्हें घर तक पहुंचने के लिए राशन, वाहन व नकद किराया भी दिलाया गया। जिसके चलते हजारों मजदूर अपनी साइकिल जिला मुख्यालय पर छोड़कर अपने घर पहुंचे। हालांकि जाते हुए जिला प्रशासन के सुपुर्द की गई साइकिलें उन्होंने बाद में वापस ले जाने का वादा किया था। किंतु वह मजदूर अपनी साइकिल वापस लेने के लिए नहीं पहुंच पाए। कोरोना महामारी की पहली लहर समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन ने जिला मुख्यालय पर मजदूरों द्वारा छोड़ी गई साइकिल स्टैंड बनाकर जगह-जगह खड़ी करा दी। जिन्हें काम की तलाश में बिजनौर आने वाले रोजमर्रा के मजदूरों को नि:शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। साइकिलें सड़क के किनारे स्टैंड पर खड़ी धूल फांक रही हैं।
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कबाड़ के ढेर में तब्दील हो रही साइकिल
इंदिरा बाल भवन में जगह-जगह मजदूरों द्वारा छोड़ी गई साइकिलों के ढ़ेर लगे हुए हैं, जो जंग खाकर गलनी शुरू हो गई है। अब कबाड़ के ढ़ेर में बदल गए हैं। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन मजदूरों द्वारा छोड़ी गई साइकिल गरीबों को चलाने के लिए मुफ्त में दे देते तो शायद आज ये साइकिलें कूड़े के ढ़ेर में तब्दील न होती। अब देखना है कि जिला प्रशासन द्वारा स्टैंड व इंदिरा बाल भवन में खड़ी कराई गई साइकिलों को नीलामी कराती है या यूं ही छोड़ देती है।
शहर में बने जगह-जगह स्टैंड पर खड़ी हैं मजदूरों की साइकिलें
जिला प्रशासन ने मजदूरों द्वारा छोड़ी गई साइकिलों को ठीक करा कर साइकिल स्टैंड बना कर जगह-जगह खड़ी करा दी हैं। जिन्हें काम की तलाश में देहात क्षेत्र से बिजनौर आने वाले रोजमर्रा के मजदूरों को नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए खड़ी की गई थी। ये साइकिलें रोडवेज, सरकारी अस्पताल, एसपी आफिस आदि के पास बनाये गये स्टैंड पर आज भी खड़ी धूल फांक रही हैं।
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बिजनौर/गजरौला शिव। यूक्रेन और रूस के बीच हुई जंग में छात्रों का भी वही हाल हुआ जो महामारी के दौर में मजदूरों का हुआ। जिले के छात्र पराए मुल्क को छोड़ने की जल्दबाजी में अपना सामान जहां-तहां रख आए तो वहीं लॉकडाउन के वक्त मजदूर भी अपनी साइकिल जिले में छोड़ गए थे। हजारों मजदूरों की साइकिल अब कबाड़ में तब्दील हो चुकी है। जिले में अलग-अलग जगह पर खड़ी साइकिल मजदूरों की बेबसी को याद दिला रही है।
कोरोना की पहली लहर में लगे लॉकडाउन के दौरान अपनी जान बचाने के लिए देश भर के हजारों मजदूर वाहनों के अभाव में पैदल ही घरों के लिए निकल पड़े। इसके अलावा हजारों ऐसे मजदूर भी थे जो साइकिल के सहारे ही सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा तय करके अपने घरों की तरफ चलने लगे।
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पंजाब और हरियाणा की तरफ से बिहार और प्रदेश के पूर्वी जिलों के रहने वाले मजदूर बिजनौर से होकर गुजरे। इनमें तमाम मजदूर पैदल आए थे जबकि हजारों साइकिल से ही यात्रा कर बिजनौर तक पहुंचे थे। जिला मुख्यालय पर साइकिल पर सवार होकर पहुंचे हजारों मजदूरों को जिला प्रशासन व स्वयंसेवी संगठनों ने न केवल खाने-पीने व ठहरने की व्यवस्था कराई बल्कि उन्हें घर तक पहुंचने के लिए राशन, वाहन व नकद किराया भी दिलाया गया। जिसके चलते हजारों मजदूर अपनी साइकिल जिला मुख्यालय पर छोड़कर अपने घर पहुंचे। हालांकि जाते हुए जिला प्रशासन के सुपुर्द की गई साइकिलें उन्होंने बाद में वापस ले जाने का वादा किया था। किंतु वह मजदूर अपनी साइकिल वापस लेने के लिए नहीं पहुंच पाए। कोरोना महामारी की पहली लहर समाप्त होने के बाद जिला प्रशासन ने जिला मुख्यालय पर मजदूरों द्वारा छोड़ी गई साइकिल स्टैंड बनाकर जगह-जगह खड़ी करा दी। जिन्हें काम की तलाश में बिजनौर आने वाले रोजमर्रा के मजदूरों को नि:शुल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई। साइकिलें सड़क के किनारे स्टैंड पर खड़ी धूल फांक रही हैं।
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कबाड़ के ढेर में तब्दील हो रही साइकिल
इंदिरा बाल भवन में जगह-जगह मजदूरों द्वारा छोड़ी गई साइकिलों के ढ़ेर लगे हुए हैं, जो जंग खाकर गलनी शुरू हो गई है। अब कबाड़ के ढ़ेर में बदल गए हैं। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन मजदूरों द्वारा छोड़ी गई साइकिल गरीबों को चलाने के लिए मुफ्त में दे देते तो शायद आज ये साइकिलें कूड़े के ढ़ेर में तब्दील न होती। अब देखना है कि जिला प्रशासन द्वारा स्टैंड व इंदिरा बाल भवन में खड़ी कराई गई साइकिलों को नीलामी कराती है या यूं ही छोड़ देती है।
शहर में बने जगह-जगह स्टैंड पर खड़ी हैं मजदूरों की साइकिलें
जिला प्रशासन ने मजदूरों द्वारा छोड़ी गई साइकिलों को ठीक करा कर साइकिल स्टैंड बना कर जगह-जगह खड़ी करा दी हैं। जिन्हें काम की तलाश में देहात क्षेत्र से बिजनौर आने वाले रोजमर्रा के मजदूरों को नि:शुल्क उपलब्ध कराने के लिए खड़ी की गई थी। ये साइकिलें रोडवेज, सरकारी अस्पताल, एसपी आफिस आदि के पास बनाये गये स्टैंड पर आज भी खड़ी धूल फांक रही हैं।