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कूड़ा निस्तारण को लगेंगे प्लांट
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कूड़ा निस्तारण को लगेंगे प्लांट
बिजनौर। जिले की सभी नगर पालिकाओं में अब वैज्ञानिक विधि से कूड़ा निस्तारण किया जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए सेग्रिकेशन प्लांट लगेंगे। कूड़े को मशीन के जरिये प्रवृति के अनुसार अलग-अलग किया जाएगा। इस कूड़े को बेचकर नगर पालिकाओं की आमदनी बढ़ाई जाएगी। इस तरह निस्तारण से कूड़ा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। प्लांट लगाने के लिए सभी नगर पालिकाओं में जमीन की तलाश कर ली गई है।
कूड़ा निस्तारण इस समय पालिकाओं की सबसे बड़ी समस्या है। कूड़ा के सूखे यानि न गलने वाले और गीले यानि गलने वाले कूड़े के हिसाब से अलग अलग किया जा सकता है। इसके लिए शासन ने घरों में हरे और नीले रंग के डस्टबिन बंटवाए थे लेकिन ये अभियान उतना सफल नहीं हो पाया है। जनता ने अब तक कूड़े को प्रवृत्ति के अनुसार अलग एकत्र करना शुरू नहीं किया है। कूड़ा निस्तारण के लिए अब मशीनों की मदद ली जाएगी। इसके लिए पालिका क्षेत्रों में सेग्रिकेशन प्लांट लगाए जाएंगे। यहां मशीनों की मदद से कूड़ा अलग अलग किया जाएगा। सूखे कूड़े को अलग व गीले कूड़े को अलग करके बेच दिया जाएगा। इसमे ज्यादा जगह की भी जरूरत नहीं होगी और पालिकाओं की आमदनी भी बढ़ेगी। एडीएम प्रशासन भगवत शरण ने बताया कि आसपास के कुछ जिलों में वैज्ञानिक विधि से कूड़ा निस्तारित किया जा रहा है। पालिका की टीमों को वहां भेजा जा रहा है। जो प्लांट सबसे अच्छा होगा वही बिजनौर में लगवाए जाएंगे।
ऐसे काम करेंगी मशीनें
कूड़े को एक जगह मशीन के पास लाकर पलट दिया जाएगा। यहां दो कर्मचारी मोटा कूड़ा जैसे प्लास्टिक बोतल, थर्माकोल शुरू में ही अलग कर देंगे। इसके बाद कूड़े को एक कंवेयर बेल्ट के जरिये एक मशीन में ले जाया जाएगा। वहां मशीन वजन और साइज के अनुसार बड़े और भारी कूड़े जैसे पत्थर, लोहा, इलेक्ट्रोनिक पार्ट को अलग करेगी। वजन के हिसाब से इनका वर्गीकरण होगा। इसके बाद दूसरी मशीन में उससे कम वजन के कूड़े को अलग किया जाएगा। आखिरी में गीला कूड़ा बचेगा।
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पॉलिथीन भी होगी अलग
अक्सर लोग कूड़े को पॉलिथीन में बंद करके फेंकते हैं। कंवेयर बेल्ट में लोहे के दांत वाले एक दो गेट होंगे। वहां वे कूड़े पर दबाव डालकर उसे काटते चलेंगे। वहां पॉलिथीन कटकर अलग हो जाएगी व अन्य कूड़ा अलग। बाद में मशीन उसे अलग अलग एकत्र करेगी। कागज पॉलिथीन के कूड़े को दबाकर क्यूब बनाकर बेची जाएंगी।
इस तरह का होता है कूड़ा
शासन द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार पालिकाओं में सात प्रतिशत कूड़ा कंकड़ व पत्थर, आठ प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट, पांच प्रतिशत घरेलू हानिकारक कूड़ा, 56 प्रतिशत गीला कूड़ा, चार प्रतिशत इलेक्ट्रोनिक कूड़ा व अन्य कूड़ा होता है। यह सब बिकने लायक होता है।
एक दिन में नगर पालिका द्वारा इकट्ठा कूड़ा
अफजलगढ़ 12.75
बिजनौर 40.95
चांदपुर 16.5
धामपुर 25
हल्दौर 7.82
जलालाबाद 7.17
झालू 4.65
किरतपुर 18.77
मंडावर 5.85
नगीना 41
नजीबाबाद 38.05
नहटौर 13.55
नूरपुर 16
साहनपुर 7.85
सहसपुर 6.73
स्योहारा 20
शेरकोट 13
बढ़ापुर 5.9
नोट: (कूड़ा टन में है।)
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बिजनौर। जिले की सभी नगर पालिकाओं में अब वैज्ञानिक विधि से कूड़ा निस्तारण किया जाएगा। कूड़ा निस्तारण के लिए सेग्रिकेशन प्लांट लगेंगे। कूड़े को मशीन के जरिये प्रवृति के अनुसार अलग-अलग किया जाएगा। इस कूड़े को बेचकर नगर पालिकाओं की आमदनी बढ़ाई जाएगी। इस तरह निस्तारण से कूड़ा हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। प्लांट लगाने के लिए सभी नगर पालिकाओं में जमीन की तलाश कर ली गई है।
कूड़ा निस्तारण इस समय पालिकाओं की सबसे बड़ी समस्या है। कूड़ा के सूखे यानि न गलने वाले और गीले यानि गलने वाले कूड़े के हिसाब से अलग अलग किया जा सकता है। इसके लिए शासन ने घरों में हरे और नीले रंग के डस्टबिन बंटवाए थे लेकिन ये अभियान उतना सफल नहीं हो पाया है। जनता ने अब तक कूड़े को प्रवृत्ति के अनुसार अलग एकत्र करना शुरू नहीं किया है। कूड़ा निस्तारण के लिए अब मशीनों की मदद ली जाएगी। इसके लिए पालिका क्षेत्रों में सेग्रिकेशन प्लांट लगाए जाएंगे। यहां मशीनों की मदद से कूड़ा अलग अलग किया जाएगा। सूखे कूड़े को अलग व गीले कूड़े को अलग करके बेच दिया जाएगा। इसमे ज्यादा जगह की भी जरूरत नहीं होगी और पालिकाओं की आमदनी भी बढ़ेगी। एडीएम प्रशासन भगवत शरण ने बताया कि आसपास के कुछ जिलों में वैज्ञानिक विधि से कूड़ा निस्तारित किया जा रहा है। पालिका की टीमों को वहां भेजा जा रहा है। जो प्लांट सबसे अच्छा होगा वही बिजनौर में लगवाए जाएंगे।
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ऐसे काम करेंगी मशीनें
कूड़े को एक जगह मशीन के पास लाकर पलट दिया जाएगा। यहां दो कर्मचारी मोटा कूड़ा जैसे प्लास्टिक बोतल, थर्माकोल शुरू में ही अलग कर देंगे। इसके बाद कूड़े को एक कंवेयर बेल्ट के जरिये एक मशीन में ले जाया जाएगा। वहां मशीन वजन और साइज के अनुसार बड़े और भारी कूड़े जैसे पत्थर, लोहा, इलेक्ट्रोनिक पार्ट को अलग करेगी। वजन के हिसाब से इनका वर्गीकरण होगा। इसके बाद दूसरी मशीन में उससे कम वजन के कूड़े को अलग किया जाएगा। आखिरी में गीला कूड़ा बचेगा।
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पॉलिथीन भी होगी अलग
अक्सर लोग कूड़े को पॉलिथीन में बंद करके फेंकते हैं। कंवेयर बेल्ट में लोहे के दांत वाले एक दो गेट होंगे। वहां वे कूड़े पर दबाव डालकर उसे काटते चलेंगे। वहां पॉलिथीन कटकर अलग हो जाएगी व अन्य कूड़ा अलग। बाद में मशीन उसे अलग अलग एकत्र करेगी। कागज पॉलिथीन के कूड़े को दबाकर क्यूब बनाकर बेची जाएंगी।
इस तरह का होता है कूड़ा
शासन द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार पालिकाओं में सात प्रतिशत कूड़ा कंकड़ व पत्थर, आठ प्रतिशत प्लास्टिक वेस्ट, पांच प्रतिशत घरेलू हानिकारक कूड़ा, 56 प्रतिशत गीला कूड़ा, चार प्रतिशत इलेक्ट्रोनिक कूड़ा व अन्य कूड़ा होता है। यह सब बिकने लायक होता है।
एक दिन में नगर पालिका द्वारा इकट्ठा कूड़ा
अफजलगढ़ 12.75
बिजनौर 40.95
चांदपुर 16.5
धामपुर 25
हल्दौर 7.82
जलालाबाद 7.17
झालू 4.65
किरतपुर 18.77
मंडावर 5.85
नगीना 41
नजीबाबाद 38.05
नहटौर 13.55
नूरपुर 16
साहनपुर 7.85
सहसपुर 6.73
स्योहारा 20
शेरकोट 13
बढ़ापुर 5.9
नोट: (कूड़ा टन में है।)