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Bijnor News: 50 दिन में बाघों ने चार लोगों को मौत की नींद सुलाया
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कार्बेट टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क क्षेत्र में बाघ की दहशत
उच्च अधिकारियों ने सीमा पर स्कूली बच्चों की सुरक्षा के निर्देश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क में 50 दिन में बाघ चार लोगों को मौत की नींद सुला चुके है। हर एक पखवाड़े में एक मौत से बाघों की दहशत है। सीमा पर स्कूली बच्चों की सुरक्षा के निर्देश भी उच्च अधिकारियों ने दिए हैं।
कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क को दुनिया में घनत्व के हिसाब से बाघों की राजधानी के रूप में जाना जाता है।दुनिया भर के देशों से आने वाले पर्यटक यहां बाघों का दीदार करने आते हैं। अक्तूबर से बाघ के हमले बढ़ रहे है। 18 अक्तूबर को कालागढ़ रेंज में पवन कुमार, 12 नवंबर को ढिकाला में शिवम गुरूम, 23 नवंबर को ढिकाला में रामबहादुर और छह दिसंबर को ढेला में अनीता बाघ के हमले में जान गवां चुके हैं।
हालात यह है कि बाघ की दहशत पर 23 नवंबर से ढिकाला का ग्रासलैंड भी पर्यटकों के लिए बंद है। वन विभाग इस ग्रासलैंड को खोले जाने के लिए डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अभी तक यह रिपोर्ट हैदराबाद की लैब से नहीं आई है।
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घटना की जांच के आदेश
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डाॅ. धीरज पाण्डेय ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं। कैमरा ट्रैप लगा दिए गए हैं। स्कूलों में जाने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र वनकर्मी की टीम तैनात करने के आदेश दिए गए हैं। कालागढ़ में भी इंटर कॉलेज व प्राथमिक स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के लिए भी वनक्षेत्राधिकारी को निर्देश दिए जा रहे हैं।
वनों में बढ़ रही बाघों की संख्या
कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक दिगांथ नायक का कहना है कि बाघों की संख्या बढ़ रही है। उनका टकराव लोगों से हो रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से बिना सुरक्षा के वन में न जाने की सलाह दी।
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उच्च अधिकारियों ने सीमा पर स्कूली बच्चों की सुरक्षा के निर्देश दिए
संवाद न्यूज एजेंसी
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क में 50 दिन में बाघ चार लोगों को मौत की नींद सुला चुके है। हर एक पखवाड़े में एक मौत से बाघों की दहशत है। सीमा पर स्कूली बच्चों की सुरक्षा के निर्देश भी उच्च अधिकारियों ने दिए हैं।
कार्बेट टाइगर रिजर्व/नेशनल पार्क को दुनिया में घनत्व के हिसाब से बाघों की राजधानी के रूप में जाना जाता है।दुनिया भर के देशों से आने वाले पर्यटक यहां बाघों का दीदार करने आते हैं। अक्तूबर से बाघ के हमले बढ़ रहे है। 18 अक्तूबर को कालागढ़ रेंज में पवन कुमार, 12 नवंबर को ढिकाला में शिवम गुरूम, 23 नवंबर को ढिकाला में रामबहादुर और छह दिसंबर को ढेला में अनीता बाघ के हमले में जान गवां चुके हैं।
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हालात यह है कि बाघ की दहशत पर 23 नवंबर से ढिकाला का ग्रासलैंड भी पर्यटकों के लिए बंद है। वन विभाग इस ग्रासलैंड को खोले जाने के लिए डीएनए रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अभी तक यह रिपोर्ट हैदराबाद की लैब से नहीं आई है।
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घटना की जांच के आदेश
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डाॅ. धीरज पाण्डेय ने बताया कि घटना की जांच के आदेश दिए गए हैं। कैमरा ट्रैप लगा दिए गए हैं। स्कूलों में जाने वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए सशस्त्र वनकर्मी की टीम तैनात करने के आदेश दिए गए हैं। कालागढ़ में भी इंटर कॉलेज व प्राथमिक स्कूल के बच्चों की सुरक्षा के लिए भी वनक्षेत्राधिकारी को निर्देश दिए जा रहे हैं।
वनों में बढ़ रही बाघों की संख्या
कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक दिगांथ नायक का कहना है कि बाघों की संख्या बढ़ रही है। उनका टकराव लोगों से हो रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से बिना सुरक्षा के वन में न जाने की सलाह दी।