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कुत्तों ने बारहसिंघा का शिकार किया
अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Fri, 04 Nov 2016 11:38 PM IST
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बिजनौर के धामपुर क्षेत्र के गांव चाकरपुर के जंगलों में शिकारी कुत्तों ने हमला कर दो वर्षीय बारहसिंहा को मार डाला। कुत्ते के हमले से बुरी तरह घायल बारहसिंहा को बचाने का प्रयास किया गया। मगर उसे बचाया नहीं जा सका। वन विभाग की नर्सरी में उसे दफना दिया गया।
गांव के पूर्व प्रधान रविराज सिंह, पंकज कुमार, महावीर सिंह, सुुुुभाष कुमार ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे कुछ शिकारी कुत्तों ने जंगल में विचरण कर रहे बारहसिंघा पर अचानक हमला कर दिया। बारहसिंहा ने कुत्तों के हमले से बचने का काफी प्रयास किया। वह भागते हुए गांव के प्राइमरी स्कूल के पास जैसे ही पहुंचा तो कुत्तों ने उसे गिरा दिया। कुछ ही देर में कुत्तों ने उसे कई जगह से फाड़ डाला। वहां मौजूद कुछ ग्रामीणों ने भी उसे बचाने की कोशिश की। मगर, तब तक वह काफी लहूलुहान हो चुका था। ग्रामीणों ने धामपुर रेंज के डिप्टी रेंजर रामगोपाल सिंह चौहान को घटना के बारे में सूचना दी। विभाग की ओर से जख्मी बारहसिंहा को उपचार दिलाने के लिए टीम तैयार की गई। मगर, उसके आने तक बारहसिंहा ने दम तोड़ दिया। डिप्टी रेंजर ने बताया कि इस बारहसिंहा की उम्र करीब दो साल थी। वन विभाग की नर्सरी में उसे दफनाया गया। उन्होंने कहा कि यदि घटना की सूचना कुछ और समय से मिल जाती तो शायद बारहसिंहा को बचाया जा सकता था। उन्होंने लोगों सेे अपील की कि वे वन्य जीवों के संरक्षण में सहयोग दें।
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गांव के पूर्व प्रधान रविराज सिंह, पंकज कुमार, महावीर सिंह, सुुुुभाष कुमार ने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे कुछ शिकारी कुत्तों ने जंगल में विचरण कर रहे बारहसिंघा पर अचानक हमला कर दिया। बारहसिंहा ने कुत्तों के हमले से बचने का काफी प्रयास किया। वह भागते हुए गांव के प्राइमरी स्कूल के पास जैसे ही पहुंचा तो कुत्तों ने उसे गिरा दिया। कुछ ही देर में कुत्तों ने उसे कई जगह से फाड़ डाला। वहां मौजूद कुछ ग्रामीणों ने भी उसे बचाने की कोशिश की। मगर, तब तक वह काफी लहूलुहान हो चुका था। ग्रामीणों ने धामपुर रेंज के डिप्टी रेंजर रामगोपाल सिंह चौहान को घटना के बारे में सूचना दी। विभाग की ओर से जख्मी बारहसिंहा को उपचार दिलाने के लिए टीम तैयार की गई। मगर, उसके आने तक बारहसिंहा ने दम तोड़ दिया। डिप्टी रेंजर ने बताया कि इस बारहसिंहा की उम्र करीब दो साल थी। वन विभाग की नर्सरी में उसे दफनाया गया। उन्होंने कहा कि यदि घटना की सूचना कुछ और समय से मिल जाती तो शायद बारहसिंहा को बचाया जा सकता था। उन्होंने लोगों सेे अपील की कि वे वन्य जीवों के संरक्षण में सहयोग दें।
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