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सैनिक को चलती ट्रेन से फेंका, गंभीर घायल

अमर उजाला/बिजनौर Updated Sat, 08 Sep 2018 12:29 AM IST
ट्रेन से धक्का देने के बाद घायल सैनिक।
ट्रेन से धक्का देने के बाद घायल सैनिक। - फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद/ मेरठ। सीट रिजर्वेशन विवाद के बाद घूसखोरी की फोटो खींचने पर एक टीसी ने सेना के जवान को सामान समेत चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। जवान को गंभीर घायल अवस्था में में पहले जिला अस्पताल और फिर मेरठ के मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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उत्तराखंड के बेरिया दौलत बाजपुर निवासी 35 वर्षीय सर्वजीत सिंह बंगाल इंजीनियरिंग जम्मू में तैनात हैं। वह मुरादाबाद से जम्मू जाने के लिए बेगमपुरा एक्सप्रेस में सवार हुए थे। नजीबाबाद स्टेशन से पहले गेट 482 के निकट सर्वजीत शुक्रवार रात करीब 1:30 बजे घायल पड़े मिले। सादी कपड़ों में इस सिख युवक की सूचना गेटमैन ने स्टेशन मास्टर को दी। जीआरपी और आरपीएफ ने सीएचसी में उपचार के बाद जिला अस्पताल में भर्ती कराया। सूचना पर पहुंचे परिजन उसे मिलिट्री अस्पताल मेरठ ले गए। घटनास्थल के करीब ही उसका बैग मिला है। जवान के भाई राजेंद्र सिंह संधू ने बताया कि सीट रिजर्वेशन को लेकर विवाद के बाद टीसी ने पहले ट्रेन से सामान फेंका फिर सर्वजीत को धक्का देकर गेट बंद कर लिया। टीसी ने उससे जबरन 500 रुपये वसूले थे, जिसकी सर्वजीत ने मोबाइल से फोटो खींच ली थी। हालांकि जीआरपी को परिजनों ने ऐसी कोई सूचना नहीं दी है।

परिजन बोले, टीसी ने ही दिया सैनिक को ट्रेन से धक्का
नजीबाबाद/मेरठ। सैनिक को चलती ट्रेन से एक टीसी द्वारा धक्का देकर सामान समेत फेंकने के मामले में जीआरपी और सैनिक के परिजनों के ब्यानों में विरोधाभास है। जीआरपी का कहना है कि उसे धक्का देने जैसी जानकारी सैनिक या उसके परिजनों ने नहीं दी,   लेकिन सैनिक के परिजन खुले तौर पर यह आरोप लगा रहे हैं। घायल फौजी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल से मिलिट्री अस्पताल, मेरठ में भर्ती कराया गया है।
उत्तराखंड के बेरिया दौलत बाजपुर का रहने वाला सेना का यह जवान सर्वजीत सिंह (35) बंगाल इंजीनियरिंग ग्रुप (बीईजी) में जम्मू में तैनात हैं। सर्वजीत सिंह ड्यूटी पर वापस लौट रहा था और वह वाराणसी से जम्मू जाने वाली बेगमपुरा एक्सप्रेस से मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से सवार हुआ था। हालांकि उसे नजीबाबाद रेलवे स्टेशन से पहले रेलवे के गेटमैन ने गेट संख्या 482 के निकट शुक्रवार रात करीब 1:30 बजे घायल अवस्था में कराहते देखा, जो सेना की वर्दी में नहीं था और गेटमैन ने स्टेशन मास्टर को सूचना दी कि एक सिख युवक घायल अवस्था में पड़ा हुआ है। स्टेशन मास्टर ने इसकी सूचना तुरंत जीआरपी और आरपीएफ को दी। मौके पर पहुंचे जीआरपी व आरपीएफ वालों ने सर्वजीत को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार दिलाया, लेकिन गंभीर घायल होने के कारण उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रेलवे पुलिस ने ही फौजी के परिजनों को फोन कर सूचना दी तो वे जिला अस्पताल पहुंचे। हालत गंभीर होने के कारण परिजन सर्वजीत को मेरठ के मिलिट्री अस्पताल ले गए।
जीआरपी नजीबाबाद के उपनिरीक्षक अशोक पाल ने बताया कि घटनास्थल से करीब डेढ़ किमी के फासले पर सर्वजीत का एक बैग पड़ा मिला है। घायल और उसके परिजनों से उन्हें उसके सैनिक होने तथा किसी के द्वारा ट्रेन से फेंके   जाने की जानकारी जीआरपी को नहीं दी। जीआरपी ने भी उसे एक आम नागरिक मानते हुए परिजनों को सूचना दी और उपचार कराया।
वहीं, परिजनों का आरोप है कि टीसी ने सर्वजीत को चलती ट्रेन से फेंका गया है। राजेंद्र सिंह संधू का कहना है कि ट्रेन में सवार होने के बाद आरक्षण करने को लेकर हुए विवाद के बाद टीसी ने उसके भाई सर्वजीत सिंह का पहले ट्रेन से सामान फेंका और फिर उसे ट्रेन से नीचे धक्का देकर गेट बंद कर लिया। संधू ने यह भी कहा कि उसके भाई से सीट रिजर्व करने के लिए टीसी ने जबरन 500 रुपये वसूले थे। सर्वजीत ने मोबाइल ्फोन से टीसी की इस करतूत का फोटो खींच लिया था और इसी बात से गुस्साए टीसी ने उसे चलती ट्रेन से धक्का देकर नीचे गिराया।

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