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Bijnor News: रेहड़ के सतीमठ का होगा सुंदरीकरण, सती हो गई थीं जमींदारों के परिवार की महिलाएं
Wed, 10 May 2023 11:50 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Wed, 10 May 2023 11:50 PM IST
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रेहड़ में जर्जर हालत मैं प्राचीन सती मठ ।
अचल चौधरी/सुबोध वशिष्ठ
बिजनौर/रेहड़। अलाउद्दीन खिलजी का रेहड़ से भी ताल्लुक रहा है। यहां खिलजी की सेना को चुनौती मिली थी। दरअसल, दिल्ली से कालागढ़ दर्रा होते हुए खिलजी अफगानिस्तान गया, जिसने रेहड़ के पास कुछ दिनों के लिए अपना पड़ाव डाला। रेहड़ के सती मठ को उसी जंग से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि अब ये सतीमठ जर्जर हो गए हैं, जिनका सुंदरीकरण करते हुए पर्यटन के फलक पर चमकाने की कवायद होने लगी हैं।
12वीं सदी के अंत में दिल्ली पर अलाउद्दीन खिलजी का शासन रहा। बुजुर्गों से सुनते आ किस्सों के आधार पर स्थानीय लोग बताते हैं कि एक बार अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना के साथ अफगानिस्तान जा रहा था, जिसने कालागढ़ दर्रे का रस्ता चुना। जब उसका काफिला रेहड़ तक पहुंचा तो बरसात हो गई और नदियों में उफान आ गया। जिसके चलते खिलजी को सेना समेत रेहड़ के पास पड़ाव डालना पड़ा। लोग बताते हैं कि सेना ने रसद की आपूर्ति के लिए स्थानीय लोगों और जागीरदारों के पशुओं को पकड़कर भोजन में इस्तेमाल शुरू कर दिया। लोगों की फसलें भी लूटी गई। उस वक्त इस इलाके में खिलजी की सेना का विरोध हुआ तो चुनौती दे डाली। जिसमें तमाम लोग मारे गए थे। बताया जाता है कि इन परिवारों की महिलाएं सती हो गई थी। जिनकी याद में सतीमठ बन गए।
रेहड़ू बंजारे के नाम पर पड़ा रेहड़ का नाम
बताते हैं कि संघर्ष से जब हल नहीं निकल पाया तो रेहड़ू नाम के बंजारे ने खिलजी की सेना को रसद मुहैया कराया। जिस पर खिलजी ने पशु चराने के लिए पहाड़ की तलहटी में नजीबाबाद तक जमीन का हिस्सा रेहड़ू को दे दिया था। रेहड़ू बंजारे के नाम पर ही इस जगह का रेहड़ पड़़ा। बीच में एक बार रेहड़ इलाके का नाम सिरसा पटम पटम घाट रहा।
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मांगलिक कार्य होने पर सतीमठ पर लेने पहुंचते हैं आशीर्वाद
रेहड़ निवासी पूर्व शिक्षक अशोक कुमार शर्मा एवं वरिष्ठ नागरिक कृषक चेतराम सिंह बताते हैं कि पच्चीस के आसपास सती मठ होते थे जो अनदेखी के चलते धीरे धीरे जर्जर होकर नष्ट हो गए। सती मठ में एक विशेष बारहदरी थी जिसमे एक बड़ा विशाल गुंबद व बारह दरवाजे थे। आज बारहदरी तथा अन्य दूसरे मठों के मात्र कुछ अवशेष बचे है। सती स्थल के निकट बने तालाब का उपयोग दाह संस्कार के उपरांत तर्पण आदि के लिए किया जाता था। परिवार में पुत्र का जन्म अथवा विवाह आदि होने पर नव दंपती यहां आकर आशीर्वाद लेते हैं। स्थानीय कस्बे की दूसरे स्थानों पर ब्याही गई बेटियां भी पुत्र प्राप्ति या परिवार में शादी विवाह के होने पर सती माताओं से आशीर्वाद लेने आती हैं। पूजा आदि के लिए एक या दो मठ की मरम्मत करा दी गई है।
सती मठ को विकसित कराया जाएगा। यहां पर रुकने और इस पवित्र स्थल को देखने की व्यवस्था कराई जाएगी। लोग इसका इतिहास भी जान पाएंगे। अभी तक यह स्थल बदहाल है, शीघ्र ही इस पर काम शुरू करा दिया जाएगा - उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर
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बिजनौर/रेहड़। अलाउद्दीन खिलजी का रेहड़ से भी ताल्लुक रहा है। यहां खिलजी की सेना को चुनौती मिली थी। दरअसल, दिल्ली से कालागढ़ दर्रा होते हुए खिलजी अफगानिस्तान गया, जिसने रेहड़ के पास कुछ दिनों के लिए अपना पड़ाव डाला। रेहड़ के सती मठ को उसी जंग से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि अब ये सतीमठ जर्जर हो गए हैं, जिनका सुंदरीकरण करते हुए पर्यटन के फलक पर चमकाने की कवायद होने लगी हैं।
12वीं सदी के अंत में दिल्ली पर अलाउद्दीन खिलजी का शासन रहा। बुजुर्गों से सुनते आ किस्सों के आधार पर स्थानीय लोग बताते हैं कि एक बार अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना के साथ अफगानिस्तान जा रहा था, जिसने कालागढ़ दर्रे का रस्ता चुना। जब उसका काफिला रेहड़ तक पहुंचा तो बरसात हो गई और नदियों में उफान आ गया। जिसके चलते खिलजी को सेना समेत रेहड़ के पास पड़ाव डालना पड़ा। लोग बताते हैं कि सेना ने रसद की आपूर्ति के लिए स्थानीय लोगों और जागीरदारों के पशुओं को पकड़कर भोजन में इस्तेमाल शुरू कर दिया। लोगों की फसलें भी लूटी गई। उस वक्त इस इलाके में खिलजी की सेना का विरोध हुआ तो चुनौती दे डाली। जिसमें तमाम लोग मारे गए थे। बताया जाता है कि इन परिवारों की महिलाएं सती हो गई थी। जिनकी याद में सतीमठ बन गए।
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रेहड़ू बंजारे के नाम पर पड़ा रेहड़ का नाम
बताते हैं कि संघर्ष से जब हल नहीं निकल पाया तो रेहड़ू नाम के बंजारे ने खिलजी की सेना को रसद मुहैया कराया। जिस पर खिलजी ने पशु चराने के लिए पहाड़ की तलहटी में नजीबाबाद तक जमीन का हिस्सा रेहड़ू को दे दिया था। रेहड़ू बंजारे के नाम पर ही इस जगह का रेहड़ पड़़ा। बीच में एक बार रेहड़ इलाके का नाम सिरसा पटम पटम घाट रहा।
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मांगलिक कार्य होने पर सतीमठ पर लेने पहुंचते हैं आशीर्वाद
रेहड़ निवासी पूर्व शिक्षक अशोक कुमार शर्मा एवं वरिष्ठ नागरिक कृषक चेतराम सिंह बताते हैं कि पच्चीस के आसपास सती मठ होते थे जो अनदेखी के चलते धीरे धीरे जर्जर होकर नष्ट हो गए। सती मठ में एक विशेष बारहदरी थी जिसमे एक बड़ा विशाल गुंबद व बारह दरवाजे थे। आज बारहदरी तथा अन्य दूसरे मठों के मात्र कुछ अवशेष बचे है। सती स्थल के निकट बने तालाब का उपयोग दाह संस्कार के उपरांत तर्पण आदि के लिए किया जाता था। परिवार में पुत्र का जन्म अथवा विवाह आदि होने पर नव दंपती यहां आकर आशीर्वाद लेते हैं। स्थानीय कस्बे की दूसरे स्थानों पर ब्याही गई बेटियां भी पुत्र प्राप्ति या परिवार में शादी विवाह के होने पर सती माताओं से आशीर्वाद लेने आती हैं। पूजा आदि के लिए एक या दो मठ की मरम्मत करा दी गई है।
सती मठ को विकसित कराया जाएगा। यहां पर रुकने और इस पवित्र स्थल को देखने की व्यवस्था कराई जाएगी। लोग इसका इतिहास भी जान पाएंगे। अभी तक यह स्थल बदहाल है, शीघ्र ही इस पर काम शुरू करा दिया जाएगा - उमेश मिश्रा, डीएम बिजनौर