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खेतों की मिट्टी में भी घुला ‘जहर’

Sat, 24 Nov 2018 11:03 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर Updated Sat, 24 Nov 2018 11:03 PM IST
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'Poison' in the soil of the fields
demo - फोटो : demo
बिजनौर में पानी के बाद जिले की मिट्टी भी जहरीली हो गई है। जिले के कई गांवों की मिट्टी में प्रारंभिक जांच में आर्सेनिक पाया गया है। भारतीय वनस्पति अनुसंधान परिषद (एनबीआरआई ) लखनऊ की जांच में यह खतरनाक स्थिति सामने आई है। फसलों के जरिए यह तत्व मनुष्य के शरीर में पहुंचकर आर्सेनिकोसिस और कैंसर जैसी बीमारियों की वजह बन सकते हैं। जिन गांवों की मिट्टी में आर्सेनिक मिला है, उनकी जांच एक बार फिर कराई जा रही है। इसके बाद इन गांवों में फसलों की सिंचाई और पेयजल के लिए अलग से प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा।
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भारतीय वनस्पति अनुसंधान परिषद लखनऊ ने तीन माह पहले यह जांच कराई थी, जिसकी रिपोर्ट हाल ही में प्राप्त हुई है। जिले के गांव मोहम्मदपुर देवमल, पीपलसाना, कराल, काजीपुरा, धर्मनगरी आदि की मिट्टी में प्रारंभिक जांच में आर्सेनिक मानक से अधिक मिला है। पानी में तो आर्सेनिक सात गुना अधिक तक मिला है। मिट्टी में भी इसकी मात्रा मानक से तीन गुणा अधिक तक पाई गई है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि मिट्टी में आर्सेनिक मिलना एक गंभीर विषय है। मिट्टी से धीरे धीरे फसलों में भी जाने शुरू हो जाएंगे और मानव शरीर में भी जाएंगे। एक रिपोर्ट के अनुसार गंगा देश के जिन पांच गांवों में सबसे आखिर में पहुंचती है, वहां तो आर्सेनिक खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है।
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तीन गुना तक ज्यादा है मात्रा
एक यूनिट के दस लाख वें हिस्से को एक पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) कहते हैं। मिट्टी में आर्सेनिक पांच पीपीएम से अधिक नहीं होने चाहिए। भारतीय वनस्पति अनुसंधान परिषद की मिट्टी के नमूनों की जांच में आर्सेनिक आठ से 16 पीपीएम तक मिला है। आर्सेनिक तत्व प्राकृतिक रूप से भूगर्भ जल में पाया जाता है। आसानी से पानी में घुलकर पानी के साथ यह तत्व भूगर्भ से बाहर आ जाते हैं।
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कीटनाशकों का अधिक इस्तेमाल भी हो सकता है वजह
 खेतों में कीटनाशकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से भी आर्सेनिक बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। जिले के किसान भी  खेतों में अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं। अधिक पानी की खपत वाली फसल जैसे धान में आर्सेनिक का असर ज्यादा होता है। यह फसल बाकी फसलों के मुकाबले आर्सेनिक को 20 से 25 प्रतिशत तक अधिक ग्रहण करती हैं।



पानी की स्थिति
गांव              मानक       आर्सेनिक की स्थिति
छाछरी            0.010        0.070
सलेमपुर          0.010        0.023
हादरपुर           0.010        0.044
गोपालपुर         0.010        0.026
सुल्तानपुर खास  0.010        0.011
गंगदासपुर        0.010        0.026
इस्लामपुर लाला  0.010        0.023
पाडला           0.010        0.034
खानपुर खादर    0.010        0.014
अजदेव         0.010        0.015
नंगली छोईया    0.010        0.014
नोट : उक्त आंकड़े जल निगम से लिए गए हैं। यह इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी की रिपोर्ट है।



अब जैविक खेती अपनाने का समय
जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन द्वारा बड़ा अभियान चलाया जा रहा है। जैविक खेती बैक्टीरिया पर आधारित होती है। जैविक खेती से जुड़ी दवाइयों पर अनुदान दिया जा रहा है। खेतों में फसलों के अवशेष जोतने से लेकर गलाने के लिए मशीनों व अन्य दवाइयों पर भारी अनुदान है। आर्सेनिक एक लीटर पानी में 0.010 मिली ग्राम तक ही होने चाहिए। अगर तत्व की मात्रा 0.011 भी हो जाए तो स्थिति खतरनाक मानी जाती है। जिन गांवों में पानी में आर्सेनिक अधिक मिले हैं, वहां पानी का ओवरहेड टैंक बनाने का प्रस्ताव जल निगम द्वारा भेजा जा चुका है। इन गांवों शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए गांवों में लाइन बिछाई जाएगी। बजट मिलने के बाद ओवरहेड टैंक का निर्माण शुरू होगा।


आर्सेनिक से कैंसर का खतरा : डा.शिरीष
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शिरीष कुमार के अनुसार आर्सेनिक सभी के लिए बहुत घातक है। यह नर्वस सिस्टम पर बहुत बुरा प्रभाव डालता है। कम मात्रा में भी इसका लगातार सेवन करने से किडनी, ब्रेन को खत्म कर देता है और कैंसर भी हो जाता है। किसानों के खेतों में अंधाधुंध कीटनाशक के इस्तेमाल से भी आर्सेनिक बढ़ते हैं।




अपनाएं जैविक खेती : डा.मिश्रा
नगीना स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के प्रभारी डॉ. डीएन मिश्रा के अनुसार खेतों की मिट्टी में आर्सेनिक मिलना गंभीर बात है। इस विषय पर तुरंत काम होना चाहिए। किसान भी अपने खेतों में पेस्टीसाइड का प्रयोग न कर जैविक खेती अपनाएं।
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