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बुलंद हौसले के साथ नीतू अग्रवाल ने जीती कोरोना की जंग
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नजीबाबाद - नीतू अग्रवाल।
- फोटो : NAZIBABAD
नजीबाबाद। समाजसेवी नीतू अग्रवाल ने बुलंद हौसले के साथ आखिरकार कोरोना से जंग जीत ली। नीतू कहती हैं कि कोरोना पर अकेले नहीं सबकी सहानुभूति और सपोर्ट से जंग जीती जाती है।
अग्रवाल महिला सभा की सचिव नीतू अग्रवाल समाजसेवा में अपनी पहचान रखती हैं। 46 वर्षीय नीतू अन्य सामाजिक संगठनों से भी जुड़ीं हैं। पति रूपेश अग्रवाल कपड़ा कारोबारी हैं। दो पुत्रों मोहित और हर्षित की मां नीतू अचानक कोरोना से संक्रमित हो गई। नीतू अग्रवाल कहती हैं चार अप्रैल को पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही मानों उनके पांव तले जमीन खिसक गई इसलिए नहीं कि उनमें हौसला नहीं था, बल्कि परेशानी यह थी कि अब परिवार की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। एकांतवाद में बीमारी से कैसे लड़ा जाएगा और परिजनों को संक्रमण से कैसे बचाएंगे।
नीतू ने बताया कि संक्रमित होते ही परिजनों, मित्रों और चिकित्सकों ने उन्हें हिम्मत दी, हौसला बढ़ाया। डा.प्रवीण लता नय्यर को चिकित्सक होने के साथ अपनी मित्र बताते हुए नीतू कहती हैं कि प्रवीण लता, सरकारी चिकित्सक डा.फैज हैदर, डा. संदीप कुमार, डा. राजेश वर्मा ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया और चिकित्सीय परामर्श दिया। चिकित्सकों ने ब्रीदिंग पावर बढ़ाने के लिए प्राणायाम करने की सलाह दी। कुछ देर धूप लेने और मुंह को खुश्क न रखने और तनावमुक्त रहकर अधिक से अधिक आराम करने की सलाह दी। कोरोना पर विजय हासिल करने में नीतू अपने पति और दोनों बेटों के सहयोग की ऋणी हैं।
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सबका सपोर्ट जरूरी
नीतू कहती हैं कि कोरोना संक्रमित मरीज के तनाव और अकेले पन को दूर करने के लिए सबका सपोर्ट मिलता है तो मरीज जल्द ही संक्रमण पर जीत हासिल कर लेता है। परिजनों के बीच आकर खुश महसूस कर रही हूं। नीतू ने तनाव और अकेले पन को दूर करने के लिए कोरोना संक्रमण काल में जो कुछ महसूस किया उसे अपनी काव्य रचना के माध्यम से उजागर किया है। नीतू की खुद की इन पंक्तियों से उनकी हिम्मत बंधी कि फुरसत के चंद क्षणों में जिंदगी को नए सिरे से परखने लगी हूं, हां कोरोना से जीतने लगी हूं मैं।
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अग्रवाल महिला सभा की सचिव नीतू अग्रवाल समाजसेवा में अपनी पहचान रखती हैं। 46 वर्षीय नीतू अन्य सामाजिक संगठनों से भी जुड़ीं हैं। पति रूपेश अग्रवाल कपड़ा कारोबारी हैं। दो पुत्रों मोहित और हर्षित की मां नीतू अचानक कोरोना से संक्रमित हो गई। नीतू अग्रवाल कहती हैं चार अप्रैल को पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही मानों उनके पांव तले जमीन खिसक गई इसलिए नहीं कि उनमें हौसला नहीं था, बल्कि परेशानी यह थी कि अब परिवार की जिम्मेदारी कौन संभालेगा। एकांतवाद में बीमारी से कैसे लड़ा जाएगा और परिजनों को संक्रमण से कैसे बचाएंगे।
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नीतू ने बताया कि संक्रमित होते ही परिजनों, मित्रों और चिकित्सकों ने उन्हें हिम्मत दी, हौसला बढ़ाया। डा.प्रवीण लता नय्यर को चिकित्सक होने के साथ अपनी मित्र बताते हुए नीतू कहती हैं कि प्रवीण लता, सरकारी चिकित्सक डा.फैज हैदर, डा. संदीप कुमार, डा. राजेश वर्मा ने लगातार उनका हौसला बढ़ाया और चिकित्सीय परामर्श दिया। चिकित्सकों ने ब्रीदिंग पावर बढ़ाने के लिए प्राणायाम करने की सलाह दी। कुछ देर धूप लेने और मुंह को खुश्क न रखने और तनावमुक्त रहकर अधिक से अधिक आराम करने की सलाह दी। कोरोना पर विजय हासिल करने में नीतू अपने पति और दोनों बेटों के सहयोग की ऋणी हैं।
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सबका सपोर्ट जरूरी
नीतू कहती हैं कि कोरोना संक्रमित मरीज के तनाव और अकेले पन को दूर करने के लिए सबका सपोर्ट मिलता है तो मरीज जल्द ही संक्रमण पर जीत हासिल कर लेता है। परिजनों के बीच आकर खुश महसूस कर रही हूं। नीतू ने तनाव और अकेले पन को दूर करने के लिए कोरोना संक्रमण काल में जो कुछ महसूस किया उसे अपनी काव्य रचना के माध्यम से उजागर किया है। नीतू की खुद की इन पंक्तियों से उनकी हिम्मत बंधी कि फुरसत के चंद क्षणों में जिंदगी को नए सिरे से परखने लगी हूं, हां कोरोना से जीतने लगी हूं मैं।