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जिले में नीलगायों को निगल रहे शिकारी
अमर उजाला ब्यूरो, बिजनौर
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:36 AM IST
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गाय
- फोटो : pic
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बिजनौर में नीलगायों को मारने पर केंद्र सरकार के दो मंत्रियों में भले ही ठन गई हो पर जिले में नीलगाय का शिकार करने से शिकारी बाज नहीं आ रहे। शिकारी धड़ल्ले से खुलेआम नीलगायों के शिकार कर रहे हैं।
किसान भी शिकारियों के तरफ से आंखें बंद किए है। नीलगाय सबसे ज्यादा किसानों की फसल बर्बाद कर रही है। तीन साल पहले केदारनाथ में आई आपदा के बाद गंगा में बड़ी तादाद में नीलगाय बह गई। जो नीलगाय बची हैं उन्हें शिकारी निगल रहे हैं। जिले के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां अब इक्का-दुक्का नीलगाय ही नजर आती है। नीलगाय क्यों कम हो गईं इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
नीलगाय को मारने को लेकर केंद्र सरकार के दो मंत्री मेनका गांधी और प्रकाश जावड़ेकर में ठन गई है। दोनों मंत्री इस मामले को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। पर जिले में भी नीलगायों का चोरी छिपे बिना वन विभाग की अनुमति के शिकार किया जा रहा है। किसान नीलगाय से सबसे ज्यादा परेशान है। नीलगाय किसानों की फसल उजाड़ती है।
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नीलगायों के जंगल में सक्रिय रहने पर किसान की फसल नहीं हो पाती कई बार किसान नीलगाय से निजात दिलाने के लिए प्रशासन से मांग कर चुके हैं। किसान नहीं चाहते कि जंगल में नीलगाय नजर आए। जिले में वर्ष 2013 गणना के दौरान 3906 नीलगाय थीं। खादर क्षेत्र में गंगा के किनारे खूब नीलगाय नजर आते। जो अब दिखाई नहीं देेते। वर्ष 2013 में केदार घाटी में आई आपदा के बाद बड़ी तादाद में नीलगाय गंगा में बह गई। खादर के अलावा अन्य जंगल में जो नील गाय बची है उनका ही शिकार हो रहा है। पर कोई इसे रोकने की आवाज नहीं उठा रहा है। कही जगह अगर किसानों के सामने भी नीलगाय का शिकार हो रहा है तो किसान भी नजर बचा लेते हैं।
जिले में नीलगाय कितनी कम हुईं इसका जवाब अफसरों के पास भी नहीं है। दोबारा से शासन के आदेश पर गणना होने पर पता चलेगा कि जिले में कितनी नीलगाय बची हैं। जंगलों में इक्का दुक्का ही कही नील गाय नजर आती है।
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किसान भी शिकारियों के तरफ से आंखें बंद किए है। नीलगाय सबसे ज्यादा किसानों की फसल बर्बाद कर रही है। तीन साल पहले केदारनाथ में आई आपदा के बाद गंगा में बड़ी तादाद में नीलगाय बह गई। जो नीलगाय बची हैं उन्हें शिकारी निगल रहे हैं। जिले के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां अब इक्का-दुक्का नीलगाय ही नजर आती है। नीलगाय क्यों कम हो गईं इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
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नीलगाय को मारने को लेकर केंद्र सरकार के दो मंत्री मेनका गांधी और प्रकाश जावड़ेकर में ठन गई है। दोनों मंत्री इस मामले को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। पर जिले में भी नीलगायों का चोरी छिपे बिना वन विभाग की अनुमति के शिकार किया जा रहा है। किसान नीलगाय से सबसे ज्यादा परेशान है। नीलगाय किसानों की फसल उजाड़ती है।
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नीलगायों के जंगल में सक्रिय रहने पर किसान की फसल नहीं हो पाती कई बार किसान नीलगाय से निजात दिलाने के लिए प्रशासन से मांग कर चुके हैं। किसान नहीं चाहते कि जंगल में नीलगाय नजर आए। जिले में वर्ष 2013 गणना के दौरान 3906 नीलगाय थीं। खादर क्षेत्र में गंगा के किनारे खूब नीलगाय नजर आते। जो अब दिखाई नहीं देेते। वर्ष 2013 में केदार घाटी में आई आपदा के बाद बड़ी तादाद में नीलगाय गंगा में बह गई। खादर के अलावा अन्य जंगल में जो नील गाय बची है उनका ही शिकार हो रहा है। पर कोई इसे रोकने की आवाज नहीं उठा रहा है। कही जगह अगर किसानों के सामने भी नीलगाय का शिकार हो रहा है तो किसान भी नजर बचा लेते हैं।
जिले में नीलगाय कितनी कम हुईं इसका जवाब अफसरों के पास भी नहीं है। दोबारा से शासन के आदेश पर गणना होने पर पता चलेगा कि जिले में कितनी नीलगाय बची हैं। जंगलों में इक्का दुक्का ही कही नील गाय नजर आती है।