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हैदरपुर वेटलैंड में दिखे 250 से ज्यादा बारहसिंघा
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बिजनौर-मुजफ्फरनगर की सीमा पर बने हैदरपुर वेटलैंड में घूमता बारहसिंघों का झुंड।
- फोटो : BIJNOR
हैदरपुर वेटलैंड में दिखे 250 से ज्यादा बारहसिंघा
बिजनौर। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ देहरादून की टीम को हैदरपुर वेटलैंड में 250 से ज्यादा बारहसिंघा दिखे हैं। अब इन बारहसिंघों की पहचान बाघों की गणना की तर्ज पर की जाएगी। फोटो के आधार पर देखा जाएगा कि कितने बारहसिंघा गंगा किनारे वेटलैंड के दलदली क्षेत्र में रह रहे हैं। पहली बार में 250 से ज्यादा बारहसिंघा दिखने पर वन विभाग के अफसर गदगद हैं।
हैदरपुर वेटलैंड को वन्य जीवों को संरक्षण देने के लिए विकसित किया गया है। जब वेटलैंड क्षेत्र को विकसित किया जा रहा था तब यह काम मुख्य रूप से पक्षियों के लिए किया जा रहा था। यहां पर देशी और विदेशी पक्षियों की 400 से ज्यादा प्रजाति रहती हैं। यहां पर कभी कभार इक्का दुक्का बारहसिंघा भी दिख जाते थे। वेटलैंड बनवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले आशीष लोया ने यहां पर घूमना शुरू किया तो उन्हें बारहसिंघा के झुंड दिखने शुरू हुए। कुछ दिन पहले उन्हें करीब 150 बारहसिंघा का झुंड दिखा तो उन्होंने इसके बारे में वन विभाग के अफसरों को बताया। वन विभाग के अफसर भी हैरत में आए गए कि यहां इतनी बड़ी संख्या में बारहसिंघा रह रहे हैं। साल 2013 में आई केदारनाथ आपदा के बाद बारहसिंघा का यहां सबसे बड़ा झुंड दिखाई दिया था। वन विभाग ने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ देहरादून की टीम से बारहसिंघा की गणना कराई। गणना में 250 से ज्यादा बारहसिंघा के फोटो ड्रोन कैमरों में कैद हुए हैं। अब फोटो के आधार पर पहचान कर बारहसिंघा की गणना आगे की जाएगी।
ऐसे होती है गणना
हर बारहसिंघा के फोटो में शरीर पर डिजाइन, निशान, सींग के पैटर्न आदि को देखकर इनकी गणना होगी। ऐसे ही बाघ की गणना होती है।
बारहसिंघा के विकास की हैं यहां अपार संभावनाएं
पर्यावरणविद आशीष लोया का कहना है कि दल को 250 से ज्यादा बारहसिंघा दिखे हैं। अब इनके फोटो की जांच के बाद ही सही आंकड़े सामने आएंगे। हैदरपुर वेटलैंड में बारहसिंघा के विकास की अपार संभावनाएं हैं।
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बिजनौर। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ देहरादून की टीम को हैदरपुर वेटलैंड में 250 से ज्यादा बारहसिंघा दिखे हैं। अब इन बारहसिंघों की पहचान बाघों की गणना की तर्ज पर की जाएगी। फोटो के आधार पर देखा जाएगा कि कितने बारहसिंघा गंगा किनारे वेटलैंड के दलदली क्षेत्र में रह रहे हैं। पहली बार में 250 से ज्यादा बारहसिंघा दिखने पर वन विभाग के अफसर गदगद हैं।
हैदरपुर वेटलैंड को वन्य जीवों को संरक्षण देने के लिए विकसित किया गया है। जब वेटलैंड क्षेत्र को विकसित किया जा रहा था तब यह काम मुख्य रूप से पक्षियों के लिए किया जा रहा था। यहां पर देशी और विदेशी पक्षियों की 400 से ज्यादा प्रजाति रहती हैं। यहां पर कभी कभार इक्का दुक्का बारहसिंघा भी दिख जाते थे। वेटलैंड बनवाने में मुख्य भूमिका निभाने वाले आशीष लोया ने यहां पर घूमना शुरू किया तो उन्हें बारहसिंघा के झुंड दिखने शुरू हुए। कुछ दिन पहले उन्हें करीब 150 बारहसिंघा का झुंड दिखा तो उन्होंने इसके बारे में वन विभाग के अफसरों को बताया। वन विभाग के अफसर भी हैरत में आए गए कि यहां इतनी बड़ी संख्या में बारहसिंघा रह रहे हैं। साल 2013 में आई केदारनाथ आपदा के बाद बारहसिंघा का यहां सबसे बड़ा झुंड दिखाई दिया था। वन विभाग ने वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ देहरादून की टीम से बारहसिंघा की गणना कराई। गणना में 250 से ज्यादा बारहसिंघा के फोटो ड्रोन कैमरों में कैद हुए हैं। अब फोटो के आधार पर पहचान कर बारहसिंघा की गणना आगे की जाएगी।
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ऐसे होती है गणना
हर बारहसिंघा के फोटो में शरीर पर डिजाइन, निशान, सींग के पैटर्न आदि को देखकर इनकी गणना होगी। ऐसे ही बाघ की गणना होती है।
बारहसिंघा के विकास की हैं यहां अपार संभावनाएं
पर्यावरणविद आशीष लोया का कहना है कि दल को 250 से ज्यादा बारहसिंघा दिखे हैं। अब इनके फोटो की जांच के बाद ही सही आंकड़े सामने आएंगे। हैदरपुर वेटलैंड में बारहसिंघा के विकास की अपार संभावनाएं हैं।
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