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Bijnor News: खुलने लगीं मनरेगा घोटाले की परतें, सभी साइन बोर्ड का फर्जी बिल पर हुआ भुगतान
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- एक बिल संख्या पर हुआ दो साइन बोर्ड का भुगतान
- जांच की आंच के बाद पहुंचने शुरु हुए पंचायतों में साइन बोर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
स्योहारा। ब्लॉक में साइन बोर्ड घोटाले की परतें खुलनी शुरू हो गई है। श्याम स्वयं सहायता समूह के खाते में 11 नहीं, सभी साइन बोर्ड का भुगतान फर्जी बिलों पर किया गया है। एक ही बिल संख्या पर दो साइन बोर्ड का भुगतान किया गया है। उधर, घोटाले का खुलासा हो पर पंचायतों में साइन बोर्ड पहुंचने शुरू हो गए है।
ब्लॉक की ऐसी ग्राम पंचायत, जिसमें एक लाख रुपये से अधिक का मनरेगा के अंतर्गत काम किया गया था, उसमें कार्य का विवरण लिखने के लिए साइन बोर्ड लगना था। साइन बोर्ड की कीमत पांच हजार रुपये थी। सभी साइन बोर्ड देने के लिए श्याम स्वयं सहायता समूह को जिम्मेदारी दी गई थी। सभी ग्राम पंचायतों में बोर्ड लगाने से पहले ग्राम प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक द्वारा लिखित में हस्ताक्षर कर डिमांड दी जाती है। इसके बाद बोर्ड लगने पर बिल के माध्यम से मनरेगा द्वारा भुगतान किया जाता है।
मगर, ऐसा न कर खंड विकास अधिकारी रामकुमार, सहायक लेखाकार नंदकिशोर व कंप्यूटर ऑपरेटर नवनीत कुमार फर्जी बिल फीड कर श्याम स्वयं सहायता समूह को एक साथ भुगतान करा दिया गया था। शिकायत के बाद उपायुक्त श्रम आरबी यादव और उपायुक्त स्वत: रोजगार वीरेंद्र सिंह की जांच में घोटाले का खुलासा हुआ। इसके बाद खंड विकास अधिकारी, सहायक लेखाकार मनरेगा, कंप्यूटर ऑपरेटर व श्याम स्वयं सहायता समूह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है।
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साथ ही जांच में यह भी सामने आया कि जिन फर्जी बिलों पर भुगतान किया गया है। उसमें एक बिल संख्या 211 पर दो अलग अलग स्थानों पर किए गए कार्य के साइन बोर्ड का भुगतान किया गया है। कई ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान का कहना है कि उनकी बिना जानकारी और बिना उनके हस्ताक्षर के साइन बोर्ड का भुगतान किया गया है जबकि मौके पर कोई साइन बोर्ड नहीं लगवाया था। अब भुगतान का खुलासा होने पर उनकी ग्राम पंचायत में बोर्ड पहुंच रहे है।
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- जांच की आंच के बाद पहुंचने शुरु हुए पंचायतों में साइन बोर्ड
संवाद न्यूज एजेंसी
स्योहारा। ब्लॉक में साइन बोर्ड घोटाले की परतें खुलनी शुरू हो गई है। श्याम स्वयं सहायता समूह के खाते में 11 नहीं, सभी साइन बोर्ड का भुगतान फर्जी बिलों पर किया गया है। एक ही बिल संख्या पर दो साइन बोर्ड का भुगतान किया गया है। उधर, घोटाले का खुलासा हो पर पंचायतों में साइन बोर्ड पहुंचने शुरू हो गए है।
ब्लॉक की ऐसी ग्राम पंचायत, जिसमें एक लाख रुपये से अधिक का मनरेगा के अंतर्गत काम किया गया था, उसमें कार्य का विवरण लिखने के लिए साइन बोर्ड लगना था। साइन बोर्ड की कीमत पांच हजार रुपये थी। सभी साइन बोर्ड देने के लिए श्याम स्वयं सहायता समूह को जिम्मेदारी दी गई थी। सभी ग्राम पंचायतों में बोर्ड लगाने से पहले ग्राम प्रधान, सचिव व तकनीकी सहायक द्वारा लिखित में हस्ताक्षर कर डिमांड दी जाती है। इसके बाद बोर्ड लगने पर बिल के माध्यम से मनरेगा द्वारा भुगतान किया जाता है।
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मगर, ऐसा न कर खंड विकास अधिकारी रामकुमार, सहायक लेखाकार नंदकिशोर व कंप्यूटर ऑपरेटर नवनीत कुमार फर्जी बिल फीड कर श्याम स्वयं सहायता समूह को एक साथ भुगतान करा दिया गया था। शिकायत के बाद उपायुक्त श्रम आरबी यादव और उपायुक्त स्वत: रोजगार वीरेंद्र सिंह की जांच में घोटाले का खुलासा हुआ। इसके बाद खंड विकास अधिकारी, सहायक लेखाकार मनरेगा, कंप्यूटर ऑपरेटर व श्याम स्वयं सहायता समूह के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है।
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साथ ही जांच में यह भी सामने आया कि जिन फर्जी बिलों पर भुगतान किया गया है। उसमें एक बिल संख्या 211 पर दो अलग अलग स्थानों पर किए गए कार्य के साइन बोर्ड का भुगतान किया गया है। कई ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान का कहना है कि उनकी बिना जानकारी और बिना उनके हस्ताक्षर के साइन बोर्ड का भुगतान किया गया है जबकि मौके पर कोई साइन बोर्ड नहीं लगवाया था। अब भुगतान का खुलासा होने पर उनकी ग्राम पंचायत में बोर्ड पहुंच रहे है।