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बाघ और गुलदार खत्म हो गए तो जंगल भी नहीं बचेंगे : डॉ. अरुण कुमार
Mon, 29 Jul 2024 01:07 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Mon, 29 Jul 2024 01:07 AM IST
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धामपुर (बिजनौर)। वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि बाघ, गुलदार और शेर हमारे मित्र हैं, इन्हें मारना नहीं चाहिए। बल्कि इनसे दूरी बनाकर रखनी चाहिए। शेर-बाघ जंगल का राजा होता है। जिस दिन यह खत्म हो गए ताे वन-जंगल कुछ बच पाना संभव नहीं होगा। अमानगढ़ वन रेंज में जंगल सफारी से ईको टूरिज्म को मिला बढ़ावा मिला है। चार हजार से ज्यादा पर्यटक भ्रमण कर चुके है।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन विभाग की ओर से आयोजित गोष्ठी में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि बाघ का संरक्षण बहुत जरूरी है। अगर कोई जंगल सफारी पर जाता है और उसे बाघ नजर न आए तो कहता है कि जाना बेकार हो गया है। पूरी दुनिया में जितने बाघ हैं, उसके 75 प्रतिशत हिंदुस्तान में पाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश में भी 175 बाघ थे। आज इनकी संख्या 222 हो गई है, जो गौरव की बात है।
गुलदारों के हमलों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि इसके लिए प्लान तैयार किया जा रहा है। वन्य क्षेत्रों के चारों तरफ सोलर पैनल के डीसी तार खिंचवाए जाएंगे। ताकि वन्य जीव हल्का करंट लगने से वन क्षेत्र में ही लौट जाए। हमें वन मित्रों की संख्या और बढ़ानी होगी। गन्ने के खेतों में बाघ बहुत रहने लगे हैं। इसलिए लोगों को चाहिए कि अकेले खेतों पर न जाएं।
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राज्य मंत्री केपी मलिक ने भी वन्य जीव संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर वन विभाग ने प्रदर्शनी लगाकर लोगों को गुलदार, बाघ और अन्य वन्य जीवों की जानकारी दी। मानव-वन्य जीव संघर्ष रोकने में सराहनीय योगदान देने वालों को सम्मानित भी किया गया। संचालन डाॅ. अपूर्वा सिंह ने किया। इससे पहले दोनों वन मंत्रियों ने केएम कॉलेज के मैदान में पौधरोपण किया।
ये अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुधीर कुमार शर्मा, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर ललित कुमार वर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन निगम सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव संजय श्रीवास्तव, डीएफओ बिजनौर अरुण कुमार, एसडीओ बिजनौर ज्ञान सिंह,धामपुर रेंजर गोविंद राम गंगवार, रेंजर अमानगढ़ खुशबू उपाध्याय, महेश गौतम, भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह बॉबी आदि मौजूद रहे।
वन्य जीवों के हमले से बचने के सात सूत्र
अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीवों के हमले से बचने के सात सूत्र हैं। भूलकर भी खुले में शौच न जाए, निरंतर निगरानी रखें, नशे में है तो घर के अंदर रहें। वन्यजीवों से दूरी बनाकर जिंदगी बचाएं। बच्चे आपके धरोहर हैं, उन्हें सुरक्षित रखें। गन्ने के खेत हिंसक जीवों के आश्रय होते है। शोरगुल मचाते रहे। हिंसक जानवरों के छिपकर हमले का रखें ध्यान।
क्षेत्रीय जनप्रतिनधियों को न बुलाने से कार्यकर्ता मायूस
वन विभाग की ओर से कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, संगठन कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है। विधायक अशोक राणा का कहना है कि उन्हें वन विभाग की ओर से कोई निमंत्रण नहीं मिला, जबकि जिले में सीएम, पीएम का कार्यक्रम भी होता है। प्रशासन की ओर से लिखित में निमंत्रण आता है। उधर, डीएफओ अरुण कुमार सिंह का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि को अलग से कोई सूचना नहीं दी गई। प्रोटाेकाल के तहत सभी अवगत कराया गया है।
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अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस पर वन विभाग की ओर से आयोजित गोष्ठी में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि बाघ का संरक्षण बहुत जरूरी है। अगर कोई जंगल सफारी पर जाता है और उसे बाघ नजर न आए तो कहता है कि जाना बेकार हो गया है। पूरी दुनिया में जितने बाघ हैं, उसके 75 प्रतिशत हिंदुस्तान में पाए जाते हैं। उत्तर प्रदेश में भी 175 बाघ थे। आज इनकी संख्या 222 हो गई है, जो गौरव की बात है।
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गुलदारों के हमलों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कि इसके लिए प्लान तैयार किया जा रहा है। वन्य क्षेत्रों के चारों तरफ सोलर पैनल के डीसी तार खिंचवाए जाएंगे। ताकि वन्य जीव हल्का करंट लगने से वन क्षेत्र में ही लौट जाए। हमें वन मित्रों की संख्या और बढ़ानी होगी। गन्ने के खेतों में बाघ बहुत रहने लगे हैं। इसलिए लोगों को चाहिए कि अकेले खेतों पर न जाएं।
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राज्य मंत्री केपी मलिक ने भी वन्य जीव संरक्षण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर वन विभाग ने प्रदर्शनी लगाकर लोगों को गुलदार, बाघ और अन्य वन्य जीवों की जानकारी दी। मानव-वन्य जीव संघर्ष रोकने में सराहनीय योगदान देने वालों को सम्मानित भी किया गया। संचालन डाॅ. अपूर्वा सिंह ने किया। इससे पहले दोनों वन मंत्रियों ने केएम कॉलेज के मैदान में पौधरोपण किया।
ये अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुधीर कुमार शर्मा, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर ललित कुमार वर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन निगम सुनील चौधरी, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव संजय श्रीवास्तव, डीएफओ बिजनौर अरुण कुमार, एसडीओ बिजनौर ज्ञान सिंह,धामपुर रेंजर गोविंद राम गंगवार, रेंजर अमानगढ़ खुशबू उपाध्याय, महेश गौतम, भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह बॉबी आदि मौजूद रहे।
वन्य जीवों के हमले से बचने के सात सूत्र
अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीवों के हमले से बचने के सात सूत्र हैं। भूलकर भी खुले में शौच न जाए, निरंतर निगरानी रखें, नशे में है तो घर के अंदर रहें। वन्यजीवों से दूरी बनाकर जिंदगी बचाएं। बच्चे आपके धरोहर हैं, उन्हें सुरक्षित रखें। गन्ने के खेत हिंसक जीवों के आश्रय होते है। शोरगुल मचाते रहे। हिंसक जानवरों के छिपकर हमले का रखें ध्यान।
क्षेत्रीय जनप्रतिनधियों को न बुलाने से कार्यकर्ता मायूस
वन विभाग की ओर से कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, संगठन कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई है। विधायक अशोक राणा का कहना है कि उन्हें वन विभाग की ओर से कोई निमंत्रण नहीं मिला, जबकि जिले में सीएम, पीएम का कार्यक्रम भी होता है। प्रशासन की ओर से लिखित में निमंत्रण आता है। उधर, डीएफओ अरुण कुमार सिंह का कहना है कि किसी भी जनप्रतिनिधि को अलग से कोई सूचना नहीं दी गई। प्रोटाेकाल के तहत सभी अवगत कराया गया है।