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कोरोना काल में घट गया कांवड़ का काम

Sat, 06 Mar 2021 11:55 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Mar 2021 11:55 PM IST
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During the Corona period, the work of Kanvad decreased
कोरोना काल में घट गया कांवड़ का काम
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धामपुर। महाशिरात्रि पर नगर का एक मुस्लिम परिवार चार पीढ़ियों से लकड़ी, रस्सी आदि से कांवड़ तैयार कर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम करता आ रहा है। शहर ही नहीं आस-पास के अनेक गांवों से भोले के भक्त लकड़ी-बांस से बनी इन कांवड़ों की खरीदारी करने आते हैं और हरिद्वार जाकर अपने कंधों पर गंगा जलभरकर शिवालयों में पहुंच जलाभिषेक करते हैं। हालांकि परिवार के सदस्यों का कहना है कि कोरोनाकाल के चलते इस बार धंधा मंदा चल रहा है। 30-35 प्रतिशत श्रद्धालुओं ने कांवड़ नहीं खरीदी है जबकि सामान्य सालों में हजारों कांवड़ की बिक्री होती है।
मुख्य डाकघर निवासी नईम अहमद ने बताया कि वे तीन भाई है और सभी हिंदू त्योहारों में मन से काम करते है। सलीम अहमद, मुस्तकीम अहमद बताते हैं कि पिता अब्दुजल हमीद और दादा परदादा के समय से ही चटाई, टोकरी आदि बनाने का काम करते चले आ रहे हैं। यह उनका पुश्तैनी काम है। कांवड़ बनाने के इस काम को चौथी पीढ़ी अंजाम दे रही है। इसी से परिवार की गुजर-बसर चल रही है। भोले की कृपा से परिवार का पालन पोषण चल रहा है। हम लोग बाजार से बांस, रस्सी और कपड़ा खरीद कर लाते हैं। त्योहारी सामान बनाकर बेचते हैं। एक कांवड़ बनाने में करीब 150 रुपए तक लागत आती है। खर्चा निकालकर 250 रुपए तक बिक्री हो जाती है।
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सलीम अहमद बताते हैं कि कोरोना ने उनके कारोबार को भी बुरी तरह से प्रभावित किया है। वह बताते हैं कि कोरोना काल में कारोबार मात्र 30 से 35 प्रतिशत रह गया है।
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