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धान और उड़द का बीमा कराने वाले किसानों के नुकसान की होगी भरपाई
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फसलों के नुकसान की होगी भरपाई
बिजनौर। बारिश से जिले में भले ही काफी नुकसान होने की बात कही जा रही है, लेकिन बीमा कंपनी की ओर से करीब सवा तीन हजार किसान ही नुकसान पर मुआवजा लेने के हकदार हैं। जिले में तीन हजार 261 किसानों ने ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ की फसलों का बीमा कराया था। बीमा कंपनी की ओर से अब बीमा कराने वाले किसानों का सर्वे शुरू करा दिया गया है। सर्वे के आधार पर ही किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
फसलों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल योजना संचालित की जा रही है। पहले जो भी किसान केेसीसी पर लोन लेता था, उसे बीमा कंपनी का प्रीमियम भरना ही होता था। किसानों ने इसका विरोध किया और किसान संगठनों ने आंदोलन। इस पर दो साल पहले सरकार ने फसल बीमा योजना से गन्ने को बाहर कर दिया था और योजना को स्वैच्छिक भी कर दिया था। यानी अगर किसी किसान को फसल का बीमा कराना होता था तो वह ही प्रीमियम कटवाता था। जिले में इफ्को टोकियो कंपनी द्वारा योजना संचालित की जा रही है। स्वैच्छिक होने के बाद से योजना में किसानों की दिलचस्पी बहुत कम हुई है। जिले में ढाई लाख से अधिक केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) बने हुए हैं, लेकिन खरीफ की फसल का बीमा केवल तीन हजार 261 किसानों ने ही कराया था। इन किसानों ने केसीसी पर लोन ली गई कुल राशि का दो प्रतिशत प्रीमियम के रूप में कटवाया था। बारिश से उड़द और धान की फसलों को नुकसान हुआ है। जिन लोगों ने उड़द व धान का बीमा कराया था, अगर उनके खेत में नुकसान हुआ है तो कंपनी द्वारा नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे कराने के बाद किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
भेज दी गई है टीम
बीमा कंपनी इफ्को टोकियो के जिला प्रबंधक विक्रम सिंह के अनुसार कंपनी की टीम सर्वे करने के लिए भेज दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार पात्र किसानों को कंपनी की ओर से मुआवजा दिया जाएगा।
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बिजनौर। बारिश से जिले में भले ही काफी नुकसान होने की बात कही जा रही है, लेकिन बीमा कंपनी की ओर से करीब सवा तीन हजार किसान ही नुकसान पर मुआवजा लेने के हकदार हैं। जिले में तीन हजार 261 किसानों ने ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ की फसलों का बीमा कराया था। बीमा कंपनी की ओर से अब बीमा कराने वाले किसानों का सर्वे शुरू करा दिया गया है। सर्वे के आधार पर ही किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
फसलों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल योजना संचालित की जा रही है। पहले जो भी किसान केेसीसी पर लोन लेता था, उसे बीमा कंपनी का प्रीमियम भरना ही होता था। किसानों ने इसका विरोध किया और किसान संगठनों ने आंदोलन। इस पर दो साल पहले सरकार ने फसल बीमा योजना से गन्ने को बाहर कर दिया था और योजना को स्वैच्छिक भी कर दिया था। यानी अगर किसी किसान को फसल का बीमा कराना होता था तो वह ही प्रीमियम कटवाता था। जिले में इफ्को टोकियो कंपनी द्वारा योजना संचालित की जा रही है। स्वैच्छिक होने के बाद से योजना में किसानों की दिलचस्पी बहुत कम हुई है। जिले में ढाई लाख से अधिक केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) बने हुए हैं, लेकिन खरीफ की फसल का बीमा केवल तीन हजार 261 किसानों ने ही कराया था। इन किसानों ने केसीसी पर लोन ली गई कुल राशि का दो प्रतिशत प्रीमियम के रूप में कटवाया था। बारिश से उड़द और धान की फसलों को नुकसान हुआ है। जिन लोगों ने उड़द व धान का बीमा कराया था, अगर उनके खेत में नुकसान हुआ है तो कंपनी द्वारा नुकसान का सर्वे कराया जाएगा। सर्वे कराने के बाद किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।
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भेज दी गई है टीम
बीमा कंपनी इफ्को टोकियो के जिला प्रबंधक विक्रम सिंह के अनुसार कंपनी की टीम सर्वे करने के लिए भेज दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार पात्र किसानों को कंपनी की ओर से मुआवजा दिया जाएगा।
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