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Bijnor News: गंगा में चार किलोमीटर तक बही नाव
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बिजनौर में गंगा बैराज के तटबंध के पास ड्रेजिंग मशीन को खींचकर ले जाती मोटर वोट। स्रोत वीडियो ग्
बिजनौर। बिजनौर बैराज तटबंध के पास गंगा की धारा का रुख बदलने का प्रयास हो रहा है। इसके लिए ड्रेजिंग मशीन को नाव से गंगा के दूसरे छोर पर ले जाया जाने लगा। मगर यह नाव तेज धारा को झेल नहीं सकी और चार किलोमीटर तक नीचे की ओर से बहती रही। ऐसे में नाव और मोटरबोट में सवार 35 बंगाली समाज के लोगों के सांसें अटक गईं। हालांकि किसी तरह से नाव को टापू पर लगाया गया।
बैराज के तटबंध पर तेजी से कटान हो रहा है। इस कटान को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। तटबंध की मरम्मत करने के साथ ही गंगा की धारा का रुख बदलने के लिए तीन दिन पहले ड्रेजिंग मशीन को मंगाया था। इस मशीन को गंगा के पार ले जाने के लिए बृहस्पतिवार को एक नाव में रखा गया। यह मशीन काफी वजनी है, ऐसे में उक्त नाव को खींचने के लिए दो मोटरबोट भी जोड़ी गई। जिनमें 35 लोग सवार हो गए। इन लोगों को इस ड्रेजिंग मशीन के जरिए गंगा में जमा सिल्ट को हटाना है। जिससे धारा को बहने के लिए दूसरे तट के समीप जगह मिल जाए।
सुबह नौ बजे ड्रेजिंग मशीन को लेकर 35 बंगाली समाज के लोग निकले तो यह नाव तेज धारा को नहीं झेल सकी और पानी के साथ बहने लगी। जिस जगह से नाव शुरू हुई थी, उससे नीचे की ओर करीब चार किलोमीटर तक नाव बहती रही। इस दौरान नाव पर सवार लोग ही नहीं बल्कि तटबंध पर खड़े लोगों की सांसें अटकी रहीं। खैर बंगाली समाज के लोगों ने किसी तरह से मशक्कत करते हुए नाव को पार लगाकर टापू पर रोक लिया।
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घासीवाला के प्रधान के पति सपन राय ने बताया कि तीन दिन पहले ड्रेजिंग मशीन मंगा ली गई थी। अब बृहस्पतिवार की सुबह मशीन को नाव से ले जाया रहा था। उधर, उस पार गए 35 लोगों को सुबह से खाना भी नहीं मिला है। न लाइट की व्यवस्था हो सकी है।
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बैराज के तटबंध पर तेजी से कटान हो रहा है। इस कटान को रोकने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। तटबंध की मरम्मत करने के साथ ही गंगा की धारा का रुख बदलने के लिए तीन दिन पहले ड्रेजिंग मशीन को मंगाया था। इस मशीन को गंगा के पार ले जाने के लिए बृहस्पतिवार को एक नाव में रखा गया। यह मशीन काफी वजनी है, ऐसे में उक्त नाव को खींचने के लिए दो मोटरबोट भी जोड़ी गई। जिनमें 35 लोग सवार हो गए। इन लोगों को इस ड्रेजिंग मशीन के जरिए गंगा में जमा सिल्ट को हटाना है। जिससे धारा को बहने के लिए दूसरे तट के समीप जगह मिल जाए।
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सुबह नौ बजे ड्रेजिंग मशीन को लेकर 35 बंगाली समाज के लोग निकले तो यह नाव तेज धारा को नहीं झेल सकी और पानी के साथ बहने लगी। जिस जगह से नाव शुरू हुई थी, उससे नीचे की ओर करीब चार किलोमीटर तक नाव बहती रही। इस दौरान नाव पर सवार लोग ही नहीं बल्कि तटबंध पर खड़े लोगों की सांसें अटकी रहीं। खैर बंगाली समाज के लोगों ने किसी तरह से मशक्कत करते हुए नाव को पार लगाकर टापू पर रोक लिया।
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घासीवाला के प्रधान के पति सपन राय ने बताया कि तीन दिन पहले ड्रेजिंग मशीन मंगा ली गई थी। अब बृहस्पतिवार की सुबह मशीन को नाव से ले जाया रहा था। उधर, उस पार गए 35 लोगों को सुबह से खाना भी नहीं मिला है। न लाइट की व्यवस्था हो सकी है।