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नूरपुर में नलकूप के झेरे में बिग कैट की गुर्राहट से तेंदुए की दहशत
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Thu, 13 Oct 2016 04:29 PM IST
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नलकूप के झेरे से निकालने के बाद पिंजरे में कैद जंगली बिल्ली
- फोटो : अमर उजाला
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नूरपुर में गांव फतेहाबाद के जंगल में मंगलवार रात बने एक नलकूप के झेरे में जंगली बिल्ली गिर गई। झेरे में उसे देखकर नलकूप चलाने पहुंचे किसान के होश उड़ गए। वहीं गांव में तेंदुए के आने की अफवाह और उसकी गुर्राहट से लोगाें में दहशत फैल गई। कुछ युवकों ने रस्सी का फंदा बनाकर उसकी कमर में डालकर बाहर निकालने का प्रयास किया। शाम करीब चार बजे वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। टीम झेरे के पास पिंजरा लगाकर रस्सी के सहारे उसे बाहर निकालकर पिंजरे में बंद कर ले गई।
गांव फतेहाबाद निवासी हरेंद्र सिंह का नलकूप पुरैना मार्ग पर है। मंगलवार रात किसी समय एक जंगली बिल्ली नलकूप के करीब 25 फीट गहरे झेरे में गिर गई। बुधवार सुबह हरेंद्र सिंह नलकूप चलाने के लिए खेत पर पहुंचा तो झेरे से गुर्राहट की आवाज सुनकर वह चौंक गया। झेरे में देखने पर उसमें पड़ी बिग कैट देखकर उसके होश उड़ गए। हरेंद्र ने झेरे में तेंदुए के गिरने की सूचना पूरे गांव को बताई। गांव में तेंदुआ आने से दहशत फैल गई। वहां लोगों की भीड़ लग गई। भीड़ में मौजूद कुछ साहसी युवकों ने एक रस्सी का फंदा बनाकर जैसे-तैसे झेरे में शांत बैठे जंगली बिल्ली की कमर में रस्सी डालकर उसे बाहर निकालने का प्रयास करने लगे। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से युवकों को उसे बाहर निकालने से रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने वन विभाग को मामले की जानकारी दी। शाम करीब तीन बजे वन विभाग के एसडीओ अशोक शर्मा, धामपुर रेंजर प्रताप सिंह सैनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बिग कैट को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरू कर दी। शाम चार बजे कार्बेट टाइगर रिजर्व से रेंजर एमएस मावरी पशु चिकित्सक दुष्यंत शर्मा के साथ मौके पर पहुंचे और उसे ट्रैंकुलाइज करने की तैयारी शुरू की गई। बाद में अमानगढ़ रेंज से पिंजरा लेकर पहुंची वन विभाग की टीम ने झेरे के पास पिंजरा व जाल लगाकर जंगली बिल्ली की कमर में पड़ी रस्सी के सहारे उसे बाहर खींच लिया और पिंजरे में बंद कर लिया। मौके पर मौजूद वन विभाग के एसडीओ अशोक शर्मा ने बताया कि झेरे में गिरा तेंदुआ नहीं बल्कि बिग कैट है। उसे अमानगढ़ रेंज में छोड़ दिया जाएगा।
गौरतलब है कि नूरपुर क्षेत्र में कई गांवों में तेंदुए देखे गए हैं। शिवाला कलां थाना क्षेत्र के गांव धारुपुर में एक वर्ष पूर्व तेंदुए ने दो किसानों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था।
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वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए कई दिन तक प्रयास भी किया था, लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सका था। करीब छह माह पूर्व क्षेत्र के गांव आलमपुर एड़वा में तेंदुए के दो शावक मिले थे, जिन्हें बाद में वन विभाग की टीम ने पकड़कर अमानगढ़ रेंज में छुड़वाया था। इसके अलावा क्षेत्र के गांव रहटी जागीर, सेह, धूंधली तबीबपुर में भी तेंदुआ देखा गया है।
हिंदी में नाम नहीं मालूम ः वन विभाग अधिकारी
गांव फतेहाबाद में झेर में गिरे बिग कैट की प्रजाति का नाम हिंदी में वन अधिकारी भी नहीं बता सके। जब गांव वालों ने उनसे पूछा कि क्या यह तेंदुआ है तो किसी ने कुछ नहीं बताया। वन के एसडीओ अशोक कुमार ने इतना ही बताया कि यह कैट लैपर्ड है। इसको हिंदी में क्या कहते हैं उनको नहीं पता। हालांकि उसे निकालने के लिए वन विभाग की टीम करीब नौ घंटे के बाद मौके पर पहुंची। वन विभाग की टीम के देर से पहुंचने पर ग्रामीणों में काफी गुस्सा दिखाई दिया। झेरे में जानवर के गिरने का पता सुबह सात बजे ही चल गया था, लेकिन सूचना देने के बाद करीब आठ घंटे के बाद चार बजे पिंजरा व ट्रैंकुलाइजर टीम मौके पर पहुंची और उसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु किया गया। साढ़े चार बजे झेरे में गिरे जंगली बिल्ली को निकाला गया।
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गांव फतेहाबाद निवासी हरेंद्र सिंह का नलकूप पुरैना मार्ग पर है। मंगलवार रात किसी समय एक जंगली बिल्ली नलकूप के करीब 25 फीट गहरे झेरे में गिर गई। बुधवार सुबह हरेंद्र सिंह नलकूप चलाने के लिए खेत पर पहुंचा तो झेरे से गुर्राहट की आवाज सुनकर वह चौंक गया। झेरे में देखने पर उसमें पड़ी बिग कैट देखकर उसके होश उड़ गए। हरेंद्र ने झेरे में तेंदुए के गिरने की सूचना पूरे गांव को बताई। गांव में तेंदुआ आने से दहशत फैल गई। वहां लोगों की भीड़ लग गई। भीड़ में मौजूद कुछ साहसी युवकों ने एक रस्सी का फंदा बनाकर जैसे-तैसे झेरे में शांत बैठे जंगली बिल्ली की कमर में रस्सी डालकर उसे बाहर निकालने का प्रयास करने लगे। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने सुरक्षा के लिहाज से युवकों को उसे बाहर निकालने से रोक दिया। इसके बाद पुलिस ने वन विभाग को मामले की जानकारी दी। शाम करीब तीन बजे वन विभाग के एसडीओ अशोक शर्मा, धामपुर रेंजर प्रताप सिंह सैनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बिग कैट को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरू कर दी। शाम चार बजे कार्बेट टाइगर रिजर्व से रेंजर एमएस मावरी पशु चिकित्सक दुष्यंत शर्मा के साथ मौके पर पहुंचे और उसे ट्रैंकुलाइज करने की तैयारी शुरू की गई। बाद में अमानगढ़ रेंज से पिंजरा लेकर पहुंची वन विभाग की टीम ने झेरे के पास पिंजरा व जाल लगाकर जंगली बिल्ली की कमर में पड़ी रस्सी के सहारे उसे बाहर खींच लिया और पिंजरे में बंद कर लिया। मौके पर मौजूद वन विभाग के एसडीओ अशोक शर्मा ने बताया कि झेरे में गिरा तेंदुआ नहीं बल्कि बिग कैट है। उसे अमानगढ़ रेंज में छोड़ दिया जाएगा।
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गौरतलब है कि नूरपुर क्षेत्र में कई गांवों में तेंदुए देखे गए हैं। शिवाला कलां थाना क्षेत्र के गांव धारुपुर में एक वर्ष पूर्व तेंदुए ने दो किसानों पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था।
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वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए कई दिन तक प्रयास भी किया था, लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सका था। करीब छह माह पूर्व क्षेत्र के गांव आलमपुर एड़वा में तेंदुए के दो शावक मिले थे, जिन्हें बाद में वन विभाग की टीम ने पकड़कर अमानगढ़ रेंज में छुड़वाया था। इसके अलावा क्षेत्र के गांव रहटी जागीर, सेह, धूंधली तबीबपुर में भी तेंदुआ देखा गया है।
हिंदी में नाम नहीं मालूम ः वन विभाग अधिकारी
गांव फतेहाबाद में झेर में गिरे बिग कैट की प्रजाति का नाम हिंदी में वन अधिकारी भी नहीं बता सके। जब गांव वालों ने उनसे पूछा कि क्या यह तेंदुआ है तो किसी ने कुछ नहीं बताया। वन के एसडीओ अशोक कुमार ने इतना ही बताया कि यह कैट लैपर्ड है। इसको हिंदी में क्या कहते हैं उनको नहीं पता। हालांकि उसे निकालने के लिए वन विभाग की टीम करीब नौ घंटे के बाद मौके पर पहुंची। वन विभाग की टीम के देर से पहुंचने पर ग्रामीणों में काफी गुस्सा दिखाई दिया। झेरे में जानवर के गिरने का पता सुबह सात बजे ही चल गया था, लेकिन सूचना देने के बाद करीब आठ घंटे के बाद चार बजे पिंजरा व ट्रैंकुलाइजर टीम मौके पर पहुंची और उसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरु किया गया। साढ़े चार बजे झेरे में गिरे जंगली बिल्ली को निकाला गया।