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Bijnor News: नगीना - चार सौ साल पुराना है प्राचीन सिद्धपीठ मां काली मंदिर
Sun, 26 Mar 2023 11:42 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 26 Mar 2023 11:42 PM IST
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- हरिद्वार में आए संतों ने कराई थी मूर्तियों की स्थापना
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। नगीना के प्राचीन सिद्धपीठ मां काली मंदिर का इतिहास चार सौ साल पुराना है। उस दौर में हरिद्वार में आए संतों ने यहां मंदिर की स्थापना की थी। नवरात्र के व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए मां काली व मां दुर्गा का मंदिर आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नत मांगता है माता उसे अवश्य पूरा करती है।
धामपुर रोड स्थित रामलीला बाग का मां काली मां दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्राचीन केंद्र है। लगभग 400 वर्ष प्राचीन मंदिर में मां दुर्गा मां काली की प्रतिमाओं में विशेष तेज़ देखा जा सकता है। प्राचीन काल से यह सिद्धपीठ मां काली के मंदिर के नाम से प्रख्यात रही है, लेकिन मंदिर की प्रबंधन समिति ने धीरे-धीरे इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर इसे भव्य मंदिर का रूप दिया है। माता के सभी नौ स्वरूपों की प्रतिमाओं की स्थापना भी करा दी। नवरात्र के दिनों में व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह पांच बजे से ही पूजा अर्चना करने के लिए तथा शाम को आरती में हिस्सा लेने के लिए जाते हैं। कहा जाता है कि लगभग 400 वर्ष पूर्व यहां घनघोर जंगल हुआ करता था, तब यहां रामलीला बाग में हरिद्वार से आए साधुओं ने मां दुर्गा एवं काली की मूर्तियों की स्थापना की थी।
मन्नत पूरी होने पर लोग यहां छोड़ते हैं नंदी
मनोकामना पूरी होने पर लोग यहां नवरात्र में मन्नत स्वरूप नंदी भी छोड़ते है। मन्दिर कमेटी के अध्यक्ष साहू सलिल अग्रवाल व प्रबंधक मुकेश अग्रवाल उर्फ आले बताते हैं कि इस मां काली मां दुर्गा के मंदिर की बहुत मान्यता है। हाल ही में मंदिर के जीर्णोद्धार के निकली ईंटें इस मंदिर के ढाई सौ से तीन सौ वर्ष पुराने होने का सबूत दे रही थी। अजीत अग्रवाल बताते हैं कि वह पिछले 40 वर्षों से लगातार दोनों नवरात्रों के मौके पर देवी की पूजा अर्चना करने जाते हैं। भक्तों द्वारा सच्चे मन से जो मांगा जाता है वह मुराद अवश्य पूरी होती है। पंडित सचिन शर्मा का कहना है कि वह मां दुर्गा मां काली के मंदिर में पिछले 20 वर्षों से नवरात्र के दिनों में प्रतिदिन जाते हैं।
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नगीना। नगीना के प्राचीन सिद्धपीठ मां काली मंदिर का इतिहास चार सौ साल पुराना है। उस दौर में हरिद्वार में आए संतों ने यहां मंदिर की स्थापना की थी। नवरात्र के व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए मां काली व मां दुर्गा का मंदिर आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नत मांगता है माता उसे अवश्य पूरा करती है।
धामपुर रोड स्थित रामलीला बाग का मां काली मां दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्राचीन केंद्र है। लगभग 400 वर्ष प्राचीन मंदिर में मां दुर्गा मां काली की प्रतिमाओं में विशेष तेज़ देखा जा सकता है। प्राचीन काल से यह सिद्धपीठ मां काली के मंदिर के नाम से प्रख्यात रही है, लेकिन मंदिर की प्रबंधन समिति ने धीरे-धीरे इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराकर इसे भव्य मंदिर का रूप दिया है। माता के सभी नौ स्वरूपों की प्रतिमाओं की स्थापना भी करा दी। नवरात्र के दिनों में व्रत रखने वाले श्रद्धालु सुबह पांच बजे से ही पूजा अर्चना करने के लिए तथा शाम को आरती में हिस्सा लेने के लिए जाते हैं। कहा जाता है कि लगभग 400 वर्ष पूर्व यहां घनघोर जंगल हुआ करता था, तब यहां रामलीला बाग में हरिद्वार से आए साधुओं ने मां दुर्गा एवं काली की मूर्तियों की स्थापना की थी।
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मन्नत पूरी होने पर लोग यहां छोड़ते हैं नंदी
मनोकामना पूरी होने पर लोग यहां नवरात्र में मन्नत स्वरूप नंदी भी छोड़ते है। मन्दिर कमेटी के अध्यक्ष साहू सलिल अग्रवाल व प्रबंधक मुकेश अग्रवाल उर्फ आले बताते हैं कि इस मां काली मां दुर्गा के मंदिर की बहुत मान्यता है। हाल ही में मंदिर के जीर्णोद्धार के निकली ईंटें इस मंदिर के ढाई सौ से तीन सौ वर्ष पुराने होने का सबूत दे रही थी। अजीत अग्रवाल बताते हैं कि वह पिछले 40 वर्षों से लगातार दोनों नवरात्रों के मौके पर देवी की पूजा अर्चना करने जाते हैं। भक्तों द्वारा सच्चे मन से जो मांगा जाता है वह मुराद अवश्य पूरी होती है। पंडित सचिन शर्मा का कहना है कि वह मां दुर्गा मां काली के मंदिर में पिछले 20 वर्षों से नवरात्र के दिनों में प्रतिदिन जाते हैं।
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