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गंग नहर बिजनौर, मुख्यमंत्री के दखल के बाद मिलेगी जमीन

Wed, 25 Nov 2020 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 25 Nov 2020 11:42 PM IST
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After the intervention of CM, the work of Central Ganga Canal will start
बिजनौर में बैराज से बनाई जा रही मध्यगंगा नहर। - फोटो : BIJNOR
सीएम के दखल के बाद शुरू होगा मध्य गंगा नहर का काम
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अजीत चौधरी
बिजनौर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दखल के बाद 12 साल से अधर में लटकी मध्य गंगा नहर परियोजना के पूरा होने की आस जगी है। सिंचाई विभाग और वन विभाग के बीच एक हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद था, जिसकी वजह से 150 मीटर लंबाई में नहर का निर्माण रुका हुआ था। सिंचाई विभाग ने जमीन के लिए वन विभाग को प्रस्ताव भी भेज दिया है। शासन के निर्णय के बाद जमीन सिंचाई विभाग को दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंडल स्तर पर रुके हुए बड़े निर्माण कार्यों की समीक्षा की थी। तब मध्य गंगा परियोजना द्वितीय चरण का मामला उनकी जानकारी में आया था। मुख्यमंत्री ने इसे जल्दी पूरा कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद से वन विभाग और सिंचाई विभाग जमीन के मालिकाना हक के लिए सजग हो गए थे। सिंचाई विभाग के एक्सईएन पीपी गौतम ने इस संबंध में डीएफओ डा.एम सेम्मारन को पत्र लिखकर जमीन सिंचाई विभाग को स्थानांतरित करने को कहा है। अब शासन स्तर पर यह मामला सुलझाया जाएगा। इस नहर परियोजना के शुरू होने से बिजनौर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, बदायूं की हजारों हेक्टेयर फसलों की सिंचाई होगी।
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यह है विवाद
इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर वन विभाग और गांव वालों के बीच सालों से विवाद चल रहा है और नहर का विवाद 2016 में वन विभाग के हक में फैसला होने से पुराना है। जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दो दस्तावेज होते हैं। गजट और नक्शा। सिंचाई विभाग के अफसरों के अनुसार वन विभाग के दोनों दस्तावेज राज्यपाल से अनुमोदित होते हैं। गजट में रामपुर ठकरा की 254 बीघा जमीन में से 5.2 हेक्टेअर जमीन किसानों के नाम दर्ज थी। जबकि मानचित्र में पूरी जमीन को वन विभाग की ही दर्शाया गया था। वन विभाग के गजट के अनुसार जमीन का सीमांकन नहीं किया गया था। सिंचाई विभाग ने जमीन को किसानों की मानते हुए उसे खरीद किसानों से खरीदा। तब जमीन पर कब्जा भी किसानों का ही था। बाद में डीएम के निर्देश पर हुई जांच में सही हुए मानचित्र से पता चला कि जमीन वन विभाग के नाम ही है। इस पर वन विभाग ने आपत्ति जताते हुए नहर का काम रुकवा दिया था। वन विभाग की एक हेक्टेअर जमीन पर नहर बन चुकी थी। नहर की जितनी जमीन का ये विवादित टुकड़ा वह 44 किलोमीटर लंबी नहर में मात्र 150 मीटर है।
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बन रही पूरी पक्की नहर
परियोजना में बनने वाली मुख्य नहर 44 किलोमीटर लंबी है। यह नहर पूरी तरह पक्की बनाई गई है। जिले में पानी की कोई कमी नहीं है। इसलिए एक एक बूंद पानी दूसरे जिलों में पहुंचाने के लिए नहर पक्की बनी है। अमरोहा, बदायूं में कहीं कहीं भूगर्भ जल का स्तर 200 फीट तक पहुंच गया है। भूगर्भ को रिचार्ज करने व फसलों की सिंचाई के लिए यह नहर बनाई गई है।

जल्दी मंजूर होने की उम्मीद
सिंचाई विभाग के जेई कविराज सिंह का कहना है कि वन विभाग को मध्य गंगा नहर परियोजना से जुड़ी जमीन को स्थानांतरित करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। जल्दी ही इसके मंजूर होने की उम्मीद है।
अफसरों को कराया अवगत
डीएफओ डा.एम सेम्मारन का कहना है कि पूरे मामले से आला अफसरों को अवगत करा दिया गया है। अफसरों के निर्देश पर ही आगे का काम किया जाएगा।
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