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भाजपा नेताओं की आपसी गुटबंदी के शिकार हुए दो निरीक्षक, दोनों का लखनऊ जोन के लिए स्थानांरण
Updated Sun, 24 Dec 2017 12:21 AM IST
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अफजलगढ़ । आखिरकार भाजपा नेताओं की गुटबाजी के खामियाजा अफजलगढ व बिजनौर के प्रभारी निरीक्षकों को भुगतना पड़ा। जिसके चलते शासन ने दो निरीक्षक का स्थानांतरण लखनऊ जोन के लिए कर दिया गया है।
करीब चार माह पहले शहर कोतवाली बिजनौर के परिसर में एक किसान की मौत पर हुए बवाल के चलते भाजपाई दो गुटों में बंट गए थे। इस मामले को लेकर दोनों गुटों के बीच खींचतान तथा रस्साकस्सी चलती रही। एक गुट के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के संरक्षण के चलते तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक प्रेमवीर राणा द्वारा नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान तथा उनके कई रिश्तेदारों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। इस मुद्दे को लेकर विधायक समर्थकों द्वारा मुकदमा वापस लेने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों को शांत करने के लिए रातोंरात प्रेमवीर राणा को बिजनौर से हटाकर अफजलगढ़ तथा फतेह सिंह को अफजलगढ़ से बिजनौर स्थानांतरित कर दिया गया था। इस मामले की जांच प्रभारी निरीक्षक फतेह सिंह द्वारा शुरू की गई। प्रारंभिक जांच के दौरान विधायक तथा उनके नामजद रिश्तेदारों को प्रथम दृष्ट्या दोषी पाया गया। इसी के चलते विधायक व समर्थक इन दोनों प्रभारी निरीक्षकों के विरुद्ध लामबंद हो गए तथा दोनों को लखनऊ जोन स्थानांतरित कराने में कामयाब हो गए।
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करीब चार माह पहले शहर कोतवाली बिजनौर के परिसर में एक किसान की मौत पर हुए बवाल के चलते भाजपाई दो गुटों में बंट गए थे। इस मामले को लेकर दोनों गुटों के बीच खींचतान तथा रस्साकस्सी चलती रही। एक गुट के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के संरक्षण के चलते तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक प्रेमवीर राणा द्वारा नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान तथा उनके कई रिश्तेदारों के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। इस मुद्दे को लेकर विधायक समर्थकों द्वारा मुकदमा वापस लेने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। प्रशासन द्वारा आंदोलनकारियों को शांत करने के लिए रातोंरात प्रेमवीर राणा को बिजनौर से हटाकर अफजलगढ़ तथा फतेह सिंह को अफजलगढ़ से बिजनौर स्थानांतरित कर दिया गया था। इस मामले की जांच प्रभारी निरीक्षक फतेह सिंह द्वारा शुरू की गई। प्रारंभिक जांच के दौरान विधायक तथा उनके नामजद रिश्तेदारों को प्रथम दृष्ट्या दोषी पाया गया। इसी के चलते विधायक व समर्थक इन दोनों प्रभारी निरीक्षकों के विरुद्ध लामबंद हो गए तथा दोनों को लखनऊ जोन स्थानांतरित कराने में कामयाब हो गए।
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