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‘फोर बाई फोर विधि से करें गन्ने की बुवाई’
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‘फोर बाई फोर विधि से करें गन्ने की बुवाई’
नांगलसोती। किसान प्रतिनिधियों ने गन्ना किसानों को उत्तम किस्म के बीच के साथ फोर बाई फोर विधि से गन्ने की बुवाई करने, जैविक खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करने और सहफसली खेती करने की सलाह दी।
नांगलसोती क्षेत्र के गांव तिसोतरा में पूर्व प्रधान कुलवीर सिंह के आवास पर ओमपाल की अध्यक्षता में गन्ना किसानों की संगोष्ठी आयोजित हुई। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और स्थानीय गन्ना किसानों ने गन्ने की अच्छी पैदावार अपने-अपने अनुभव साझा किए। गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए महाराष्ट्र सरकार से सम्मानित हुए सुरेश कबाडे़ ने उत्तम किस्म के बीच के साथ फोर बाई फोर विधि से गन्ने की बुवाई करने, जैविक खाद का अधिक प्रयोग करने और कम से कम गन्ना फसल में पांच बार स्प्रे करने किसानों को सलाह दी। अंकुश, मुकेश कुमार, दत्तेलाड, अनमोल ने भी गन्ने की बुवाई के टिप्स देते हुए सहफसली खेती करने से किसानों को लाभ लेने की सलाह दी। कुलवीर सिंह के संचालन में आयोजित संगोष्ठी में शिशुपाल अहलावत, कामेंद्र सिंह, सत्यपाल सिंह, सतेंद्र सिंह, सत्यपाल सिंह, साधूराम, राकेश, विपिन आदि किसानों ने संगोष्ठी से पूर्व पुलवामा के शहीदों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। सुरेश कबाडे़ ने कहा कि फोर बाई फोर विधि में गन्ने की बुवाई के दौरान गुल से दूसरी गुल की दूरी 120 सेमी या चार फीट रखनी चाहिए। गन्ना बुवाई में दो आंख या तीन आंख के बीज का प्रयोग करने से फसल को लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि पहले गन्ने की बुवाई में गुल से गुल की दूरी 60 सेमी और बाद में 90 सेमी की परंपरा थी। जिससे किसान गुल के बीच की दूरी का फायदा नहीं उठाते थे। अब फोर बाई फोर विधि से गुलों के बीच दूरी अधिक होने से किसान उसमें आसानी से सहफसली खेती कर कई गुना लाभ ले सकते हैं।
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नांगलसोती। किसान प्रतिनिधियों ने गन्ना किसानों को उत्तम किस्म के बीच के साथ फोर बाई फोर विधि से गन्ने की बुवाई करने, जैविक खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करने और सहफसली खेती करने की सलाह दी।
नांगलसोती क्षेत्र के गांव तिसोतरा में पूर्व प्रधान कुलवीर सिंह के आवास पर ओमपाल की अध्यक्षता में गन्ना किसानों की संगोष्ठी आयोजित हुई। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और स्थानीय गन्ना किसानों ने गन्ने की अच्छी पैदावार अपने-अपने अनुभव साझा किए। गन्ने की अच्छी पैदावार के लिए महाराष्ट्र सरकार से सम्मानित हुए सुरेश कबाडे़ ने उत्तम किस्म के बीच के साथ फोर बाई फोर विधि से गन्ने की बुवाई करने, जैविक खाद का अधिक प्रयोग करने और कम से कम गन्ना फसल में पांच बार स्प्रे करने किसानों को सलाह दी। अंकुश, मुकेश कुमार, दत्तेलाड, अनमोल ने भी गन्ने की बुवाई के टिप्स देते हुए सहफसली खेती करने से किसानों को लाभ लेने की सलाह दी। कुलवीर सिंह के संचालन में आयोजित संगोष्ठी में शिशुपाल अहलावत, कामेंद्र सिंह, सत्यपाल सिंह, सतेंद्र सिंह, सत्यपाल सिंह, साधूराम, राकेश, विपिन आदि किसानों ने संगोष्ठी से पूर्व पुलवामा के शहीदों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। सुरेश कबाडे़ ने कहा कि फोर बाई फोर विधि में गन्ने की बुवाई के दौरान गुल से दूसरी गुल की दूरी 120 सेमी या चार फीट रखनी चाहिए। गन्ना बुवाई में दो आंख या तीन आंख के बीज का प्रयोग करने से फसल को लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि पहले गन्ने की बुवाई में गुल से गुल की दूरी 60 सेमी और बाद में 90 सेमी की परंपरा थी। जिससे किसान गुल के बीच की दूरी का फायदा नहीं उठाते थे। अब फोर बाई फोर विधि से गुलों के बीच दूरी अधिक होने से किसान उसमें आसानी से सहफसली खेती कर कई गुना लाभ ले सकते हैं।
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