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बैंक की स्वीकृति के बाद भी शासन से अटकी सोफ्ट लोन की फाइल
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बैंक की स्वीकृति के बाद अब शासन से अटकी सॉफ्ट लोन की फाइल
बिजनौर। किसानों को गन्ना भुगतान देने के लिए सॉफ्ट लोन की फाइल अब शासन स्तर पर अटक गई है। लोन के संबंध में बैंक की हरी झंडी मिलने के बाद भी शासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे किसानों का भुगतान भी अटक गया है। ग्रुप के डायरेक्टर डीएस बिंद्रा ने इस संबंध में गन्ना आयुक्त को पत्र लिखकर सॉफ्ट लोन दिलाने के लिए कहा है।
जिले की तीन चीनी मिलों ने अब तक पिछले पेराई सत्र का भुगतान नहीं किया है। भुगतान न मिलने से किसान आंदोलन कर रहे हैं। वेव ग्रुप की बिजनौर, धनौरा व बुलंदशहर चीनी मिल पर भी करोड़ों रुपया बकाया है। इनमें अकेले बिजनौर चीनी मिल पर ही करीब दस हजार किसानों का 22.63 करोड़ रुपये बकाया है। ग्रुप द्वारा सॉफ्ट लोन के लिए आवेदन किया गया था। ग्रुप को लोन देने के लिए उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड लखनऊ से हरी झंडी मिल गई है। बैंक द्वारा इस संबंध में फाइल शासन को भी भेज दी गई। ग्रुप को करीब 80 करोड़ का सॉफ्ट लोन बैंक द्वारा दिया जाना है। इसके बाद भी शासन में इसकी फाइल अटकी पड़ी है। इस संबंध में ग्रुप के अधिकारी शासन को पत्र लिख रहे हैं। किसानों के आंदोलन के बाद भी इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विदेश को चीनी निर्यात कर भुगतान के लिए कोशिश की जा रही हैं। वेव ग्रुप के डायरेक्टर डीएस बिंद्रा के अनुसार किसानों के भुगतान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बैंक द्वारा सॉफ्ट लोन देने की सहमति के बाद भी इसकी फाइल शासन स्तर पर अटकी हुई है। सॉफ्ट लोन मंजूर होते ही किसानों को भुगतान कर दिया जाएगा।
बिलाई चीनी मिल बकाएदार
जिले की बिलाई चीनी मिल को सॉफ्ट लोन देने से बैंक ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बिलाई चीनी मिल द्वारा अब भुगतान के लिए चीनी ही बेची जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बिलाई चीनी मिल पहले से ही बकाएदार है।
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बिजनौर। किसानों को गन्ना भुगतान देने के लिए सॉफ्ट लोन की फाइल अब शासन स्तर पर अटक गई है। लोन के संबंध में बैंक की हरी झंडी मिलने के बाद भी शासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे किसानों का भुगतान भी अटक गया है। ग्रुप के डायरेक्टर डीएस बिंद्रा ने इस संबंध में गन्ना आयुक्त को पत्र लिखकर सॉफ्ट लोन दिलाने के लिए कहा है।
जिले की तीन चीनी मिलों ने अब तक पिछले पेराई सत्र का भुगतान नहीं किया है। भुगतान न मिलने से किसान आंदोलन कर रहे हैं। वेव ग्रुप की बिजनौर, धनौरा व बुलंदशहर चीनी मिल पर भी करोड़ों रुपया बकाया है। इनमें अकेले बिजनौर चीनी मिल पर ही करीब दस हजार किसानों का 22.63 करोड़ रुपये बकाया है। ग्रुप द्वारा सॉफ्ट लोन के लिए आवेदन किया गया था। ग्रुप को लोन देने के लिए उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड लखनऊ से हरी झंडी मिल गई है। बैंक द्वारा इस संबंध में फाइल शासन को भी भेज दी गई। ग्रुप को करीब 80 करोड़ का सॉफ्ट लोन बैंक द्वारा दिया जाना है। इसके बाद भी शासन में इसकी फाइल अटकी पड़ी है। इस संबंध में ग्रुप के अधिकारी शासन को पत्र लिख रहे हैं। किसानों के आंदोलन के बाद भी इस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। विदेश को चीनी निर्यात कर भुगतान के लिए कोशिश की जा रही हैं। वेव ग्रुप के डायरेक्टर डीएस बिंद्रा के अनुसार किसानों के भुगतान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बैंक द्वारा सॉफ्ट लोन देने की सहमति के बाद भी इसकी फाइल शासन स्तर पर अटकी हुई है। सॉफ्ट लोन मंजूर होते ही किसानों को भुगतान कर दिया जाएगा।
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बिलाई चीनी मिल बकाएदार
जिले की बिलाई चीनी मिल को सॉफ्ट लोन देने से बैंक ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बिलाई चीनी मिल द्वारा अब भुगतान के लिए चीनी ही बेची जा रही है। अधिकारियों के अनुसार बिलाई चीनी मिल पहले से ही बकाएदार है।
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