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आधी-अधूरी तैयारी से डेंगू से लड़ेगा स्वास्थ्य विभाग
Updated Tue, 15 May 2018 12:28 AM IST
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बिजनौर। डेंगू एक जानलेवा बीमारी है। डेंगू से बचने के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। सिर्फ कागजों में डेंगू से लड़ने की तैयारी चल रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े की मानें तो अभी तक इस वर्ष पूरे जनपद में डेंगू का एक भी पाजिटिव केस नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने अपनी नाकामियत छिपाने के लिए पिछले साल के आंकड़ों में भी खेल कर दिया है। विभाग ने पिछले वर्ष केवल 22 लोगों के ही डेंगू पॉजिटिव होने की पुष्टि की है। जबकि जिलेभर में कम से कम 60 से 70 लोगों की मौत डेंगू से हुई थी।
डेंगू को परास्त करने के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 16 मई को डेंगू दिवस मनाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो विभाग के पास डेंगू से लड़ने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। अपनी नाकामी छिपाने के लिए विभाग आंकड़ों में भी खेल कर रहा है। पिछले साल के आंकड़ों की अगर बात करें तो अकेले झालू में करीब 40 लोग डेंगू की भेंट चढ़ गए थे। जबकि जिले भर में करीब 70 मरीजों के डेंगू से मरने के कारण पुष्टि हुई थी। इसके केवल प्रारंभिक जांच ही जनपद में की जा सकती है। जबकि पुष्टि करने के लिए खून का नमूना मेरठ के लिए भेजा जाता है। हालांकि बैक्टर जनित विभाग इस रोग से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम होने का वादा करता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही छहै।
आमतौर पर डेंगू जुलाई-अगस्त से शुरू होता है। लेकिन इस बार डेंगू ने समय से पहले ही दस्तक दे दी है। विभाग ने जिला अस्पताल दस और जनपद के सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्यकेंद्रों पर पांच बैड रिजर्व कराने की बात कही है। अफसर सरकारी आंकड़ों में खेल करते हुए जिले में एक भी केस नहीं होना स्वीकारते हैं, जबकि हकीकत में जिले में सैकड़ों लोगों के डेंगू के चपेट में हैं। हालांकि अफसर जिले में लार्वा साइट का छिड़काव करने की बात कह रहा है।
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बैक्टर जनित रोग एवं जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण का कहना है कि आमतौर पर डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है। साथ ही यह स्वच्छ पानी में उत्पन्न होता है। इसलिए अपने घरों के आसपास पानी जमा न होनें दें।
डेंगू के लक्षण
1.ठंड के साथ अचानक तेज बुखार आना।
2.मांसपेशियों तथा जोड़ों में तेज दर्द होना।
3.अत्यधिक कमजोरी महसूस होना,भूख कम लगना।
4.गले में सूजन आना।
5.ीशरीर पर रेशेज (दाने) निकलना।
बचाव के उपाय
1.पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
2.आसपास में पानी जमा न होने दें।
3.चार से अधिक दिन बुखार रहने पर खून की जांच तुरंत कराएं।
4.कूलर, एसी आदि का पानी तीसरे दिन बदलें।
5.साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
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डेंगू को परास्त करने के लिए पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 16 मई को डेंगू दिवस मनाया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो विभाग के पास डेंगू से लड़ने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। अपनी नाकामी छिपाने के लिए विभाग आंकड़ों में भी खेल कर रहा है। पिछले साल के आंकड़ों की अगर बात करें तो अकेले झालू में करीब 40 लोग डेंगू की भेंट चढ़ गए थे। जबकि जिले भर में करीब 70 मरीजों के डेंगू से मरने के कारण पुष्टि हुई थी। इसके केवल प्रारंभिक जांच ही जनपद में की जा सकती है। जबकि पुष्टि करने के लिए खून का नमूना मेरठ के लिए भेजा जाता है। हालांकि बैक्टर जनित विभाग इस रोग से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम होने का वादा करता है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही छहै।
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आमतौर पर डेंगू जुलाई-अगस्त से शुरू होता है। लेकिन इस बार डेंगू ने समय से पहले ही दस्तक दे दी है। विभाग ने जिला अस्पताल दस और जनपद के सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्यकेंद्रों पर पांच बैड रिजर्व कराने की बात कही है। अफसर सरकारी आंकड़ों में खेल करते हुए जिले में एक भी केस नहीं होना स्वीकारते हैं, जबकि हकीकत में जिले में सैकड़ों लोगों के डेंगू के चपेट में हैं। हालांकि अफसर जिले में लार्वा साइट का छिड़काव करने की बात कह रहा है।
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बैक्टर जनित रोग एवं जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण का कहना है कि आमतौर पर डेंगू का मच्छर दिन में ही काटता है। साथ ही यह स्वच्छ पानी में उत्पन्न होता है। इसलिए अपने घरों के आसपास पानी जमा न होनें दें।
डेंगू के लक्षण
1.ठंड के साथ अचानक तेज बुखार आना।
2.मांसपेशियों तथा जोड़ों में तेज दर्द होना।
3.अत्यधिक कमजोरी महसूस होना,भूख कम लगना।
4.गले में सूजन आना।
5.ीशरीर पर रेशेज (दाने) निकलना।
बचाव के उपाय
1.पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
2.आसपास में पानी जमा न होने दें।
3.चार से अधिक दिन बुखार रहने पर खून की जांच तुरंत कराएं।
4.कूलर, एसी आदि का पानी तीसरे दिन बदलें।
5.साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।