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नदी के जीवन को समझने लगे हैं घड़ियाल
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घड़ियालों की सुरक्षा में टीम मुस्तैद
डब्लूडब्लूएफ की टीम ने गंगा में छोड़े गए 60 में से 56 घड़ियालों को किया ट्रेस, नदी के जीवन को समझने लगे हैं घड़ियाल
फोटो
बिजनौर। गंगा में छोड़े गए घड़ियाल नदी के जीवन को समझने लगे हैं। गंगा में छोड़ गए घड़ियालों ने अपना जीवन नदी में शुरू कर दिया है। गंगा नदी में छोड़ गए 60 घड़ियाल में से 56 डब्लूडब्लूएफ की टीम ने ट्रेस भी कर लिए हैं। बाकी घड़ियाल के नदी में होने का अनुमान लगाया जा रहा है। घड़ियालों की सुरक्षा के लिए डब्लूडब्लूएफ की टीम मुस्तैद है।
जलीय जीव ही नदी का जीवन होते हैं। जिस नदी में जितने जलीय जीव होंगे, इसका मतलब होगा कि नदी का पानी उतना ही शुद्ध है। गंगा नदी में 13 मार्च को 60 घड़ियाल के शावक छोड़े गए थे। इनमें दस नर व 50 मादा घड़ियाल हैं। घड़ियालों पर डब्लूडब्लूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड) की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ नजर रख रही है। इन घड़ियाल को ट्रेस भी कर लिया है। एक दिन टीम को 55 तो दूसरे दिन 56 घड़ियाल गंगा किनारे दिखे। इन घड़ियालों ने नदी के जीवन को समझना शुरू कर दिया है। अब तक इन घड़ियाल ने तालाब में ही जीवन शुरू किया था, लेकिन अब ये नदी में पहुंच गए हैं। जितनी जल्दी ये नदी के जीवन को समझ लेंगे उतना जल्दी ही ये नदी में मिलनी वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाएंगे।
गंगा में छोड़े गए घड़ियाल की लंबाई 120 से 137 सेंटीमीटर तक है। इनका वजन 5.4 किलोग्राम से 6.2 किलोग्राम तक है। मगरमच्छ की विश्व में 23 प्रजाति पाई जाती हैं। घड़ियाल उनमें से एक है। घड़ियाल एशिया में अधिकतर भारत, बांग्लादेश व नेपाल में ही पाए जाते हैं। नील नदी के घड़ियाल के बाद भारतीय घड़ियाल मगरमच्छों की सबसे विशालकाय प्रजाति हैं। इनकी लंबाई साढ़े पांच मीटर तक होती है। घड़ियाल के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में केवल 200 मादा घड़ियाल ही अंडे दे रही हैं। ऐसे में इनके संरक्षण व संख्या बढ़ाने के लिए डब्लूडब्लूएफ द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। घड़ियाल की खुराक केवल मछली होती हैं। ये किसी अन्य जलीय जीव या जमीन पर आकर किसी जंतु का शिकार नहीं करते हैं।
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डब्लूडब्लूएफ की टीम ने गंगा में छोड़े गए 60 में से 56 घड़ियालों को किया ट्रेस, नदी के जीवन को समझने लगे हैं घड़ियाल
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बिजनौर। गंगा में छोड़े गए घड़ियाल नदी के जीवन को समझने लगे हैं। गंगा में छोड़ गए घड़ियालों ने अपना जीवन नदी में शुरू कर दिया है। गंगा नदी में छोड़ गए 60 घड़ियाल में से 56 डब्लूडब्लूएफ की टीम ने ट्रेस भी कर लिए हैं। बाकी घड़ियाल के नदी में होने का अनुमान लगाया जा रहा है। घड़ियालों की सुरक्षा के लिए डब्लूडब्लूएफ की टीम मुस्तैद है।
जलीय जीव ही नदी का जीवन होते हैं। जिस नदी में जितने जलीय जीव होंगे, इसका मतलब होगा कि नदी का पानी उतना ही शुद्ध है। गंगा नदी में 13 मार्च को 60 घड़ियाल के शावक छोड़े गए थे। इनमें दस नर व 50 मादा घड़ियाल हैं। घड़ियालों पर डब्लूडब्लूएफ (वर्ल्ड वाइल्ड फंड) की टीम पूरी मुस्तैदी के साथ नजर रख रही है। इन घड़ियाल को ट्रेस भी कर लिया है। एक दिन टीम को 55 तो दूसरे दिन 56 घड़ियाल गंगा किनारे दिखे। इन घड़ियालों ने नदी के जीवन को समझना शुरू कर दिया है। अब तक इन घड़ियाल ने तालाब में ही जीवन शुरू किया था, लेकिन अब ये नदी में पहुंच गए हैं। जितनी जल्दी ये नदी के जीवन को समझ लेंगे उतना जल्दी ही ये नदी में मिलनी वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाएंगे।
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गंगा में छोड़े गए घड़ियाल की लंबाई 120 से 137 सेंटीमीटर तक है। इनका वजन 5.4 किलोग्राम से 6.2 किलोग्राम तक है। मगरमच्छ की विश्व में 23 प्रजाति पाई जाती हैं। घड़ियाल उनमें से एक है। घड़ियाल एशिया में अधिकतर भारत, बांग्लादेश व नेपाल में ही पाए जाते हैं। नील नदी के घड़ियाल के बाद भारतीय घड़ियाल मगरमच्छों की सबसे विशालकाय प्रजाति हैं। इनकी लंबाई साढ़े पांच मीटर तक होती है। घड़ियाल के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है। एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व में केवल 200 मादा घड़ियाल ही अंडे दे रही हैं। ऐसे में इनके संरक्षण व संख्या बढ़ाने के लिए डब्लूडब्लूएफ द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। घड़ियाल की खुराक केवल मछली होती हैं। ये किसी अन्य जलीय जीव या जमीन पर आकर किसी जंतु का शिकार नहीं करते हैं।
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