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Bijnor News: 15 साल की छात्रा समिका सिंह ने लिख डाली किताब
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बिजनौर। उम्र महज 15 साल, लेकिन सोच और लेखन का दायरा किसी मंजे हुए लेखक से कम नहीं। छात्रा ने अपनी भावनाओं और अनुभवों को शब्दों में पिरोते हुए ‘भावनाओं को रोकने की शक्ति’ विषय पर किताब लिख डाली। खास बात यह है कि छात्रा की लिखी यह किताब अब अमेजन प्राइम समेत अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी पाठकों के लिए उपलब्ध है। कम उम्र में छात्रा की यह पहल रचनात्मक सोच और आत्मविश्वास को दर्शाती है।
शहर के मेरिटा पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ने वाली छात्रा समिका सिंह राव को किताबें पढ़ने का शौक है। सवाल करने की आदत की वजह से समिका ने किताब लिख दी। दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक साहित्य में विशेष रुचि रखने वाली समिका ने भावनाओं को रोकने की शक्ति विषय को चुनते हुए किताब लिखी। समिका का कहना है कि जब भावना समाप्त हो जाती है, स्पष्टता उत्पन्न होती है। भावनाओं को पूरी तरह फॉलो करें या पूरी तरह दबा दें। इंसान अपनी भावनाओं को महसूस भी करें, समझे, लेकिन उनके हाथों अपनी नियंत्रण दूसरे के हाथों में न सौंपे।
समिका ने कहा कि दार्शनिक दृष्टिकोण सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि हर चीज में पसंद है। अक्सर किसी सामान्य बात के पीछे छिपे असामान्य सवाल को खोजने की उसकी कोशिश रहती है। किताब लिखने के लिए समिका ने लोगों के व्यवहार, भावनात्मक पैटर्न और मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रियाएं को देखा और फिर उन्हें अपने दृष्टिकोण से समझने की कोशिश की।
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कागज पर तैयार किया था किताब का पहला ड्राफ्ट
समिका ने बताया कि किताब का पहला ड्राफ्ट कागज पर लिखकर तैयार किया था। उसके बाद कंप्यूटर से टाइप कराया। इसके बाद प्रूफरीडिंग और संपादन काम हुआ। किताब लिखने में करीब छह माह का समय लगा। रिसर्च के लिए मनोवैज्ञानिक एवं सेल्फ पुस्तकों का सहारा लिया। ताकि, भावनाओं, इंसानी व्यवहार को अलग-अलग मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझा जा सके। यह प्रक्रिया थोड़ी अलग रही।
हम भावनाओं को नहीं, भावनाएं हमें महसूस करती हैं: समिका
समिका कहना है कि हम अपनी भावनाओं को महसूस नहीं करते, बल्कि भावनाएं हमें महसूस करवाती हैं। गुस्सा हमें प्रतिक्रिया करवाता है। डर हमें रोकता है और लगाव हमें ऐसी चीजों से बांधे रखता है, जिन्हें शायद बहुत पहले छोड़ देना चाहिए था। भावनाएं हमारे जीवन को प्रभावित कर सकती हैं, इसी सवाल का जवाब जानने के लिए ‘भावनाओं को रोकने की शक्ति’ किताब लिखी। आपकी भावनाएं आपकी ताकत बनें, कमजोरी नहीं।
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शहर के मेरिटा पब्लिक स्कूल में कक्षा 10 में पढ़ने वाली छात्रा समिका सिंह राव को किताबें पढ़ने का शौक है। सवाल करने की आदत की वजह से समिका ने किताब लिख दी। दार्शनिक एवं मनोवैज्ञानिक साहित्य में विशेष रुचि रखने वाली समिका ने भावनाओं को रोकने की शक्ति विषय को चुनते हुए किताब लिखी। समिका का कहना है कि जब भावना समाप्त हो जाती है, स्पष्टता उत्पन्न होती है। भावनाओं को पूरी तरह फॉलो करें या पूरी तरह दबा दें। इंसान अपनी भावनाओं को महसूस भी करें, समझे, लेकिन उनके हाथों अपनी नियंत्रण दूसरे के हाथों में न सौंपे।
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समिका ने कहा कि दार्शनिक दृष्टिकोण सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि हर चीज में पसंद है। अक्सर किसी सामान्य बात के पीछे छिपे असामान्य सवाल को खोजने की उसकी कोशिश रहती है। किताब लिखने के लिए समिका ने लोगों के व्यवहार, भावनात्मक पैटर्न और मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रियाएं को देखा और फिर उन्हें अपने दृष्टिकोण से समझने की कोशिश की।
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कागज पर तैयार किया था किताब का पहला ड्राफ्ट
समिका ने बताया कि किताब का पहला ड्राफ्ट कागज पर लिखकर तैयार किया था। उसके बाद कंप्यूटर से टाइप कराया। इसके बाद प्रूफरीडिंग और संपादन काम हुआ। किताब लिखने में करीब छह माह का समय लगा। रिसर्च के लिए मनोवैज्ञानिक एवं सेल्फ पुस्तकों का सहारा लिया। ताकि, भावनाओं, इंसानी व्यवहार को अलग-अलग मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझा जा सके। यह प्रक्रिया थोड़ी अलग रही।
हम भावनाओं को नहीं, भावनाएं हमें महसूस करती हैं: समिका
समिका कहना है कि हम अपनी भावनाओं को महसूस नहीं करते, बल्कि भावनाएं हमें महसूस करवाती हैं। गुस्सा हमें प्रतिक्रिया करवाता है। डर हमें रोकता है और लगाव हमें ऐसी चीजों से बांधे रखता है, जिन्हें शायद बहुत पहले छोड़ देना चाहिए था। भावनाएं हमारे जीवन को प्रभावित कर सकती हैं, इसी सवाल का जवाब जानने के लिए ‘भावनाओं को रोकने की शक्ति’ किताब लिखी। आपकी भावनाएं आपकी ताकत बनें, कमजोरी नहीं।