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ुरपुर उपचुनाव
Updated Mon, 14 May 2018 12:04 AM IST
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धामपुर के भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह की 27 साल पहले सड़क हादसे में हुई थी मौत
सुरेंद्र सिंह के भाई राजेंद्र सिंह सहानुभूति लहर में जीत गए थे उपचुनाव
बिजनौर। नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान की पत्नी अवनी सिंह क्या नूरपुर विधानसभा के उपचुनाव में 27 साल पहले धामपुर से विधायक बने राजेंद सिंह का इतिहास दोहरा पाएगी। राजेंद्र सिंह के बड़े भाई भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उपचुनाव में राजेंद्र सिंह को भाजपा ने टिकट दिया था। भाई की मौत की सहानुभूति की लहर में राजेंद्र सिंह पहली बार विधायक बन गए थे।
धामपुर विधानसभा से रामलहर के दौरान 1989 में हुए चुनाव में भाजपा से चौहान बिरादरी के सुरेंद्र सिंह विधायक बने थे। सुरेंद्र सिंह की गिनती जिले के दमदार भाजपा नेताओं में होती थी। सुरेंद्र सिंह मूल रूप से स्योहारा क्षेत्र के गांव जसरामपुर के रहने वाले थे। 26 मार्च 1990 की सुबह पांच बजे जसरामपुर व स्योहारा के बीच विधायक सुरेंद्र सिंह की सड़क हादसे में सुरेंद्र की मौत हो गई थी। सुरेंद्र सिंह की मौत के बाद धामपुर विधानसभा के 1991 में हुए उपचुनाव में भाजपा हाईकमान ने सुरेंद्र सिंह के छोटे भाई राजेंद्र सिंह को टिकट दिया था। सहानुभूति की लहर में उनके भाई राजेंद्र सिंह चुनाव जीत गए थे। राजेंद्र सिंह को 63048 व दूसरे नंबर पर रहे बसपा के बुनियाद अली का 35397 वोट मिले थे। लेकिन इसके बाद राजेंद्र सिंह कभी चुनाव नहीं जीत पाए।
नूरपुर के भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान की 21 फरवरी को सीतापुर के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। लोकेंद्र चौहान की मौत भी सुरेंद्र सिंह की तरह सुबह पांच बजे ही सड़क हादसे में हुई थी। लोकेंद्र चौहान की गिनती भी चौहान बिरादरी के ताकतवर नेताओं में होती है। लोकेंद्र चौहान के गांव आलमपुरी व सुरेंद्र सिंह के गांव जसरामुपर में चार किलोमीटर की दूरी है। दोनों की ननिहाल एक ही गांव पेड़ी जसमौर की है। लोकेंद्र चौहान की मौत के बाद भाजपा ने नूरपुर विधानसभा के उपचुनाव में उनकी पत्नी अवनी सिंह पर दांव खेला है। अवनी सिंह मुरादाबाद के सांसद सर्वेश कुमार की बहन है। राजनैतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या अवनी सिंह भी राजेंद्र सिंह की तरह चुनाव जीतकर इतिहास दोहराएगी। लोकेंद्र चौहान की मौत की सहानुभूति का लाभ चुनाव में उन्हें मिलेगा। एक जुट हुए विरोधी दल को मात देने में वे कामयाब हो पाएगी या नहीं, ये तो मतगणना के बाद ही मालूम चलेगा।
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सुरेंद्र सिंह के भाई राजेंद्र सिंह सहानुभूति लहर में जीत गए थे उपचुनाव
बिजनौर। नूरपुर विधायक लोकेंद्र चौहान की पत्नी अवनी सिंह क्या नूरपुर विधानसभा के उपचुनाव में 27 साल पहले धामपुर से विधायक बने राजेंद सिंह का इतिहास दोहरा पाएगी। राजेंद्र सिंह के बड़े भाई भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। उपचुनाव में राजेंद्र सिंह को भाजपा ने टिकट दिया था। भाई की मौत की सहानुभूति की लहर में राजेंद्र सिंह पहली बार विधायक बन गए थे।
धामपुर विधानसभा से रामलहर के दौरान 1989 में हुए चुनाव में भाजपा से चौहान बिरादरी के सुरेंद्र सिंह विधायक बने थे। सुरेंद्र सिंह की गिनती जिले के दमदार भाजपा नेताओं में होती थी। सुरेंद्र सिंह मूल रूप से स्योहारा क्षेत्र के गांव जसरामपुर के रहने वाले थे। 26 मार्च 1990 की सुबह पांच बजे जसरामपुर व स्योहारा के बीच विधायक सुरेंद्र सिंह की सड़क हादसे में सुरेंद्र की मौत हो गई थी। सुरेंद्र सिंह की मौत के बाद धामपुर विधानसभा के 1991 में हुए उपचुनाव में भाजपा हाईकमान ने सुरेंद्र सिंह के छोटे भाई राजेंद्र सिंह को टिकट दिया था। सहानुभूति की लहर में उनके भाई राजेंद्र सिंह चुनाव जीत गए थे। राजेंद्र सिंह को 63048 व दूसरे नंबर पर रहे बसपा के बुनियाद अली का 35397 वोट मिले थे। लेकिन इसके बाद राजेंद्र सिंह कभी चुनाव नहीं जीत पाए।
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नूरपुर के भाजपा विधायक लोकेंद्र चौहान की 21 फरवरी को सीतापुर के पास सड़क हादसे में मौत हो गई थी। लोकेंद्र चौहान की मौत भी सुरेंद्र सिंह की तरह सुबह पांच बजे ही सड़क हादसे में हुई थी। लोकेंद्र चौहान की गिनती भी चौहान बिरादरी के ताकतवर नेताओं में होती है। लोकेंद्र चौहान के गांव आलमपुरी व सुरेंद्र सिंह के गांव जसरामुपर में चार किलोमीटर की दूरी है। दोनों की ननिहाल एक ही गांव पेड़ी जसमौर की है। लोकेंद्र चौहान की मौत के बाद भाजपा ने नूरपुर विधानसभा के उपचुनाव में उनकी पत्नी अवनी सिंह पर दांव खेला है। अवनी सिंह मुरादाबाद के सांसद सर्वेश कुमार की बहन है। राजनैतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या अवनी सिंह भी राजेंद्र सिंह की तरह चुनाव जीतकर इतिहास दोहराएगी। लोकेंद्र चौहान की मौत की सहानुभूति का लाभ चुनाव में उन्हें मिलेगा। एक जुट हुए विरोधी दल को मात देने में वे कामयाब हो पाएगी या नहीं, ये तो मतगणना के बाद ही मालूम चलेगा।
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