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Bhadohi News: जब आयुर्वेदिक अस्पताल खुद बीमार, कैसे हो मरीजों का उपचार
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ज्ञानपुर। जिले के आयुर्वेदिक अस्पताल खुद बीमार हैं, उन्हें उपचार की आवश्यकता है। जर्जर भवनों में चल रहे अस्पतालों की सुधि न तो विभाग ले रहा और न ही शासन।
इससे ऐसे अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों के साथ चिकित्सकों को परेशानी होती है। कभी-कभार तो अस्पताल में सीमेंट की पपड़ी भी टूटकर गिर जाती है। बारिश में ऐसे भवनों के ढहने की आशंका और भी बढ़ जाती है।
जिले में 26 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए डॉक्टरों के साथ अन्य कर्मचारियों की भी लगातार तैनाती की जा रही है। दवाएं भी पहले की अपेक्षा बढ़ाई गई, लेकिन कुछ अस्पतालों की दशा आज तक नहीं सुधर सकी।
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इसमें से मोढ़ बाजार, तिलंगा, लक्ष्मणपट्टी और बयावं का आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। यह अस्पताल काफी जर्जर एवं प्रयोग लायक नहीं बचा है। भवन पुराने हो चुके हैं।
गर्मी और ठंड में तो दिक्कत कम रहती है, लेकिन बारिश में चिंता बढ़ जाती है। अब भी ऐसे भवन में ही मरीज उपचार करने के लिए पहुंचते हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल पर ओपीडी की संख्या बढ़ी है। रोजाना 500 से 600 मरीज पहुंच रहे हैं।
दो से तीन दशक पहले बने कई अस्पताल अब जर्जर एवं बदहाल की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। मोढ़ आयुर्वेदिक अस्पताल से तो प्लास्टर गिर रहा है, जहां जान जोखिम में डालकर कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं। केंद्र पर चिकित्सकों और संसाधानों की कमी है। मरीज, तीमरदार यहां आने से बचते हैं।
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इससे ऐसे अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले मरीजों के साथ चिकित्सकों को परेशानी होती है। कभी-कभार तो अस्पताल में सीमेंट की पपड़ी भी टूटकर गिर जाती है। बारिश में ऐसे भवनों के ढहने की आशंका और भी बढ़ जाती है।
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जिले में 26 आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर करने के लिए डॉक्टरों के साथ अन्य कर्मचारियों की भी लगातार तैनाती की जा रही है। दवाएं भी पहले की अपेक्षा बढ़ाई गई, लेकिन कुछ अस्पतालों की दशा आज तक नहीं सुधर सकी।
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इसमें से मोढ़ बाजार, तिलंगा, लक्ष्मणपट्टी और बयावं का आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। यह अस्पताल काफी जर्जर एवं प्रयोग लायक नहीं बचा है। भवन पुराने हो चुके हैं।
गर्मी और ठंड में तो दिक्कत कम रहती है, लेकिन बारिश में चिंता बढ़ जाती है। अब भी ऐसे भवन में ही मरीज उपचार करने के लिए पहुंचते हैं। आयुर्वेदिक अस्पताल पर ओपीडी की संख्या बढ़ी है। रोजाना 500 से 600 मरीज पहुंच रहे हैं।
दो से तीन दशक पहले बने कई अस्पताल अब जर्जर एवं बदहाल की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। मोढ़ आयुर्वेदिक अस्पताल से तो प्लास्टर गिर रहा है, जहां जान जोखिम में डालकर कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं। केंद्र पर चिकित्सकों और संसाधानों की कमी है। मरीज, तीमरदार यहां आने से बचते हैं।