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स्वामी विवेकानंद के चरित्र को अपनाने का आह्वानफोटो-59
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भदोही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक मुनीश जी ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता की ओर जा रहे भारत को अध्यात्म की ओर ले जाने का श्रेय स्वामी विवेकानंद जी को जाता है। ये बातें उन्होंने रविवार को भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) में स्वामी जी के जयंती समारोह में कही। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने शिकागो सम्मेलन में जब भारतीय दर्शन की व्याख्या की तो संपूर्ण भारत देश उनकी ओर आकर्षित हो उठा। लोगों को लगा कि भारतीय दर्शन ही एकमात्र सैद्धांतिक रूप से विकल्प है। बताया कि स्वामी विवेकानंद जी ने भारत के विस्तृत व्याख्या में भा अर्थात प्रकाश, रत अर्थात संलग्न रहना बताया था। जिसका अर्थ भी उन्होंने बताया था कि जो सदैव प्रकाश की खोज में लगा रहे वह भारत है। वेदों उपनिषदों में कहीं भी यह व्याख्या नहीं की गई है क्योंकि विवेकानंद जी परम तत्व ज्ञानी थे। वे चाहते थे कि भारत का प्रत्येक वर्ग शिक्षित हो और अध्यात्म शिक्षा प्राप्त करे।
समारोह का शुभारंभ स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने स्वामी जी के चरित्र को अपनाने पर जोर दिया। अध्यक्षता अणु मिश्रा ने की। संचालन डा.गिरीश मिश्र ने किया। इस मौके पर जिला महाविद्यालयीन प्रमुख कुशल पांडेय, प्रमोद जी, निश्चल गौरव, मुन्ना सिंह, प्रशांत दूबे, सत्यशील जायसवाल, चंदन यादव, संदीप, प्रिंस गुप्ता, राकेश, सर्वेश्वर, विकास, राजीव, पंकज, प्रभाकर, कार्तिकेय मिश्र, आदर्श, वीरेंद्र, अजय कुमार आदि रहे।
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समारोह का शुभारंभ स्वामी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने स्वामी जी के चरित्र को अपनाने पर जोर दिया। अध्यक्षता अणु मिश्रा ने की। संचालन डा.गिरीश मिश्र ने किया। इस मौके पर जिला महाविद्यालयीन प्रमुख कुशल पांडेय, प्रमोद जी, निश्चल गौरव, मुन्ना सिंह, प्रशांत दूबे, सत्यशील जायसवाल, चंदन यादव, संदीप, प्रिंस गुप्ता, राकेश, सर्वेश्वर, विकास, राजीव, पंकज, प्रभाकर, कार्तिकेय मिश्र, आदर्श, वीरेंद्र, अजय कुमार आदि रहे।
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