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बीरघातिनी छाड़िसि सांॅगी
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Mon, 07 Nov 2016 01:24 AM IST
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छतमी में चल रही रामलीला के दौरान रावण दरबार में अंगद के जमे पांव को उठाते राक्षस।
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कौलापुर। श्री हरसूब्रह्म आदर्श रामलीला समिति छतमी की ओर से चल रही रामलीला में शनिवार की रात रावण-अंगद संवाद, लक्ष्मण शक्ति का कलाकारों ने मंचन किया। अंत में कलाकारों ने देश की सीमा पर तैनात जवानों के हौसले को भी कला के माध्यम से दर्शाया।
सीता की खोज में निकले श्रीराम सुग्रीव की मदद से समुद्र पर सेतु बनाकर लंका पहुंचते हैं। विभीषण के कहने पर रावण को फिर समझाने का प्रयास किया जाता है। इस दौरान बालि पुत्र अंगद रावण के पास जाते हैं। वहां प्रभु श्रीराम को डरपोक आदि कहने पर अंगद पांव जमा देते हैं। उनका पांव कोई भी राक्षस नहीं उठा पाता तो रावण खुद उठता है। अंगद यह कहकर टाल देते हैं कि जाओ प्रभु के चरण पकड़ो। अंतत: रावण के न मानने पर युद्ध शुरू होता है। लक्ष्मण और मेघनाद में महायुद्ध होता है, जिसमें लक्ष्मण शक्ति लगने से अचेत हो जाते हैं। विभिषण के कहने पर सुषैनवैध को बुलाया जाता है। संजीवनी देने पर लक्ष्मण दुबारा उठते हैं। उसके बाद मेघनाद और कुंभकरण का वध होता है।
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सीता की खोज में निकले श्रीराम सुग्रीव की मदद से समुद्र पर सेतु बनाकर लंका पहुंचते हैं। विभीषण के कहने पर रावण को फिर समझाने का प्रयास किया जाता है। इस दौरान बालि पुत्र अंगद रावण के पास जाते हैं। वहां प्रभु श्रीराम को डरपोक आदि कहने पर अंगद पांव जमा देते हैं। उनका पांव कोई भी राक्षस नहीं उठा पाता तो रावण खुद उठता है। अंगद यह कहकर टाल देते हैं कि जाओ प्रभु के चरण पकड़ो। अंतत: रावण के न मानने पर युद्ध शुरू होता है। लक्ष्मण और मेघनाद में महायुद्ध होता है, जिसमें लक्ष्मण शक्ति लगने से अचेत हो जाते हैं। विभिषण के कहने पर सुषैनवैध को बुलाया जाता है। संजीवनी देने पर लक्ष्मण दुबारा उठते हैं। उसके बाद मेघनाद और कुंभकरण का वध होता है।
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