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Bhadohi News: फर्जी निवास प्रमाण पत्र लगाने पर 15 साल बाद उर्दू शिक्षक बर्खास्त

Thu, 11 Apr 2024 02:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 02:58 AM IST
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Urdu teacher dismissed after 15 years for submitting fake residence certificate
कूट रचित तरीके से निवास प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी पाने वाले प्रधानाध्यापक को बुधवार को बर्खास्त कर दिया गया। वह बीते 15 सालों से नौकरी कर रहा था। शिकायत के बाद 21 सितंबर 2022 को उसे निलंबित कर जांच बैठा दी गई थी। जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है।
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बेसिक शिक्षा में नौकरी का सपना लिए कुछ अध्यापक फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन जब पोल खुलती है तो विभागीय कार्रवाई के बाद उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ता है। औराई ब्लॉक के उच्चतर प्राथमिक विद्यालय लसमणिया के प्रधानाध्यापक व उर्दू शिक्षक इम्तियाज अहमद को फर्जी निवास प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी करने के मामले में बर्खास्त कर दिया गया है। मूल रूप से बिहार के रहने वाले इम्तियाज की पहली तैनाती 21 जनवरी 2009 को डीघ ब्लॉक के बसगौति मवैया में हुई। 20 साल पहले इनके माता-पिता माधोसिंह बाजार में एक किराये के मकान में रहते थे। इम्तियाज की पढ़ाई भी यहीं से हुई है।
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बेसिक विभाग में उर्दू शिक्षक की वैकेंसी निकली तो उसने कूट रचित तरीके से कुटुंब रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराया। उसी के आधार पर निवास प्रमाण पत्र भी बनवा लिया। वैकेंसी के विज्ञापन में उर्दू शिक्षक के लिए मूल निवासी उत्तर प्रदेश का होने के साथ जहां प्रशिक्षण लेना था, वहां का निवास प्रमाण पत्र होने की शर्त थी। 11 फरवरी 2022 को माधोसिंह निवासी अनवारूल हक ने डायट व बीएसए से शिकायत दर्ज कराते हुए जांच कराने की मांग की। आरोप सही पाए जाने के बाद उसे 21 सितंबर 2022 को निलंबित कर जांच बैठा दी गई। जांच पूरी होने के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। बीएसए भूपेंद्र नारायण सिंह ने बताया कि कूट रचित तरीके से निवास प्रमाण पत्र लगाए जाने पर उर्दू शिक्षक को बर्खास्त किया गया है। इनसे पूरे वेतन की रिकवरी की जाएगी।
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तीन साल में छह शिक्षकों की सेवा हुई समाप्त
जिले में फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले शिक्षकों का मामला समय-समय पर उठता है। बीते तीन वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो विभिन्न ब्लॉकों के करीब छह शिक्षकों की सेवा समाप्त हो चुकी है। विभागीय कार्रवाई के बाद फर्जी तरीके से नौकरी करने वालों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं।
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