ज्ञानपुर। निपुण भारत अभियान को सफल बनाने में शिक्षा विभाग जुटा है, लेकिन स्कूलों में कार्यपुस्तिका न आने से मुहिम को झटका लग रहा है। जैसे-तैसे 90 फीसदी किताबें स्कूलों में पहुंच गई हैं, लेकिन कार्यपुस्तिका न आने से शिक्षकों संग बच्चों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले में 892 प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक और कंपोजिट विद्यालय संचालित हैं। इसमें करीब दो लाख पहली से आठवीं तक के बच्चे पंजीकृत हैं। नए शिक्षा सत्र के शुरू हुए करीब छह महीने गुजर गए, लेकिन अब तक शत-प्रतिशत किताबें स्कूलों में नहीं पहुंच सकी हैं। पहली से पांचवीं तक सभी किताबें आ चुकी हैं। आठवीं की भी किताब आ चुकी है, लेकिन सातवीं और छठवीं की तीन से चार विषयों की किताबें अब तक नहीं आ सकी हैं। शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो कुल 13 लाख 75 हजार किताबें आनी थीं, जिसमें 12 लाख 50 हजार के करीब आई हैं। वहीं दूसरी ओर अभी तक स्कूलों में कार्यपुस्तिका नहीं आ सकी है। इससे निपुण भारत अभियान की गतिविधियां भी पूरी नहीं हो पा रही हैं। कार्यपुस्तिका के अभाव में छात्र स्कूल और घर पर पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। कुछ शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल की अन्य व्यवस्थाएं ठीक हैं, लेकिन पुस्तकें और कार्यपुस्तिका समय से न मिलने से काफी हद तक पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र नारायण सिंह ने कहा कि नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें करीब-करीब सभी स्कूलों में पहुंच गई हैं। कार्यपुस्तिका भी आनी शुरू हो गई है। जल्द ही स्कूलों में भेजी जाएगी।