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किसान हित में लागू की जाए स्वामीनाथन रिपोर्ट:भाकियू

Sat, 26 Jun 2021 04:27 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jun 2021 04:27 PM IST
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Swaminathan report should be implemented in the interest of farmers: Bhakiyu
ज्ञानपुर। राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर शनिवार को जिला मुख्यालय पहुंच कर भारतीय किसान यूनियन टिकैत ग्रुप और अखिल भारतीय किसान सभा ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित आठ सूत्री मांगपत्र एसडीएम चंद्रशेखर को सौंपा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम के तहत ज्ञापन सौंपकर जिलाध्यक्ष अरुणेंद्र चौबे ने कहा कि किसानों का हित तभी संभव है जब सरकार स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करेगी। ऐसा न कर केंद्र सरकार तीन काले कानून को पारित कराते हुए जमापूंजी से वंचित करना चाहती है जिसे कभी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दौर में भी किसान अपनी मांगों को मानने के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, आजमगढ़, गाजीपुर की सीमाओं पर डटे हैं लेकिन उनकी सुधि लेने वाला कोई आगे नहीं आ रहा है। मात्र किसानों के नाम पर योजनाओं की घोषणा कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना कार्यप्रणाली बन चुकी है। अखिल भारतीय किसान सभा के जिलाध्यक्ष रमापति यादव ने कहा कि केंद्र और प्रदेश में काबिज सरकार की गलत नीतियों का नतीजा है कि जो योजनाएं चल रही है उसमें अंशदान की अनिवार्यता होने से किसान पीछे हट जाते हैं। यदि सरकार को इतनी चिंता है तो योजना को सफल बनाने के लिए पहले लाभ क्यों नहीं दिया जाता। किसान इतना ही सुविधा संपन्न होते तो निजी तौर पर हर स्थिति का सामना कर सकते हैं लेकिन ऐसा करने पर यही सरकार विभिन्न प्रकार के टैक्स वसूल कर चैन न लेने देती। उद्यान, कृषि, लघु सिंचाई विभागों में योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ कर औपचारिकता तक सीमित हो रही है और गैर जिलों के दुकानदार फर्जी कागजात पर अनुदान को भुनाने में कमी नहीं छोड़ना चाहते।
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उन्होंने कहा कि महंगाई की मार झेलकर कर्ज में डूबने वाले किसानों की हालत बिगड़ रही है। सिंचाई संसाधन, खाद-बीज सहकारी समितियां जर्जर होकर सरकार को मुंह चिढ़ा रही है, नहर, राजवाहा, माइनर, नदी, नाला की सफाई में खानापूर्ति की जा रही है। निजी नलकूप बिजली बिल की बढ़ोत्तरी से ठप होने की कगार पर है। नहर-नलकूप की नालियां भूमाफियाओं के कब्जे में है, आपदा, कृषि बीमा, छुट्टा पशुओं के नुकसान की भरपाई के लिए विभागों का चक्कर काटना मजबूरी है और सरकार मनमानी कानून बनाकर गरीब किसानों को पूंजीपतियों का बंधुआ बनाना चाहती है जिसे नहीं होने दिया जाएगा। मांग किया है कि तीनों काले कानून वापस लिए जाए, एमएसपी की गारंटी लेकर संविधान में संरक्षित कराया जाए, स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू कर किसान को राहत दी जाए, मंगाई पर रोक लगाकर सभी को नि:शुल्क वैक्सीन लगाई जाए, राजनीतिक बंदियों को अविलंब रिहा किया जाए, पेट्रो पदार्थ की कीमत आधी की जाए। इस मौके पर घनश्याम, मल्लूराम बिंद, राधेश्याम, सूर्यनाथ बिंद, श्यामधर यादव, हृदयतोष उपाध्याय, प्रेमबहादुर, रामचंद्र पटेल, बेचूलाल बिंद, अवध नारायण, जगलाल मौर्य, इंद्रदेव पाल आदि रहे।
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