{"_id":"6ae105840634d3568a09c457","slug":"shri-ram-delivered-ahalya-the-two-brothers-toured-janakpuri-bhadohi-news-c-191-1-gyn1003-150633-2026-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bhadohi News: श्रीराम ने किया अहिल्या का उद्धार, दोनों भाइयों ने किया जनकपुरी का भ्रमण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bhadohi News: श्रीराम ने किया अहिल्या का उद्धार, दोनों भाइयों ने किया जनकपुरी का भ्रमण
विज्ञापन
अमीर पट्टी के रामलीला में बधाई गीत गाते किन्नर और मंचन करते कलाकार। संवाद
क्षेत्र के अमीर पट्टी स्थित मारूती धाम हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला में सोमवार की शाम अहिल्या उद्धार, गंगा अवतरण और मीना बाजार की लीला का मंचन हुआ। इसके तहत मिथिला नरेश जनक के निमंत्रण पत्र की सूचना पर महर्षि विश्वामित्र राम व लक्ष्मण को लेकर जनकपुर के लिए निकलते हैं और रास्ते में शीला रूपी अहिल्या का उद्धार करते हुए जनकपुर पहुंच जाते हैं।
प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को देखकर मिथिला वासी खूब पुलकित होते हैं। मिथिला की महिलाएं आपस में ही बात करने लगती हैं कि यदि सीता स्वयंवर में राम का चयन हो जाए तो बहुत अच्छा होगा। एक दिन राम और लक्ष्मण जनकपुर की पुष्प वाटिका में महर्षि विश्वामित्र के लिए पुष्प लेने जाते हैं। जहां उनका मिलन सीता से हो जाता है। दोनों एक दूसरे को देखकर मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।
मिथिला में ही मीना बाजार का अवलोकन करने राम व लक्ष्मण पहुंचते हैं। मीना बाजार में औराई क्षेत्र के सेठ मंगलदास केसरी उनकी अगवानी करते हैं और मेले में तरह-तरह के आभूषण, हीरे व जवाहरात, खिलौने और मिठाइयों की दुकानों पर उनको ले जाते हैं। यह दृश्य देख दर्शक दीर्घा में बैठे लोग तालियां बजाकर प्रभु श्रीराम का जयकारा लगाने लगते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रभु श्री राम और लक्ष्मण को देखकर मिथिला वासी खूब पुलकित होते हैं। मिथिला की महिलाएं आपस में ही बात करने लगती हैं कि यदि सीता स्वयंवर में राम का चयन हो जाए तो बहुत अच्छा होगा। एक दिन राम और लक्ष्मण जनकपुर की पुष्प वाटिका में महर्षि विश्वामित्र के लिए पुष्प लेने जाते हैं। जहां उनका मिलन सीता से हो जाता है। दोनों एक दूसरे को देखकर मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।
विज्ञापन
मिथिला में ही मीना बाजार का अवलोकन करने राम व लक्ष्मण पहुंचते हैं। मीना बाजार में औराई क्षेत्र के सेठ मंगलदास केसरी उनकी अगवानी करते हैं और मेले में तरह-तरह के आभूषण, हीरे व जवाहरात, खिलौने और मिठाइयों की दुकानों पर उनको ले जाते हैं। यह दृश्य देख दर्शक दीर्घा में बैठे लोग तालियां बजाकर प्रभु श्रीराम का जयकारा लगाने लगते हैं।
विज्ञापन