{"_id":"57362b774f1c1b816b919e0e","slug":"seguidor-de-duelo-de-la-muerte-de-guru","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरुदेव की मौत पर शोक में डूबे अनुयायी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरुदेव की मौत पर शोक में डूबे अनुयायी
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Sat, 14 May 2016 01:01 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संत निरंकारी बाबा हरदेव सिंह की कनाडा में सड़क हादसे में मौत की खबर मिलते ही यहां उनके अनुयायियों में मातम छा गया। कंसापुर स्थित संत निरंकारी मंडल शाखा भवन में सन्नाटा छा गया और मृतक आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना में लीन हो गए। बाबा हरदेव इस वर्ष अगस्त में ज्ञानपुर आकर शिष्यों को दर्शन देने वाले थे, लेकिन उनके दर्शन से वंचित रह जाने की टीस अब अनुयायियों को सालने लगी है।
आश्रम की देखरेख करने वाले दीनदयाल मुखी ने बताया कि उन्होंने इंसान की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया था। उन्होंने कहा कि रक्तदान महादान है। इसके जरिए पृथ्वी पर जीवात्मा के बीच नैसर्गिक जुड़ाव होता है। इसे जरूर करना चाहिए। उनकी शिक्षाएं जीवन को एक नया आयाम दे रहीं थीं, लेकिन अचानक इस ताजे घटनाक्रम ने झकझोर कर रख दिया है। हजारों अनुयायी अमृत ज्ञान से महरूम रह गए। कई अनुयायियों को तो सहसा यकीन ही नहीं हुआ कि अचानक यह कैसे हो गया, लेकिन पता चला तो शोक संतप्त हो गए। रामजी ठेकेदार, विनोद चौरसिया, लाल बहादुर मौर्य, राम अवध, मुन्नीलाल यादव, अनिरुद्ध कुमार, ऊदल आदि लोग बाबा हरदेव के निधन की खबर सुनकर भावुक हो गए।
दीनदयाल मुखी के मुताबिकज्ञानपुर में संत निरंकारी मंडल शाखा की शुरुआत 1994 में हुई। उसके बाद से बाबा जी तो यहां नहीं आ पाए, लेकिन उनके आशीर्वाद के प्रभाव से सबकुछ सहजता से चलता रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन
आश्रम की देखरेख करने वाले दीनदयाल मुखी ने बताया कि उन्होंने इंसान की सेवा को सबसे बड़ा धर्म बताया था। उन्होंने कहा कि रक्तदान महादान है। इसके जरिए पृथ्वी पर जीवात्मा के बीच नैसर्गिक जुड़ाव होता है। इसे जरूर करना चाहिए। उनकी शिक्षाएं जीवन को एक नया आयाम दे रहीं थीं, लेकिन अचानक इस ताजे घटनाक्रम ने झकझोर कर रख दिया है। हजारों अनुयायी अमृत ज्ञान से महरूम रह गए। कई अनुयायियों को तो सहसा यकीन ही नहीं हुआ कि अचानक यह कैसे हो गया, लेकिन पता चला तो शोक संतप्त हो गए। रामजी ठेकेदार, विनोद चौरसिया, लाल बहादुर मौर्य, राम अवध, मुन्नीलाल यादव, अनिरुद्ध कुमार, ऊदल आदि लोग बाबा हरदेव के निधन की खबर सुनकर भावुक हो गए।
विज्ञापन
दीनदयाल मुखी के मुताबिकज्ञानपुर में संत निरंकारी मंडल शाखा की शुरुआत 1994 में हुई। उसके बाद से बाबा जी तो यहां नहीं आ पाए, लेकिन उनके आशीर्वाद के प्रभाव से सबकुछ सहजता से चलता रहा।
विज्ञापन