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Bhadohi News: फर्जी कागज दिखाकर कर दिया बैनामा, चार पर प्राथमिकी
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तहसील के समधा ताल में जमीन खरीद-फरोख्त के नाम पर धोखाधड़ी करने पर चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।
आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी कागजात दिखाकर पीड़ित से समधाताल में जमीन का बैनामा किया। 94 लाख से बैनामा कराए जाने के बाद विवादित जमीन का पैसा वापस मांगने पर आरोपियों के की ओर से धमकी दी जा रही है।
वाराणसी के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के कल्लीपुर निवासी सतीश कुमार पटेल ने बताया कि उन्होंने प्रीतम पटेल, गोविन्द पटेल और आशीष पटेल के साथ मिलकर 09 जून 2026 को घनश्याम, रामाश्रय निवासी केशरीपुर, रोहनिया और बच्चन व मोहन निवासी डुढाव औराई से तालसमधा मौजे में जमीन खरीदी थी।
बताया कि विक्रेताओं ने उस जमीन को विवादरहित बताया था। उन्होंने 02 अप्रैल 2026 की लेखपाल रिपोर्ट दिखाकर जमीन पर अपने कब्जे का आश्वासन दिया था।
बैनामा रजिस्ट्री होने के बाद जब वे मौके पर कब्जा लेने पहुंचे, तो पता चला कि विक्रेताओं का उस जमीन पर कभी कब्जा था ही नहीं। शिकायत करने पर, विक्रेताओं ने 02 जुलाई 2026 को एक लिखित समझौता किया।
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जिसमें कहा कि यदि पक्की पैमाइश के बाद कब्जा नहीं मिलता है, तो वे पूरी धनराशि और स्टाम्प खर्च वापस कर देंगे।
हालांकि विक्रेताओं ने साजिश के तहत जाली और फर्जी कागजात तैयार करवाकर बैनामा पंजीकृत कराया था।
बताया कि समझौते के मुताबिक 30 सितंबर 2026 तक 15-15 लाख रुपये और 10 अक्तूबर 2026 तक शेष धनराशि वापस करने का वादा किया।
आरोप लगाया कि 14 अक्तूबर 2026 को जब क्रेतागण ने फिर संपर्क किया, तो विक्रेताओं ने पैसे देने से इन्कार कर दिया और दबाव बनाने पर जान से मारने की धमकी भी दी। जिसके बाद पीड़ित ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।
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आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी कागजात दिखाकर पीड़ित से समधाताल में जमीन का बैनामा किया। 94 लाख से बैनामा कराए जाने के बाद विवादित जमीन का पैसा वापस मांगने पर आरोपियों के की ओर से धमकी दी जा रही है।
वाराणसी के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के कल्लीपुर निवासी सतीश कुमार पटेल ने बताया कि उन्होंने प्रीतम पटेल, गोविन्द पटेल और आशीष पटेल के साथ मिलकर 09 जून 2026 को घनश्याम, रामाश्रय निवासी केशरीपुर, रोहनिया और बच्चन व मोहन निवासी डुढाव औराई से तालसमधा मौजे में जमीन खरीदी थी।
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बताया कि विक्रेताओं ने उस जमीन को विवादरहित बताया था। उन्होंने 02 अप्रैल 2026 की लेखपाल रिपोर्ट दिखाकर जमीन पर अपने कब्जे का आश्वासन दिया था।
बैनामा रजिस्ट्री होने के बाद जब वे मौके पर कब्जा लेने पहुंचे, तो पता चला कि विक्रेताओं का उस जमीन पर कभी कब्जा था ही नहीं। शिकायत करने पर, विक्रेताओं ने 02 जुलाई 2026 को एक लिखित समझौता किया।
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जिसमें कहा कि यदि पक्की पैमाइश के बाद कब्जा नहीं मिलता है, तो वे पूरी धनराशि और स्टाम्प खर्च वापस कर देंगे।
हालांकि विक्रेताओं ने साजिश के तहत जाली और फर्जी कागजात तैयार करवाकर बैनामा पंजीकृत कराया था।
बताया कि समझौते के मुताबिक 30 सितंबर 2026 तक 15-15 लाख रुपये और 10 अक्तूबर 2026 तक शेष धनराशि वापस करने का वादा किया।
आरोप लगाया कि 14 अक्तूबर 2026 को जब क्रेतागण ने फिर संपर्क किया, तो विक्रेताओं ने पैसे देने से इन्कार कर दिया और दबाव बनाने पर जान से मारने की धमकी भी दी। जिसके बाद पीड़ित ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई।