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Bhadohi News: 50 बेड के शेल्टर होम बचे केवल 19 बेड, चादर-कंबल भी फटे-पुराने
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ज्ञानपुर। जिले के इकलौते स्थायी शेल्टर होम में दुर्व्यवस्थाओं की भरमार है। स्थिति यह है कि 50 बेड के इस आश्रय गृह में केवल 19 बेड बचे हैं। जिसमें 10 चौकिंयां नयी आयी हैं। शेल्टर होम के कमरे गंदगी और बिखरे सामान इसकी हकीकत को बयां कर रहे हैं। आश्रय स्थल में चादर और कंबल भी काफी गंदे व बदहाल मिले।
जिले में ठंडक ने दस्तक दे दी है। शाम होते ही गुलाबी ठंड लोगों को स्वेटर और फुल बांह की शर्ट पहनने को मजबूर कर रही है। निराश्रित लोगों ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे न सोना पड़े। इसके लिए निकायों में आश्रय स्थल बनाए जाते हैं। वहीं ज्ञानपुर में जिले का इकलौता 50 बेड का स्थायी शेल्टर होम वीएनजीआईसी कॉलेज के ठीक सामने संचालित है। करीब पांच साल पहले बने इस पंडित दीनदयाल आश्रय स्थल की देखरेख का जिम्मा नगर पंचायत के ऊपर है। नगर पंचायत ने इसकी देखरेख के लिए कार्यदायी संस्था नामित की है, लेकिन कार्यदायी संस्था की अनदेखी के कारण शेल्टर होम दुर्दशा का शिकार हो रहा है। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को शेल्टर होम की पड़ताल की। जहां शेल्टर होम केवल 19 बेड मिले। उसमें भी कई ऐसे थे, जिस पर ढंग के बिस्तर भी नहीं पड़े हैं। शेल्टर के होम के कमरे गंदगी ऐसी पसरी थी। जैसे लग रहा था कि कई महीनों से इसकी सफाई नहीं की गयी है। इसके अलावा शौचालय व वाशरूम भी अच्छे तरीके से साफ नहीं मिले। ठंड के दस्तक के साथ निराश्रित लोगों को शेल्टर होम की जरूरत पड़ती है, लेकिन बिना चादर और कंबल के किस तरह से लोग रात बितायेंगे यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
नगर पंचायत में धनराशि का अभाव है। चुनाव के समय शेल्टर होम में कुछ व्यवस्थाएं इधर से उधर हुई थी। जिसे सही कराया जा रहा है। शीतकालीन से पूर्व ही यहां सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराया ली जाएंगी।-- राजेंद्र कुमार दूबे, ईओ नपं ज्ञानपुर
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जिले में ठंडक ने दस्तक दे दी है। शाम होते ही गुलाबी ठंड लोगों को स्वेटर और फुल बांह की शर्ट पहनने को मजबूर कर रही है। निराश्रित लोगों ठिठुरती ठंड में खुले आसमान के नीचे न सोना पड़े। इसके लिए निकायों में आश्रय स्थल बनाए जाते हैं। वहीं ज्ञानपुर में जिले का इकलौता 50 बेड का स्थायी शेल्टर होम वीएनजीआईसी कॉलेज के ठीक सामने संचालित है। करीब पांच साल पहले बने इस पंडित दीनदयाल आश्रय स्थल की देखरेख का जिम्मा नगर पंचायत के ऊपर है। नगर पंचायत ने इसकी देखरेख के लिए कार्यदायी संस्था नामित की है, लेकिन कार्यदायी संस्था की अनदेखी के कारण शेल्टर होम दुर्दशा का शिकार हो रहा है। अमर उजाला की टीम ने सोमवार को शेल्टर होम की पड़ताल की। जहां शेल्टर होम केवल 19 बेड मिले। उसमें भी कई ऐसे थे, जिस पर ढंग के बिस्तर भी नहीं पड़े हैं। शेल्टर के होम के कमरे गंदगी ऐसी पसरी थी। जैसे लग रहा था कि कई महीनों से इसकी सफाई नहीं की गयी है। इसके अलावा शौचालय व वाशरूम भी अच्छे तरीके से साफ नहीं मिले। ठंड के दस्तक के साथ निराश्रित लोगों को शेल्टर होम की जरूरत पड़ती है, लेकिन बिना चादर और कंबल के किस तरह से लोग रात बितायेंगे यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
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नगर पंचायत में धनराशि का अभाव है। चुनाव के समय शेल्टर होम में कुछ व्यवस्थाएं इधर से उधर हुई थी। जिसे सही कराया जा रहा है। शीतकालीन से पूर्व ही यहां सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कराया ली जाएंगी।
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