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नोटबंदी: एक सप्ताह में औंधे मुहं गिरा व्यापार
अमर उजाला ब्यूरो , भदोही
Updated Fri, 18 Nov 2016 01:18 AM IST
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नोटबंदी का असर अब छोटे और मझोले व्यापार पर दिखने लगा है। एक सप्ताह में व्यापार औंधे मुहं गिर गया है। ऊनी कपड़े, गारमेंट समेत अन्य दूकानों का कारोबार 30 फीसदी तक प्रभावित हो गया। इसको लेकर व्यापारियों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी है। आसमान छू रही सब्जियों की कीमत भी धड़ाम हो गई है। हरी सब्जियों की कीमत 10 से 15 रुपये तक घट गई है। कुछ दूकानदार उधारी तो कुछ कम फायदा लेकर भी सामानों को बेच रहे हैं।
आठ नवंबर को पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने के बाद से दूकानदारी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। फैसले के करीब 10 दिन बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। मांगलिक सीजन में दूकानों पर दिखने वाली रौनक ही गायब हो चुकी है। इक्का-दुक्का लोग ही गारमेंट, किराना, जूता-चप्पल और जनरल स्टोर पर दिख रहे हैं। कपड़ा व्यापारी राजेश दूबे ने कहा कि नोटबंदी के बाद दूकानदारी प्रभावित हो गई है। 30 फीसदी से अधिक कारोबार प्रभावित हो गया है। जान-पहचान के लोगों को उधार ही सामान बेचा जा रहा है। ज्ञानपुर के जूता व्यवसायी परवेज अहमद ने कहा कि नोटबंदी से महंगे सामान नहीं बिक रहे हैं। पुराने और सस्ते सामान की ही लोग खरीदारी कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद 40 फीसदी तक व्यापार घट गया है। नोटबंदी का असर अब सब्जी पर दिखने लगा है। 10 दिन पूर्व आसमान छू रही कीमत भी धड़ाम हो गया है। जो फूलगोभी 25 से 30 रुपये की मिल रही थी वह 15 में मिल रही है। पालक 30 रुपये किलो से 18 रुपये, करैला 60 रुपये से 30 रुपये, भिंडी 40 से 30 पहुंच गया है। सब्जी विक्रेता कल्लन यादव ने कहा कि पहले की तरह दूकान पर भीड़ नहीं होती। चौरी बाजार के सब्जी विक्रेता सुद्धू चौहान और राजकुमार ने कहा कि नोटबंदी से सब्जियों की कीमत आधी हो गई है। किराना व्यापारी दीपक और बबलू ने कहा कि नोटबंदी से ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। एक बार में 500 से एक हजार की खरीदारी करने वाले लोग 200 से 300 की खरीदारी कर रहे हैं। ज्यादातर लोग कहते है पता नही कल बैंक से पैसा मिल पायेगा या नहीं।
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आठ नवंबर को पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने के बाद से दूकानदारी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। फैसले के करीब 10 दिन बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है। मांगलिक सीजन में दूकानों पर दिखने वाली रौनक ही गायब हो चुकी है। इक्का-दुक्का लोग ही गारमेंट, किराना, जूता-चप्पल और जनरल स्टोर पर दिख रहे हैं। कपड़ा व्यापारी राजेश दूबे ने कहा कि नोटबंदी के बाद दूकानदारी प्रभावित हो गई है। 30 फीसदी से अधिक कारोबार प्रभावित हो गया है। जान-पहचान के लोगों को उधार ही सामान बेचा जा रहा है। ज्ञानपुर के जूता व्यवसायी परवेज अहमद ने कहा कि नोटबंदी से महंगे सामान नहीं बिक रहे हैं। पुराने और सस्ते सामान की ही लोग खरीदारी कर रहे हैं। नोटबंदी के बाद 40 फीसदी तक व्यापार घट गया है। नोटबंदी का असर अब सब्जी पर दिखने लगा है। 10 दिन पूर्व आसमान छू रही कीमत भी धड़ाम हो गया है। जो फूलगोभी 25 से 30 रुपये की मिल रही थी वह 15 में मिल रही है। पालक 30 रुपये किलो से 18 रुपये, करैला 60 रुपये से 30 रुपये, भिंडी 40 से 30 पहुंच गया है। सब्जी विक्रेता कल्लन यादव ने कहा कि पहले की तरह दूकान पर भीड़ नहीं होती। चौरी बाजार के सब्जी विक्रेता सुद्धू चौहान और राजकुमार ने कहा कि नोटबंदी से सब्जियों की कीमत आधी हो गई है। किराना व्यापारी दीपक और बबलू ने कहा कि नोटबंदी से ग्राहकों की संख्या कम हो गई है। एक बार में 500 से एक हजार की खरीदारी करने वाले लोग 200 से 300 की खरीदारी कर रहे हैं। ज्यादातर लोग कहते है पता नही कल बैंक से पैसा मिल पायेगा या नहीं।
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