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Bhadohi News: सेवई की दुकानों से सजे बाजार

Mon, 17 Apr 2023 12:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 17 Apr 2023 12:52 AM IST
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Market decorated with vermicelli shops
ईद की सेवई का नाम जुबां पर आते ही मुंह में आ जाता है पानी
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भदोही। माहे रमजान अपने आखरी मुकाम की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही लोगों की जुबां पर ईद का नाम चलने लगा है। ईद का नाम लें तो लजीज सेवई की मिठास मुंह में पानी ला देती है। कहते हैं कि सेवई तो 365 दिन में कभी भी बनाई जा सकती है, लेकिन ईद की सेवई स्वाद ही अलग होता है। इस समय सेवई की दुकानों से बाजार सज गया है
ईद मुस्लिम भाईयों का सबसे बड़ा पर्व है। मान्यता है कि 30 दिन रोजे रखने के बाद लोगों को अल्लाह ने ईद तोहफे में दी है। तथा ईद का सबसे जरूरी व्यंजन है सेवई। ईद में मुश्किल से एक सप्ताह बाकी रह गया है। जिसको देखते हुए बाजार में सेवई की दुकानें सजने लगी हैं। अजिमुल्लाह चौराहे से कटरा बाजार में घुसते ही पटरियों पर सेवई की अस्थाई दुकानें राहगीर का ध्यान खींच लेती हैं। अकेले कटरा बाजार में दो दर्जन दुकानें लगी हैं। जहां सेवई की विभिन्न किस्में सजी हैं। बाकी छोटे-छोटे बाजारों में भी सेवई मिल रही है। गत वर्ष के मुकाबले सेवई की कीमतें 10 प्रतिशत तक महंगी हुई हैं। दुकानदार अरविंद कुमार जीतू एक दशक से एक ही स्थान पर सेवई की दुकान लगाते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कच्ची सेवई तो दो ही प्रकार की होती है, लेकिन घरों में एक दर्जन से अधिक प्रकार की बनाई जाती है। सेवई जितनी महीन होगी उतनी ही महंगी होगी। इस वर्ष किमामी सेवई 80 रूपये से लेकर 100 रुपये कीलो तक तथा दूधफेनी सेवई 140 रुपये कीलो तक बिक रही हैं।
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ईद की मुख्य सेवई किमामी होती है। यह बनने में समय लेती है, लेकिन स्वाद में कोई दूसरी सेवई इसकी बराबरी नहीं कर सकती। यह दुनिया भर में सर्वाधिक प्रचलित है और हर गरीब अमीर के यहां यह जरूर बनाई जाती है। इसके अलावा ड्राई फ्रूट, दूध, खोवा, देशी घी के मिश्रण से एक ही सेवई को कई प्रकार की बनाई जाती है। दुनिया भर में यह काफी प्रचलित है। दूध फेनी सेवई कुछ ही मिनटों में बनाकर परोसी जा सकती है। शी-कोरमा भी पूर्वांचल में काफी प्रचलित है और बहुत लजीज होती है। अंजुम आरा, गृहणी पश्चिम तरफ
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किमामी सेवाई बनाने में सबसे अधिक मेहनत लेती है। इसमें जितनी लागत लगाएंगी उतनी ही अच्छी बनती है। जब इस सेवई को खाने के बाद लोग प्रशंसा कर देते हैं तो मेहनत का फल मिल जाता है। मेरा पूरा ध्यान हमेशा से किमामी सेवई पर होता है, क्योंकि बाकी सेवई तो साल में कभी भी बनाकर खाई या खिलाई जा सकती है, लेकिन किमामी सेवई की बात ही अलग है। ये वो सेवई है जो दूर-दूर से लोग न केवल खाने के लिए आते हैं, बल्कि पहले से ही इसके लिए बोले रहते हैं। -रेहाना अंसारी, नईबाजार
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