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मौसम का असर बदला
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी में ठंड असर दिखाने लगी है। सोमवार को कोहरे की चादर ने समूचे जिले को ढंक लिया। हालत यह हो गई कि दिन के नौ बजे तक वाहनों को सड़क पर चलने के लिए हेडलाइट जलानी पड़ी। इस दौरान सरसराती हवाओं ने कंपकंपी छुड़ा दी। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को हुई।
सोमवार को सुबह हुई तो चारों ओर कोहरे का गुबार था। हवाओं के साथ कोहरे का गुबार उड़कर शिमला के मौसम का एहसास दिला रहा था। सरसराती हवाओं ने पारा लुढ़का दिया। सोमवार को जिले का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री पहुंच गया। जबकि अधिकतम तापमान 22 डिग्री रहा। इससे लोगों की कंपकंपी छूट गई। जगह-जगह लोग अलाव के सहारे बैठे रहे। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को हुई। वे ठिठुरते हुए स्कूल गए। सर्द हवाओं ने मासूमों के चेहरे सुर्ख कर दिए थे। कोहरे की मोटी चादर सुबह नौ बजे तक तनी रही। इसका असर यातायात पर पड़ा। दिन में भी वाहनों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। इस दौरान सड़कों पर यातायात का दबाव भी कम हो गया था। गिनती के वाहन चलते देखे जा रहे थे। वाराणसी-प्रयागराज राजमार्ग पर वाहनों की रफ्तार पर कोहरे ने करारा ब्रेक लगाया। गोपीगंज से वाराणसी और प्रयागराज की दूरी तय करने में डेढ़ से दो घंटे अधिक समय लग गया। 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं सर्द हवाओं ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी। प्रशासनिक स्तर पर गिनती के स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर लोग ठंड से सिकुड़ते नजर आए। ज्ञानपुर नगर में दुर्गागंज तिराहा, हरिहरनाथ धाम और शीतल पाल तिराहे पर अलाव जलता दिखा। अन्य स्थानों पर लोग अपनी व्यवस्था से अलाव का इंतजाम कर हाथ सेंकते दिखे। यद्यपि 10 बजे के आसपास धूप निकलने के बाद कोहरा छंटने लगा और मौसम सामान्य हो गया। धूप निकली तो लोग धूप सेंकने के लिए छतों पर निकल आए।
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सोमवार को सुबह हुई तो चारों ओर कोहरे का गुबार था। हवाओं के साथ कोहरे का गुबार उड़कर शिमला के मौसम का एहसास दिला रहा था। सरसराती हवाओं ने पारा लुढ़का दिया। सोमवार को जिले का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री पहुंच गया। जबकि अधिकतम तापमान 22 डिग्री रहा। इससे लोगों की कंपकंपी छूट गई। जगह-जगह लोग अलाव के सहारे बैठे रहे। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को हुई। वे ठिठुरते हुए स्कूल गए। सर्द हवाओं ने मासूमों के चेहरे सुर्ख कर दिए थे। कोहरे की मोटी चादर सुबह नौ बजे तक तनी रही। इसका असर यातायात पर पड़ा। दिन में भी वाहनों को हेडलाइट जलाकर चलना पड़ा। इस दौरान सड़कों पर यातायात का दबाव भी कम हो गया था। गिनती के वाहन चलते देखे जा रहे थे। वाराणसी-प्रयागराज राजमार्ग पर वाहनों की रफ्तार पर कोहरे ने करारा ब्रेक लगाया। गोपीगंज से वाराणसी और प्रयागराज की दूरी तय करने में डेढ़ से दो घंटे अधिक समय लग गया। 11 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं सर्द हवाओं ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी। प्रशासनिक स्तर पर गिनती के स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर लोग ठंड से सिकुड़ते नजर आए। ज्ञानपुर नगर में दुर्गागंज तिराहा, हरिहरनाथ धाम और शीतल पाल तिराहे पर अलाव जलता दिखा। अन्य स्थानों पर लोग अपनी व्यवस्था से अलाव का इंतजाम कर हाथ सेंकते दिखे। यद्यपि 10 बजे के आसपास धूप निकलने के बाद कोहरा छंटने लगा और मौसम सामान्य हो गया। धूप निकली तो लोग धूप सेंकने के लिए छतों पर निकल आए।
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