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आईजीआरएस : आधी हकीकत, आधा फसाना

Thu, 22 Sep 2022 09:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 22 Sep 2022 09:33 PM IST
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IGRS: Half reality, half fiction
ज्ञानपुर। जिले में आईजीआरएस (समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली) आधी हकीकत, आधा फसाना बनकर रह गई है। विकास कार्यों से लेकर बुनियादी समस्याओं तक के समयबद्ध और समुचित समाधान के लिए बना जन सुनवाई पोर्टल अफसरों की आंकड़ेबाजी के कारण मजाक बन गया हैं। सरकार का मकसद है कि जन समस्याओं से जुड़ी शिकायतें सीधे आनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराएं, जिससे अधिकारी और शासन स्तर पर इसका आंकलन किया जा सके। शुरुआती दौर में पोर्टल पर आने वाली शिकायतों को अधिकारी गंभीरता से लेकर उसके निस्तारण में भी रुचि लेते थे पर अब शिकायतें कैसी भी हों निस्तारण को मजाक बना दिया गया है। सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण का मामला हो या छात्रवृत्ति और खाद्यान्न वितरण में अनियमितताओं की बात अथवा टूटी सड़कों और गंदगी की शिकायत, अधिकारी और उनके अधीनस्थ ज्यादातर मामलों के निस्तारित किए जाने का दावा कर वाहवाही लूट रहे हैं। दरअसल, मातहत दफ्तर में बैठकर ही समस्याओं का निस्तारण दिखा कर फाइल क्लोज कर देते हैं और आला अफसर स्थलीय सत्यापन में रुचि नहीं दिखाते हैं। परिणामस्वरूप, शिकायतकर्ता और पीड़ित आदमी निस्तारण के फर्जीवाड़े की फाइल लेकर फिर से दफ्तरों के चक्कर लगाने लगता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अधिकतर शिकायतें जमीन से जुड़ी आती हैं। राजस्व विभाग की उदासीनता के कारण ज्यादातर मामले लंबित रह जाते हैं। आनलाइन शिकायतों का निस्तारण समयबद्ध तरीके से होता है। लापरवाही बरतने वालों पर वेतन रोकने, प्रतिकूल प्रविष्टि जैसी कार्रवाई होती है। अब शिकायतों का निस्तारण करते समय देरी होने पर विभाग की तरफ से यह स्पष्ट किया जाएगा कि कारण क्या है और कब तक मामला निस्तारित होगा।- शैलेंद्र मिश्र, एडीएम
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